Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी में भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए INDIA गठबंधन के नेता आज सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच कर रहे हैं। मतदाता सूची में गड़बड़ी और ईवीएम के मुद्दों को लेकर विपक्ष सड़क पर उतरा है। विपक्ष के इस तीखे तेवर के बीच दिल्ली प्रशासन ने सुरक्षा का कड़ा पहरा लगा दिया है।
अर्धसैनिक बलों (CRPF और RAF) की तैनाती के साथ-साथ 6 व्यस्त मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है और कई रास्तों पर भारी ट्रैफिक डायवर्जन लागू है। इससे सुबह की बारिश के बीच पूरी लुटियंस दिल्ली में गाड़ियों के पहिये थम गए हैं, जिसने राजनीतिक पारे के साथ-साथ राजधानी की चिंता भी बढ़ा दी है।
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पत्रकारों के साथ बदसलूकी (Jantar Mantar Protest)
आंदोलन के दौरान जमीन पर जो हालात दिख रहे हैं और प्रदर्शनकारियों व पत्रकारों को लेकर प्रशासन का जो रवैया है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया और ग्राउंड से कई ऐसी फुटेज सामने आई हैं, जो लोकतांत्रिक तंत्र और व्यवस्था की अवहेलना करती हैं। जिस तरह से कुछ जगहों पर उग्र तत्वों को नजरअंदाज करने और कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ सख्त रुख अपनाने के आरोप लग रहे हैं, उससे जनता के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई लोकतंत्र खतरे में है?
आपको बता दें कि ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हमारे संवाददाता रंजय कुमार को भी पुलिस द्वारा हिरासत (detain) में लिया गया। हालांकि, कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन इससे मूल सवाल नहीं बदलता। पत्रकार सिर्फ अपना काम कर रहे थे और जनता तक सच पहुंचाना ही उनकी जिम्मेदारी है। ऐसे में उन्हें उनका काम करने से रोककर प्रशासन आखिर कौन सी ड्यूटी निभा रहा है?
‘यह लोकतंत्र हैं या लाठी तंत्र’ दिल्ली पुलिस ने बर्बरता से हमारे पत्रकार को किया डिटेन, दिल्ली के RK Ashram में पुलिस ने क्रूरता की हदों को पार करते हुए पत्रकारों के साथ अभद्रता और कैमरामेनो से छीन रही कैमरे…
#Delhi #RKAshram #DelhiPolice #DelhiProtest #Journalist #Nedricknews https://t.co/tMlSbu2jzV— Nedrick News (@nedricknews) October 11, 2026
प्रज्ञा मिश्रा अन्य मीडियाकर्मियों जबरन लिया हिरासत में
दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही लोकप्रिय स्वतंत्र पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा के साथ-साथ हमारे रिपोर्टर रंजय कुमार और कई अन्य मीडियाकर्मियों को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत (detain) में ले लिया। पुलिस की इस दमनकारी कार्रवाई के बाद बस के अंदर से एक वीडियो जारी हुआ है, जिसने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रही पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा के साथ-साथ हमारे रिपोर्टर रंजय कुमार और अन्य मीडियाकर्मियों को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया.
– पुलिस की इस कार्रवाई के बाद बस के अंदर से जारी एक वीडियो में पत्रकार रंजय कुमार ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच दिखाने की सजा के तौर पर उन्हें सुबह से ही टारगेट किया जा रहा था। रंजय कुमार ने पुलिसिया बर्बरता की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला बताया है…
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बस के भीतर से जारी इस वीडियो में पत्रकार रंजय कुमार ने पुलिस प्रशासन पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा, “हमें सच दिखाने की सजा दी जा रही है। सुबह से ही हमारी टीम को टारगेट किया जा रहा था।” रंजय कुमार ने पुलिसिया बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और प्रेस की आज़ादी पर सीधा और जानबूझकर किया गया हमला बताया है।
ग्राउंड पर पत्रकारों के साथ हो रहा यह सलूक केवल हमारे रिपोर्टर तक सीमित नहीं है। मसलन, स्वतंत्र मीडिया संस्थान ‘मोलिटिक्स’ की महिला पत्रकार को भी पुलिस द्वारा जबरन बस में भरकर ले जाया गया। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों के साथ जब सरेआम ऐसा अमानवीय व्यवहार हो सकता है, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम जनता का क्या हाल होगा? यह स्थिति नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर एक बहुत बड़ा आघात है।
क्या अब सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा हो गया है प्रशासन?
जमीन पर जैसे हालात नजर आ रहे हैं और सर्वोच्च न्यायालय (SC) की स्पष्ट गाइडलाइंस के बावजूद पत्रकारों के साथ जो बदसलूकी हो रही है, वह बेहद चिंताजनक है। यह न सिर्फ अदालती आदेशों की अवहेलना है, बल्कि प्रेस की आजादी का सीधा उल्लंघन भी है।
ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे कई अन्य पत्रकारों के साथ भी ऐसा ही सलूक देखने को मिला है। मसलन, स्वतंत्र मीडिया संस्थान ‘मोलिटिक्स’ की महिला पत्रकार को भी पुलिस द्वारा जबरन बस में भरकर ले जाया गया। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों के साथ जब सरेआम ऐसा अमानवीय व्यवहार हो सकता है, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम जनता का क्या हाल होगा? यह स्थिति नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर एक बहुत बड़ा आघात है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा निर्देश और आदेश
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों और वकीलों को हिरासत में लिए जाने और काम से रोके जाने की शिकायतों पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहाना की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से प्रशासन और पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि पत्रकारों को बिना किसी बाधा के ग्राउंड रिपोर्टिंग और अपना काम करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण और गैर-हथियारबंद लोगों या अपना काम कर रहे पेशेवरों को कानून द्वारा स्थापित वैध प्रक्रिया के बिना हिरासत (detain) में नहीं लिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा नियमों और पिछले आदेशों के उल्लंघन के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करने का आदेश दिया है।
विपक्ष का संसद चलो मार्च
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, INDIA गठबंधन ने इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को ‘दिल्ली लोकतंत्र के लिए मार्च’ (Delhi March for Democracy) का नाम दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी दल सड़कों पर उतरे हैं।
इस आंदोलन के जरिए विपक्ष मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही, विपक्ष ईवीएम (EVM) को हटाकर दोबारा मतपत्र (Paper Ballot) से चुनाव कराने की व्यवस्था लागू करने और हाल ही में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों व युवाओं पर पुलिस की सख्त कार्रवाई का कड़ा विरोध कर रहा है। विपक्ष के इस बड़े आंदोलन का आगाज आज दोपहर 1:30 बजे से होगा।
CJI से मुलाकात पर कानूनी रुख
विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ज्ञापन (Memorandum) सौंपने के लिए शाम 4 से 5 बजे का समय मांगा था। हालांकि, CJI ने प्रशासनिक स्तर पर इस मुलाकात से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि ये मुद्दे (जैसे SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली) पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक विचार के अधीन हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे राजनीतिक मार्च निकालने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका (Petition) दायर करें, जिसके लिए सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे देश के हर नागरिक के लिए हमेशा खुले हैं।
6 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दिल्ली पुलिस की सलाह पर सुरक्षा कारणों से सेंट्रल दिल्ली के 6 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार (Entry/Exit Gates) सुबह 6:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक बंद कर दिए हैं। हालांकि, इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए इंटरचेंज की सुविधा चालू रहेगी।
• राजीव चौक (Rajiv Chowk)
• मंडी हाउस (Mandi House)
• केंद्रीय सचिवालय (Central Secretariat)
• पटेल चौक (Patel Chowk)
• जनपथ (Janpath)
• बाराखंभा रोड (Barakhamba Road)












































