महिला पत्रकार से बदसलूकी मामले पर क्राइम ब्रांच करेगी ACP Vivek Bhagat की जांच, लेकिन क्या बिना FIR के यह संभव है?

Rajni | Nedrick News delhi Published: 05 अक्टूबर 2026, 07:12 PM Updated: 05 अक्टूबर 2026, 07:12 PM
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ACP Vivek Bhagat Case: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान जो हुआ, वह घोर निंदनीय है। आरोप है कि जनता की सुरक्षा का दम भरने वाली दिल्ली पुलिस के ही एक आला अधिकारी, एसीपी विवेक भगत, ने एक महिला पत्रकार के साथ शर्मनाक बदसलूकी की।

कहने को तो पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज में गहरा आक्रोश और कड़वे सवाल उठना लाजमी है। जब न्याय की उम्मीद टूटने लगे और खाकी ही दागदार हो जाए, तो जनता सुरक्षा के लिए आख़िर किसके पास जाए?

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मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत (ACP Vivek Bhagat) पर एक महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न और बदसलूकी करने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने इस शिकायत को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयुक्त (EC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान ग्राउंड कवरेज कर रही एक स्वतंत्र महिला पत्रकार ‘रोज़ी’ ने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत (ACP Vivek Bhagat) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। महिला पत्रकार का कहना है कि जब वह प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का वीडियो बना रही थीं, तब एसीपी ने उनके सीने पर हाथ मारा, उन्हें गलत तरीके से छुआ और धक्का दिया।


दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सिर्फ एक नहीं बल्कि कुल तीन महिला पत्रकारों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद आक्रोशित पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास सहित कई पत्रकार संगठनों ने संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) थाने के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) और CJP ने आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

क्राइम ब्रांच करेगी जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है। क्राइम ब्रांच अब पीड़ित पत्रकारों और संबंधित गवाहों के बयान दर्ज कर घटना से जुड़े वीडियो फुटेज की गहन जांच करेगी। लेकिन इससे यह गंभीर सवाल उठना लाजमी है कि जब पीड़िता द्वारा लगातार एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की जा रही है, तो पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए ही यह मामला क्राइम ब्रांच को कैसे ट्रांसफर कर दिया?

क्या बिना एफआईआर के किसी आपराधिक शिकायत की जांच को इस तरह आगे बढ़ाना कानूनी रूप से संभव है? कानूनन छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसे संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां पुलिस की इस जल्दबाजी ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं।

ACP Vivek Bhagat मामले पर गरमाई सियासत

महिला पत्रकार के साथ हुई इस बदसलूकी के बाद अब दिल्ली की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। इस मामले में विपक्षी दल दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को घेरने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में, आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज खुद संसद मार्ग थाने पहुंचे।

उन्होंने केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए और आरोपी एसीपी विवेक भगत के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इस भारी राजनीतिक दबाव के बीच दिल्ली पुलिस की जांच जारी है, लेकिन आरोपी एसीपी की तरफ से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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