Top 5 Gurudwaras in Ghaziabad: कहते है कि यूपी का सिखों से बेहद गहरा नाता रहा है… य़हां सिख गुरुओ के साथ साथ कई सिख लड़ाको की बहादुरी की कहानी है.. मौजूदा समय में कई ऐसे सिख धार्मिक स्थल है, जो हर सिख के लिए बेहद अहम मानी जाती है। अपने इस लेख में गाजियाबाद में मौजूद 5 सिख गुरुद्वारो के बारे में जानेंगे.. जो यहां रहने वाले सिखों की शान बढ़ा रहे है।
गाजियाबाद के टॉप 5 गुरुद्वारा – Gurudwaras in Ghaziabad
बजरिया गुरुद्वारा – Bajariya Gurudwara
गाजियाबाद के माधोपुरा में स्थित बजरिया गुरुद्वारा, अपने साथ कई सालो का इतिहास समेटे हुए है। इस गुरुद्वारे को श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा भी कहा जाता है। बजरिया गुरुद्वारा गाजियाबाद का एक ऐसा गुरुद्वारा है, जो 24 घंटे सातों दिन खुला रहता है। वहीं यहां अपाहिज और व्हीलचेयर से आने वाले संगतो के लिए विशेष दर्शन की सुविधा है। ये गुरुद्वारा रेलवे स्टेशन के बेहद करीब है, इसलि अक्सर सिख संगते यहां आकर घंटो बिताती है.. यहां आने वालो के लिए गेस्ट रूम बनाया गया है ताकि सफर करने वालों को आराम मिल सके। साथ ही यहा लंगर की सुविधा भी है। ये गुरुद्वारा 1970 के आसपास बनाया गया था, तब ये इलाका यहां का मुख्य बाजार हुआ करता था, इसलिए कारण ही इस गुरुद्वारे को बजरिया गुरुद्वारा कहा गया। जिस इलाके में ये गुरुद्वारा मौजूद है उस इलाके को बजरिया के नाम से जाना जाता है।
गुरुद्वारा भोरा साहिब – Gurudwara Bhora Sahib
गाजियाबाद के पटेल नगर में मशहूर गुरुद्वारा भोरा साहिब नौवे गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब को समर्पित करते हुए बनाया गया है। ये सुबह 4 बजे संगतो के लिए खुलता है और रात को 10 बजे तक खुला रहता है। कहा जाता है कि नौवे गुरु ने गुरु गद्दी पाने से पहले करीब 20 सालो तक बाबा बकाला में घोर तपस्या की थी, जिसमें वो भोर से ही तप शुरु कर देते थे। आठवे गुरु गुरु हर कृष्ण राय जी ने सचखंड जाने के पहले बाबा बकाले में नौवे गुरु के होने के संकेत दिये थे, जिनकी खोज भाई माखन शाह लबाना ने की थी। भोर में अपने तप को शुरु करने वाले गुरु के सम्मान में ही गुरुद्वारा भोरा साहिब का निर्माण हुआ है। ये गुरुद्वारा 1950 से पहले ही बनाया गया था। फिलहाल ये बेहद आबादी वाला इलाका है। लेकिन इस गुरुद्वारे में आने वाले एक अलग शांति का अहसास करते है।
गुरुद्वारा कीर्ति सत्संग – Gurudwara Kirti Satsang
गाजियाबाद के लोहिया नगर में स्थिति गुरुद्वारा कीर्ति सत्संग एक भव्य गुरुद्वारा है। इसे कीर्ति सत्संग सभा के नाम से भी बुलाया जाता है। रोगाजा ये गुरुद्वारा सुबह 4 बजे खुलता है और 10 बजे रात तक खुला रहता है। यहां सुबह शाम दीवान लगाया जाता है जहां प्रार्थना सभायें आयोजित होती है, कीर्तन होते है। वहीं ये एक ऐसा गुरुद्वारा है जहां होने वाले कार्यक्रमो को सीधा प्रसारित किया जाता है। ये गुरुद्वारा लाल पत्थरों से बनाया गया है जिन्हें स्थानीय सिखो ने ही बनवाया था।
गुरुद्वारा गुरुनानक सिमरन सभा – Gurdwara Guru Nanak Simran Sabha
गाजियाबाद शहर के सबसे पुराने गुरुद्वारों में से एक गुरुद्वारा गुरुनानक सिमरन सभा पहले गुरु गुरु नानक देव जी को समर्पित है। ये गाजियाबाद के भारत नगर में स्थित है.. जो कि गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास ही बना हुआ है। इस गुरुद्वारे को स्थानीय लोग भूर भारत नगर गुरुद्वारा भी कहते है। ये गुरुद्वारा सुबह 6 बजे खुलता है औऱ रात 8.30 बजे तक खुला रहता है। रोजाना होने वाला लंगर यहां काफी फेमस है। इस गुरुद्वारे का निर्माण 20सदी के शुरु में यहां आकर बसने वाले सिख संगतो ने करवाया था। ये एक भव्य गुरुद्वारा है, जहां होने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों में बेहद भीड़ लगती है।
गुरुद्वारा बेबे नानक जी – Gurudwara Bebe Nanaki Ji
गाजियाबाद की सीमा के पास दिलशाद गार्डन में स्थित है गुरुद्वारा बेबे नानक जी.. जो कि पहले गुरु गुरु नानक देव जी की बड़ी बहन बेबे नानकी को समर्पित करते हुए बनाया गया था। सिख इतिहास में बेबे नानकी पहली महिला थी जिन्होंने सिख धर्म को अपनाया था। ये गुरुद्वारा भी 1970 के दशक में सिख समुदाय द्वारा बनाया गया था। रोजाना सुबह 4 बजे ये गुरुद्वारा खुलता है और रात को 9.30 बजे तक खुला रहता है। गुरुद्वारा बेबे नानक याद दिलाता है कि सिख धर्म में महिला हो या पुरुष, जिसने आध्यात्मिकता को पा लिया.. वो महान हो गया, वो पूजनीय हो गया। यहां आने वाले लोगो के लिए विशेष लंगर की सुविधा है,, रोजाना होने वाली प्रार्थना से पूरे इलाका भक्तिमय हो जाता है।














































