आंदोलन को Ajinkya Shinde करेंगे लीड, बिना परमिशन प्रदर्शन तब सत्याग्रह था तो आज गलत क्यों? पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल!

Rajni | Nedrick News Delhi Published: 10 अक्टूबर 2026, 09:50 PM Updated: 10 अक्टूबर 2026, 09:56 PM
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Ajinkya Shinde Jantar Mantar Protest 2.O: जनता सड़कों पर है और मामला बेहद गंभीर हो चुका है। वोट चोरी और मतदान फॉर्म में कथित बदलावों को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। इस विवाद के केंद्र में आए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से लगातार इस्तीफे की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर मौन साधे हुए है।

आज यानी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस आक्रोश का बड़ा प्रदर्शन होना तय था, जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने एक दिन पहले से ही लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। हालांकि, ‘साजेपी’ (CJP) के संस्थापक को शायद इस कार्रवाई का अंदेशा पहले से था, इसलिए उन्होंने अपनी हिरासत से ठीक पहले एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपना रिकॉर्डेड बयान जारी कर दिया। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है कि आखिर क्या है बयान

और पढ़ें: जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके, छावनी बनी दिल्ली | Jantar Mantar Protest

Ajinkya Shinde करेंगे लीड

इसलिए उन्होंने अपनी हिरासत से ठीक पहले एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपना रिकॉर्डेड बयान जारी कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर यह वीडियो शेयर करते हुए बताया कि अब इस आंदोलन को अजिंक्य शिंदे लीड करेंगे। वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा, ‘अगर आप यह वीडियो देख रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मुझे, सौरभ और आशुतोष को हिरासत में ले लिया गया है।’ इसके आगे उन्होंने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने की अपील की।

सत्ताधारियों पर गंभीर सवाल

इस समय सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो सत्ताधारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इतिहास का हवाला देते हुए याद दिला रहे हैं कि एक समय ऐसा भी था जब खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को रैली करने की अनुमति नहीं मिली थी, तब उसके नेता और कार्यकर्ता भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए थे। ऐसे में आज विपक्ष या जनता के प्रदर्शनों को रोकना कितना जायज है, इस पर बहस छिड़ गई है।”

ऐसे में आज विपक्ष या जनता के प्रदर्शनों को रोकना कितना जायज है, इस पर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि जब तब बिना अनुमति के प्रदर्शन करने को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया गया था, तो आज उसी तरह का जन-आंदोलन गलत कैसे हो गया? जनता के मन में यह सवाल उठना अब लाजमी है।

पत्रकारों का भी किया डिटेन

हैरानी की बात यह है कि प्रशासन का यह सख्त रवैया सिर्फ आंदोलनकारियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग कर रहे कई पत्रकारों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वतंत्र समाचार पोर्टल्स ‘स्क्रॉल.इन’ के वरिष्ठ संवाददाता आयुष तिवारी और ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के तीन पत्रकारों अश्विनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची और अनमोल प्रीतम को पुलिस बसों और वैन में भरकर ले गई।

साथ ही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और KK Create चैनल की संस्थापक काव्या कर्नाटक को दिल्ली पुलिस ने हिरासत (detain) में लिया है।


इसके अलावा ‘द वायर’ की महिला पत्रकारों को भी जंतर-मंतर के पास रोकने की कोशिश की गई। उनके संपादकों का कहना है कि बकायदा प्रेस कार्ड दिखाने और खुद को पत्रकार बताने के बावजूद पुलिस ने उनके साथ यह मनमाना रुख अपनाया, जिसके बाद मीडिया जगत में भी भारी रोष देखा जा रहा है। हालांकि कई पत्रकारों को बाद में छोड़ दिया गया।

ऐसे में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया की आवाज को दबाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को छीनने की यह कवायद सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर ऐसे गंभीर सवाल छोड़ती है, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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