PM Modi Pezeshkian Meeting: एक तरफ अमेरिका लगातार ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध थोप रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को खुलेआम अंजाम भुगतने की चेतावनियां दी जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत ने बिना किसी दबाव में आए साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी महाशक्ति के इशारों पर नहीं, बल्कि अपने ‘राष्ट्रीय हित’ (National Interest) पर तय होती है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से द्विपक्षीय मुलाकात की और दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने का खुला ऐलान किया।
‘दोस्ती भी निभाएंगे और ट्रेड भी बढ़ाएंगे’: PM मोदी का खुला संदेश| PM Modi Pezeshkian Meeting
मुलाकात के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ उनकी बेहद सार्थक बातचीत हुई। पीएम मोदी ने कहा, “हमने अलग-अलग क्षेत्रों में भारत और ईरान की सदियों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने जा रहे हैं। साथ ही पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा हुई और भारत इलाके में स्थायी शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।”
Met President Masoud Pezeshkian in Bishkek. Reiterated our commitment to strengthening India’s long standing friendship with Iran across diverse sectors. We want to expand and diversify our trade basket in the times to come.
We had a discussion on the prevailing situation in… pic.twitter.com/qagQy5o108
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
प्रधानमंत्री का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बेहद अहम माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि नई दिल्ली किसी भी विदेशी ताकत के दबाव में आकर अपने ऐतिहासिक साझेदारों से मुंह नहीं मोड़ेगी।
अमेरिका से दोस्ती अपनी जगह, नेशनल इंटरेस्ट अपनी जगह
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह कदम अमेरिका का विरोध नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखने की कवायद है। आज भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक साझेदारी का रिश्ता बेहद मजबूत है। लेकिन भारत ने दुनिया को यह साफ संदेश दिया है कि वह किसी ‘जीरो-सम गेम’ का हिस्सा नहीं बनेगा। भारत के लिए अमेरिका जितना अहम है, उतना ही जरूरी ईरान, रूस और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संतुलन बनाए रखना भी है।
His Excellency Masoud Pezeshkian, President of the Islamic Republic of Iran, in a meeting with Shri Narendra Modi, Prime Minister of India, on the sidelines of the Summit of Heads of State of the Shanghai Cooperation Organisation (SCO) and the Shanghai Plus meeting in Kyrgyzstan,…
— Iran in India (@Iran_in_India) August 31, 2026
भारत के लिए ईरान की रणनीतिक अहमियत
ईरान के साथ भारत का रिश्ता केवल तेल या सामान्य आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है:
- चाबहार बंदरगाह और कनेक्टिविटी: ईरान स्थित चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के विशाल बाजारों तक पहुंचने का सीधा समुद्री व जमीनी रास्ता देता है।
- ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता: पश्चिम एशिया में शांति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान भारत का एक प्रमुख पार्टनर है। ऐसे में ईरान से दूरी बनाना भारत के अपने भू-राजनीतिक हितों के खिलाफ होगा।
ईरान ने की भारत की शांति पहल की तारीफ
मुलाकात के बाद ईरान की तरफ से जारी बयान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संकट के समय भारत के रचनात्मक रुख और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहता और सभी मसलों का हल कूटनीति व बातचीत से ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने भारत के वैश्विक कद का जिक्र करते हुए अपील की कि नई दिल्ली अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर इलाके में तनाव घटाने और शांति बहाल करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाए। इसके साथ ही ईरान ने भारत के साथ व्यापारिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और विस्तार देने की इच्छा जताई।














































