जब चिमटा गाड़ते ही थम गई थी ट्रेन… जानिए कैसे पड़ा नीम करोली बाबा नाम और क्या है उनके रहस्यमयी कंबल का राज? Neem Karoli Baba Unknown facts

Nandani | Nedrick News Uttar Pradesh Published: 01 सितम्बर 2026, 10:12 PM Updated: 01 सितम्बर 2026, 10:12 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Neem Karoli Baba Unknown facts: देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित कैंची धाम आज पूरी दुनिया में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। सादे कंबल में लिपटे रहने वाले बाबा नीम करोली को उनके भक्त साक्षात संकटमोचन हनुमान जी का अवतार मानते हैं। एक बेहद सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी बाबा नीम करोली के चमत्कारों की कहानियां देश ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार तक फैली हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स जैसी हस्तियां बाबा के दर पर शीश नवाकर अपने जीवन की दिशा बदल चुकी हैं।

और पढ़ें: 60+ उम्र वालों को सरकार कराएगी फ्री तीर्थ यात्रा, टिकट से लेकर खाने-ठहरने तक का खर्च उठाएगी| Mukhyamantri tirth yatra yojana

  1. वास्तविक नाम और प्रारंभिक जीवन| Neem Karoli Baba Unknown facts

बाबा का असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा के घर हुआ था। महज 11 साल की उम्र में उनका विवाह हुआ और 17 वर्ष की छोटी उम्र में ही उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।

  1. घर-परिवार का त्याग और साधना

1958 में उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग कर संन्यास ले लिया और उत्तर भारत में भ्रमण करने लगे। इस दौरान उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा के नाम से जाना गया। जब उन्होंने गुजरात के मोरबी (ववानिया) में तपस्या की, तो वहां लोग उन्हें ‘तलईया बाबा’ कहने लगे।

  1. कैसे पड़ा ‘नीम करोली’ नाम? (ट्रेन का वो अद्भुत किस्सा)

एक बार बाबा ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। चेकिंग के दौरान टीटी ने उन्हें ‘नीब करोली’ स्टेशन पर नीचे उतार दिया। बाबा बिना कुछ कहे थोड़ी दूर जाकर अपना चिमटा जमीन में गाड़कर बैठ गए। इसके बाद गार्ड ने हरी झंडी दिखाई, लेकिन ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। जब तमाम कोशिशें बेकार हो गईं, तब एक स्थानीय मजिस्ट्रेट के कहने पर रेलवे अधिकारियों ने बाबा से माफी मांगी और उन्हें सम्मानपूर्वक वापस बिठाया। बाबा के पैर रखते ही ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना के बाद से उनका नाम ‘नीम करोली बाबा’ प्रसिद्ध हो गया।

  1. 1964 में कैंची धाम की नींव

उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम में बाबा पहली बार 1961 में पहुंचे थे। उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ विचार विमर्श कर 1964 में इस पावन धाम की स्थापना की। हर साल 15 जून को यहां विशाल भंडारा और मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

  1. बुलेटप्रूफ कंबल का रहस्य

बाबा के अनन्य अमेरिकी शिष्य रिचर्ड अल्पर्ट (रामदास) ने ‘मिरेकल ऑफ लव’ किताब में बाबा के चमत्कारों का जिक्र किया है। बाबा हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़ते थे, जिसे उनके भक्त ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ मानते थे। आज भी भक्त मंदिर में उन्हें कंबल ही भेंट चढ़ाते हैं।

  1. बाबा का परिवार

बाबा के दो बेटे और एक बेटी थे। उनके बड़े बेटे अनेक सिंह अपने परिवार के साथ भोपाल में रहते हैं, जबकि छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा वन विभाग में रेंजर के पद पर कार्यरत थे, जिनका हाल ही में निधन हुआ है।

कैंची धाम नहीं, वृंदावन में है समाधि: जानिए आखिरी सफर का सच

अक्सर लोगों को भ्रम रहता है कि बाबा की समाधि कैंची धाम में है, जबकि असल में उनकी महासमाधि वृंदावन आश्रम में स्थित है। मिली जानकारी के मुताबिक, सितंबर 1973 में सीने में दर्द की शिकायत के बाद बाबा आगरा में हार्ट स्पेशलिस्ट को दिखाकर रात की ट्रेन से कैंची लौट रहे थे। रास्ते में अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद साथी उन्हें मथुरा स्टेशन पर उतारकर सीधे वृंदावन ले गए। अस्पताल में अंतिम सांस लेते हुए बाबा ने लगातार ‘जय जगदीश हरे’ का जाप किया और 11 सितंबर 1973 को अपने नश्वर शरीर का त्याग कर दिया।

वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर स्थित आश्रम में उनका समाधि मंदिर मौजूद है, जहां उनकी निजी वस्तुएं रखी हैं और हर साल सितंबर में ‘महासमाधि भंडारा’ आयोजित किया जाता है।

और पढ़ें: फ्रिज को स्टाइलिश बनाना पड़ सकता है भारी! ये मैग्नेट्स घर में ला सकते हैं नेगेटिव एनर्जी| Fridge Vastu

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds