SCO Summit 2026: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शुरू हो गया है। संगठन की स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सदस्य देशों के शीर्ष नेता जुट रहे हैं। पीएम मोदी रविवार को बिश्केक पहुंचे, जहां हवाई अड्डे पर कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स के चेयरमैन कासिमालिएव आदिलबेक अलेशोविच ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनके स्वागत में किर्गिज पारंपरिक नृत्य भी पेश किया गया।
पीएम मोदी का विजन और द्विपक्षीय मुलाकातें| SCO Summit 2026
किर्गिस्तान रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि वह एससीओ क्षेत्र के लिए भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उनका यह दृष्टिकोण मुख्य रूप से तीन स्तंभों ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ पर टिका है। पीएम ने जोर देकर कहा कि भारत सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्र के निर्माण पर काम करेगा जो ‘आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ’ की बुराइयों से पूरी तरह मुक्त हो।
समिट के दौरान पीएम मोदी की किर्गिज राष्ट्रपति सादिर झापारोव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रधानमंत्री छठे ‘वर्ल्ड नोमैड गेम्स’ के भव्य उद्घाटन समारोह में भी शिरकत करेंगे।
शी जिनपिंग बोले- ‘भविष्य की रूपरेखा तय करने को उत्सुक’
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी रविवार को सम्मेलन में हिस्सा लेने बिश्केक पहुंच चुके हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक, वहां पहुंचने पर शी जिनपिंग ने कहा कि वह एससीओ के 25 वर्षों के विकास के अनुभवों की समीक्षा करने, सहयोग की नई योजनाओं पर बात करने और संगठन के भविष्य की रूपरेखा तय करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
25 साल का सफर और बिश्केक बैठक की रूपरेखा
साल 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा शुरू किए गए एससीओ में अब 10 सदस्य हो चुके हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में, ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में इसके पूर्ण सदस्य बने थे।
- थीम: इस बार समिट का विषय ‘SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’ रखा गया है।
- वेन्यू: मुख्य बैठकें बिश्केक के बाहर अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में 30 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित की जा रही हैं। काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट का पूर्ण सत्र 1 सितंबर को होगा, जिसमें ‘बिश्केक घोषणापत्र’ को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत
भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन मध्य एशिया से सीधे तौर पर ऊर्जा, व्यापार और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए जुड़ने का बड़ा जरिया है। सम्मेलन के एजेंडे में यूरेशियन लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, प्रस्तावित एससीओ डेवलपमेंट बैंक और व्यापार समझौतों पर चर्चा शामिल है। इसके अलावा रूस के साथ द्विपक्षीय स्तर पर रक्षा, ऊर्जा और लोकल करेंसी पेमेंट सिस्टम को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ सकती है।
समिट के समापन पर किर्गिस्तान एससीओ की रोटेटिंग अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपेगा, जो 2027 तक संगठन की अगुवाई करेगा और अगले लीडर्स समिट की मेजबानी करेगा।












































