Top 5 Diljit Dosanjh Movies: इस वक्त पूरे बॉलीवुड से लेकर पॉलीवुड तक सबसे कंट्रोवर्सियल एक्टर कोई है तो वो है फेमस पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ। पिछले कुछ सालो से ऐसा लगता है कि जैसे विवाद ने उनके दामन को इस तरह पकड़ लिया है जैसे वो उनका ही हिस्सा हो.. उनकी फिल्में आये और विवाद न हो.. ऐसा होता ही नहीं है.. यहां तक कि उनकी पिछली फिल्म सतलुज को दो ओटीटी फ्लेटफोर्म जी 5 से दो दिनों के अंदर ही हटा ली गई तो वहीं सरदार जी 3 को तो भारत में रीलिज ही होने नहीं दिया गया था.. लेकिन इन तमाम मुसीबतो के बाद भी दिलजीत अपना काम बेहद ईमानदारी से कर रहे है।उनकी फिल्में, और फिल्मो का चुनाव इतनी गहीन और संजीदा है कि फैंस खुद ही उनकी तरफ अट्रेक्ट हो जाते है। अपने इस वीडियो में हम दिलजीत दोसांझ की 5 ऐसी फिल्मों के बारे में बात करेंगे, जो पंजाब की रियल इंसीडेट पर बेस्ड है, और ये बेहद विवादों में रही।
सतलुज – Sutlej
1, पहले नंबर है जुलाई में करीब तीन सालो के इंतजार के बाद, और दो नामों को बदलने के बाद रीलिज हुई फिल्म सतलुज है। हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित फिल्म सतलुज सोशल एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के उस खोज पर बेस्ड है जब वो पंजाब में बढ़ते उग्रवाद के बीच पंजाब पुलिस की उस बर्बरता का पर्दाफाश करते है, जिसमें पुलिसों ने हजारों निर्दोष जवानों को बिना किसी वारंट औऱ जानकारी के उठाया था, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उनका कभी कुछ पता नही चला था.. ऐसा ही जसवंत सिंह खालरा के एक दोस्त के साथ होता है, तब उनकी तलाश शुरु होती है.. और वो करीब 25 हजार ऐसे गुमनाम अंतिम संस्कार का सच खोजते है, जिसे पंजाब पुलिस ने दबा दिया था। इस फिल्म में दिलजीत जसवंत सिंह खालरा के रोल में है। इस केस का पर्दाफाश करने के दौरान उनकी हत्या कर उन्हें सतलुज नदी में फेंक दिया गया था.. इस फिल्म का ऑरिजिनल नाम 95 था, लेकिन विवाद के कारण इसका नाम बदल कर सतलुत रखा गया। ये फिल्म इतनी कंट्रोवर्सी थी कि रीलिज के 48 घंटो के बाद ही हटा ली गई थी, और अब भी मामला कोर्ट में है।
जोगी – Jogi
2, जोगी … साल 2022 में दिलजीत की फिल्म जोगी रीलिज हुई.. ये फिल्म बेस्ड थी 31 अक्टूबर 1984 के दिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखो के खिलाफ जो सोची समझी और सिस्मेटिक तरीके से दंगे भड़काया गया.. उस पर बैस्ड है। दिलजीत दोसांझ ने इस फिल्म को लेकर कहा था कि 84 में जो हुआ वो दंगा नहीं बल्कि नरसंहार था। इस फिल्म ने आईना दिखाया था कैसे प्रशासनिक और राजनीति के चंद रखवालों ने मिलकर केवल सिखों को टारगेट करते हुए हमला करवाया। पहचान के लिए वोटर्स की लिस्ट तक दी गई। ये फिल्म कोई काल्पनिक कथा नहीं है.. बल्कि जांच में ये साबित हुआ है कि उनकी मिली भगत के कारण ही ये नरसंहार इतना भयावाह हो गया था।
सज्जन सिंह रंगरूट- Sajjan Singh Rangroot
3, सज्जन सिंह रंगरूट- 1914 में पहले वर्ल्डवॉर में सिख रेजीमेंट के सैनिकों के असली अनुभव और ब्रिटिश सेना में नस्लवाद को झेलते हुए भी बड़ी बहादुरी से अपनी फर्ज निभाते है औऱ यूरोप के पश्चिमी मोर्चे पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाते है। दिलजीत ने इस फिल्म में नए भर्ती फोजी सज्जन सिंह रंगरूट का रोल प्ले किया है। ये फिल्म 2018 में रीलिज हुई थी। इस फिल्म ने दिखाया कि कैसे तमाम मुश्किलों के बाद भी सिख सैनिकों की वफादारी और निष्ठा में कोई कमी नहीं आई थी।
उड़ता पंजाब – Udta Punjab
4, उड़ता पंजाब- आलिया भट्ट की बेहतरीन फिल्मों में से एक उड़ता पंजाब दिलजीत दोसांझ के बॉलीवुड करियर में बेहद कारगार साबित हुई थी। ये फिल्म पंजाब की उस दुर्दशा को दर्शाता है जिसमें पंजाब के युवा नशा और अपराध के चपेट में घिरते जा रहे है.. उनकें लिए उपाय करने के बजाय कैसे भ्रष्टाचार और राजनैतिक छूट के कारण युवाओं का जीवन बद से बदतर होता जा रहा है.. जिसके लिए उच्च अधिकारी से लेकर नेता तक जिम्मेदार है। शुरुआत में इस फिल्म में 89 कट लगाने की मांग की गई थी क्योंकि सेंसर बोर्ड का मानना था कि ये फिल्म पंजाब को बदलान करती है लेकिन निर्माताओं ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मात्र 1 कट के साथ फिल्म रीलिज हुई.. जिसने बेहतरीन बिजनस भी किया था।
पंजाब 1984 – Punjab 1984
5,पंजाब 1984- जाहिर है साल 1984 को शायद कभी कोई सिख भूल नहीं सकता है.. जब इंदिरा गांधी की हत्या का बदला लेने के लिए सिखों को गाजर मूली की तरह काटा गया,.. उन्हें जिंदा जलाया गया। ये फिल्म साल 2014 में आई थी.. जो कि एक ऐसी मां की कहानी है, जो दंगे से पीड़ित है, और अपने लापता बेटे को खोजने के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही है.. इस फिल्म में दंगो के दौरान राज्य तंत्र, पुलिस का व्यवहार.. और उस पर हो रही राजनीति को दिखाया गया है.. जो रीलिज से पहले ही विवादों में छा गई थी। इन फिल्मों में दिलजीत की एक्टिंग ने बताया कि वो एक लंबी रेस का घोड़ा है.. और हर रोल में फिट कैसे बैठा जाता है ये दिलजीत से पूछना चाहिए।














































