Vietnam US trade: करीब पांच दशक पहले जब साइगॉन के पतन के साथ वियतनाम युद्ध का अंत हुआ था, तब शायद ही किसी अर्थशास्त्री ने यह सोचा होगा कि कभी बमबारी से तबाह हुआ यह मुल्क उसी अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन जाएगा। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में ही वियतनाम ने अमेरिका के साथ रिकॉर्ड 114 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) दर्ज किया है। इस उछाल के साथ वियतनाम ने चीन, मेक्सिको और ताइवान जैसे दिग्गज निर्यातकों को पीछे छोड़ दिया है।
साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो वियतनाम, चीन (202 बिलियन डॉलर) और मेक्सिको (197 बिलियन डॉलर) के बाद तीसरे नंबर पर था। लेकिन 2026 में वियतनाम अमेरिका को सामान निर्यात करने वाला सबसे प्रमुख देश बनने की होड़ में सबसे आगे निकल चुका है।
चीन की नाक के नीचे से छीना अमेरिकी बाजार| Vietnam US trade
भौगोलिक रूप से वियतनाम चीन के ठीक नीचे स्थित एक छोटा देश है। आकार में यह भारत, रूस या चीन की तुलना में काफी छोटा है, लेकिन निर्यात के मोर्चे पर इसने सबको चौंका दिया है।
- आयात में बड़ा अंतर: अमेरिका में वियतनामी आयात में 40 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चीन से अमेरिका का आयात 168 अरब डॉलर से घटकर 129 अरब डॉलर पर आ गया है।
- टैरिफ का फायदा: जून 2026 में अमेरिका की प्रभावी टैरिफ दर चीन के लिए जहां 2 फीसदी है, वहीं वियतनाम के लिए यह महज 6.5 फीसदी है। इसी कम टैरिफ का सीधा फायदा उठाकर वियतनाम ने बढ़त बना ली।
- एक्सपोर्ट बास्केट: वियतनाम के कुल निर्यात का करीब 60 फीसदी हिस्सा केवल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज से आता है।
‘चाइना प्लस वन’ और ग्लोबल कंपनियों का नया ठिकाना
चीन में बढ़ती मजदूरी और अमेरिका-चीन तनाव के चलते जब मल्टीनेशनल कंपनियों ने ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति अपनाई, तो वियतनाम उनकी पहली पसंद बना। सैमसंग, एप्पल, इंटेल, फॉक्सकॉन, नाइके और लुलुलेमन जैसी कंपनियों ने वियतनाम को अपना मुख्य प्रोडक्शन हब बना लिया। फ्लोरिडा की मशहूर कंपनी ‘TOV Furniture’ इसका बड़ा उदाहरण है। साल 2024 में यह कंपनी 60 फीसदी सामान चीन से और 25 फीसदी वियतनाम से मंगाती थी। लेकिन भारी टैरिफ से बचने के लिए कंपनी ने यह समीकरण पूरी तरह पलट दिया… आज कंपनी 60 फीसदी सामान वियतनाम से और सिर्फ 25 फीसदी चीन से खरीद रही है।
डोई मोई से वैश्विक हब बनने तक का सफर
10 करोड़ की आबादी और 500 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले वियतनाम ने 20 ट्रिलियन डॉलर वाली चीनी अर्थव्यवस्था के साए से निकलकर यह मुकाम हासिल किया है:
- ‘डोई मोई’ सुधार: 1980 के दशक में वियतनाम ने सोवियत शैली की केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था को छोड़कर दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोले।
- प्रतिबंधों का अंत: अमेरिका ने 1994 में वियतनाम पर लगा व्यापारिक प्रतिबंध हटाया और 1995 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध बहाल हुए।
- कारोबार में उछाल: 2001 के द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों का कारोबार 1995 के मामूली 451 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2023 तक 124 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। विश्व बैंक के अनुसार, वियतनाम का ट्रेड-टू-जीडीपी अनुपात करीब 170 फीसदी है, जो इसे दुनिया की सबसे ट्रेड-ओरिएंटेड अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करता है।
भारत कहां रह गया पीछे?
वियतनाम की तुलना में 14 गुना बड़ी आबादी होने के बावजूद अमेरिका के साथ वस्तुओं के व्यापार में भारत का सरप्लस महज 58.4 अरब डॉलर रहा, जो वियतनाम के सिर्फ 6 महीने के आंकड़े से भी आधा है।
दोनों देशों के बीच मुख्य अंतर:
- श्रम बल भागीदारी (LFPR): विश्व बैंक के अनुसार, भारत में श्रम बल भागीदारी 4% है, जबकि वियतनाम में यह 73% है।
- खेती से इंडस्ट्री की ओर शिफ्ट: वियतनाम ने कृषि पर अपनी निर्भरता 2000 के 65% से घटाकर 2025 तक 25% पर ला दी, जबकि भारत की करीब 45% आबादी आज भी खेती पर निर्भर है।
- ग्लोबल सप्लाई चेन: भारत ने फोन असेंबली में तरक्की की है, लेकिन वियतनाम की तरह डीप ग्लोबल वैल्यू चेन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में जगह बनाने में अभी भी पीछे है।












































