धमकियों की परवाह किसे? अमेरिका को दरकिनार कर ईरान से मिलाया हाथ, मोदी-पेजेश्कियन मुलाकात के 3 बड़े मायने| PM Modi Pezeshkian Meeting

Nandani | Nedrick News Iran Published: 01 सितम्बर 2026, 10:03 PM Updated: 01 सितम्बर 2026, 10:03 PM
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PM Modi Pezeshkian Meeting: एक तरफ अमेरिका लगातार ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध थोप रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को खुलेआम अंजाम भुगतने की चेतावनियां दी जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत ने बिना किसी दबाव में आए साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी महाशक्ति के इशारों पर नहीं, बल्कि अपने ‘राष्ट्रीय हित’ (National Interest) पर तय होती है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से द्विपक्षीय मुलाकात की और दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने का खुला ऐलान किया।

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‘दोस्ती भी निभाएंगे और ट्रेड भी बढ़ाएंगे’: PM मोदी का खुला संदेश| PM Modi Pezeshkian Meeting

मुलाकात के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ उनकी बेहद सार्थक बातचीत हुई। पीएम मोदी ने कहा, “हमने अलग-अलग क्षेत्रों में भारत और ईरान की सदियों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने जा रहे हैं। साथ ही पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा हुई और भारत इलाके में स्थायी शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।”

प्रधानमंत्री का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बेहद अहम माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि नई दिल्ली किसी भी विदेशी ताकत के दबाव में आकर अपने ऐतिहासिक साझेदारों से मुंह नहीं मोड़ेगी।

अमेरिका से दोस्ती अपनी जगह, नेशनल इंटरेस्ट अपनी जगह

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत का यह कदम अमेरिका का विरोध नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बनाए रखने की कवायद है। आज भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक साझेदारी का रिश्ता बेहद मजबूत है। लेकिन भारत ने दुनिया को यह साफ संदेश दिया है कि वह किसी ‘जीरो-सम गेम’ का हिस्सा नहीं बनेगा। भारत के लिए अमेरिका जितना अहम है, उतना ही जरूरी ईरान, रूस और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संतुलन बनाए रखना भी है।

भारत के लिए ईरान की रणनीतिक अहमियत

ईरान के साथ भारत का रिश्ता केवल तेल या सामान्य आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है:

  • चाबहार बंदरगाह और कनेक्टिविटी: ईरान स्थित चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के विशाल बाजारों तक पहुंचने का सीधा समुद्री व जमीनी रास्ता देता है।
  • ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता: पश्चिम एशिया में शांति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान भारत का एक प्रमुख पार्टनर है। ऐसे में ईरान से दूरी बनाना भारत के अपने भू-राजनीतिक हितों के खिलाफ होगा।

ईरान ने की भारत की शांति पहल की तारीफ

मुलाकात के बाद ईरान की तरफ से जारी बयान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संकट के समय भारत के रचनात्मक रुख और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहता और सभी मसलों का हल कूटनीति व बातचीत से ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने भारत के वैश्विक कद का जिक्र करते हुए अपील की कि नई दिल्ली अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर इलाके में तनाव घटाने और शांति बहाल करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाए। इसके साथ ही ईरान ने भारत के साथ व्यापारिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और विस्तार देने की इच्छा जताई।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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