Uddhav Thackeray News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं तेज हैं कि उद्धव गुट के कई सांसद पार्टी से दूरी बना सकते हैं। अगर ये अटकलें सच साबित होती हैं तो यह पिछले कुछ वर्षों में उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अलग राह पकड़ने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि ये सांसद पहले एक अलग संसदीय समूह बना सकते हैं और बाद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला कर सकते हैं।
दिल्ली दौरे ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी| Uddhav Thackeray News
इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब कुछ सांसदों के दिल्ली पहुंचने की खबर सामने आई। जानकारी के मुताबिक परभणी से सांसद संजय उर्फ बंधु जाधव और यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख चार्टर्ड विमान से दिल्ली रवाना हुए। इससे पहले भी कुछ नेताओं की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज थीं।
इसी बीच संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अनिल देसाई तथा संजय राउत भी दिल्ली पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि वे नाराज सांसदों से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थापना दिवस से पहले बढ़ी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कोई बड़ा घटनाक्रम होता है तो उसका समय भी बेहद अहम हो सकता है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले ऐसी खबरों का सामने आना उद्धव गुट के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
19 जून को पार्टी अपना स्थापना दिवस मनाने जा रही है। ऐसे में यदि सांसदों का कोई बड़ा फैसला सामने आता है तो उसका सीधा असर पार्टी के मनोबल और राजनीतिक संदेश पर पड़ सकता है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा फिर तेज
महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से “ऑपरेशन टाइगर” नाम की चर्चा लगातार हो रही है। दावा किया जा रहा था कि इसके तहत कुछ सांसद और नेता एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सार्वजनिक रूप से ऐसे दावों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव समाप्त हो चुके हैं और अब किसी भी प्रकार के नंबर गेम की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
मातोश्री की बैठक में नहीं पहुंचे कई सांसद
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा रहा है कि हाल ही में उद्धव ठाकरे ने अपने सभी सांसदों को मातोश्री में बैठक के लिए बुलाया था। लेकिन बैठक में केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे।
इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटिल शामिल थे। वहीं सांसद ओमराजे निंबालकर बैठक में नहीं पहुंचे। जबकि कुछ अन्य सांसदों के ऑनलाइन जुड़ने की जानकारी सामने आई।
बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने भी एक भावुक और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिसे जाना है वह जा सकता है, लेकिन समय आने पर सच्चाई सबके सामने होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और शिवसेना छोड़कर जाएंगे, वे भविष्य में पछता सकते हैं।
2022 जैसी स्थिति बनने की आशंका
यदि मौजूदा अटकलें सही साबित होती हैं तो यह चार वर्षों के भीतर उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक संकट होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने बगावत करते हुए बड़ी संख्या में विधायकों को अपने साथ कर लिया था।
उस समय करीब 40 विधायक उद्धव गुट से अलग हो गए थे और बाद में यह संख्या और बढ़ी। संख्या बल के आधार पर चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह “धनुष-बाण” शिंदे गुट को आवंटित कर दिया था।
अब एक बार फिर संभावित बगावत की खबरों ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि अंतिम तस्वीर क्या होगी, यह आने वाले दिनों में सांसदों के रुख और दोनों गुटों की रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर बनी हुई है।
और पढ़ें: पैसा कहां से आता है टैक्स कितना देते हैं? RSS से सरकार ने मांगा हिसाब-किताब! Mohan Bhagwat News



























