गुरुओं की पावन धरती पर अंधविश्वास का साया, पंजाब में कैसे फैला झाड़-फूंक का खतरनाक खेल? The Exorcism of Punjab

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 19 अगस्त 2026, 05:13 PM Updated: 19 अगस्त 2026, 05:13 PM
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The Exorcism of Punjab: हम सभी जानते है.. सिख धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें न केवल जातिवाद बल्कि अंधविश्वास के लिए भी कोई जगह नहीं है। वो गुरु साहिब और पवित्र ग्रंथ में बताई बातों पर ही चलते है.. लेकिन बावजूद इसके पंजाब के सिख पंजाब को अंध विश्वास और जादू टोने के नाम पर होने वाली क्रूर घटनाओं से नहीं बचा सकें। अगस्त 2024 को एक खबर पंजाब के गुरदासपुर से आई थी। गुरदासपुर के के धारीवाल क्षेत्र के सिंहपुरा गांव में मिर्गी के दौरे से पीड़ित 30 साल के सैमुअल मसीह की एक पादरी समेत 8 लोगो ने उसके शरीर से शैतान भगाने के नाम पर पीट पीट  कर हत्या कर दी थी। इस घटना ने पंजाब में तेजी से फैल रहे अंधविश्वास की पोलपट्टी खोल कर रख दी। हैरानी की बात है कि जिस धरती पर जन्में गुरु साहिबानों ने जातपात भेदभाव और अंधविश्वास को खत्म करने में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उसी धरती पर जादू टोना और अंधविश्वास का खेल जारी है। अपने इस लेख में हम बात करेंगे कैसे पंजाब भी अंधविश्वास के जाल में फंस रहा है।

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क्या पंजाब भूल रहा है गुरुओं की सीख?

पंजाब एक ऐसा राज्य है जो भले ही सिख आबादी के लिए जाना जाता है लेकिन सच तो ये है कि पंजाब में सिख आबादी के ज्यादा होने के बाद भी बढ़ते धर्म परिवर्तन के खेल को रोकने में पूरी तरह से सरकार और प्रशासन नाकाम साबित हो रही है। एक तरफ करीब 58 प्रतिशत सिख है तो वहीं 38 प्रतिशत हिंदू है, 1.93 प्रतिशत मुसलमान और 1.26 प्रतिशत ईसाई भी है। वहीं रिकॉर्ड की माने तो करीब 63.2 प्रतिशत आबादी एससी और ओबीसी वर्ग से है। यानि की जातिय भेदभाव की आशंका भी उतनी ही ज्यादा है। ऐसे में धर्म परिवर्तन करने वाले संस्थानो की सक्रियता ने पंजाब को वाकई में मुसीबत में डाला है। इतना ही नहीं इस धर्म परिवर्तन के खेल के कारण ही अंधविश्वास, जादू टोने घटनाओं में इजाफा हुआ है।

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रविदासिया हिंदू ने ईसाई धर्म की बढ़े

एक आकड़े बताते है कि पंजाब में पिछले कुछ सालो में मजहबी सिख और रविदासिया हिंदू ने ईसाई धर्म की तरफ झुकाव रखना शुरु कर दिया है.. आपको जानकार हैरानी होगी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के काऱण ये लोग पेपर पर अपना धर्म नहीं बदलते लेकिन उनकी आस्था, उनकी मान्यतायें सबकुछ बदल रही है। वो गुरुद्वारों और मंदिरो के बजाय चर्च जाते है.. और ईसाई धर्म के अनुसार ही परंपराओ का पालन करते है। इसे faith without conversion कहा जाता है। इसमें ज्यादातर पेंटेकोस्टल ईसाई संप्रदाय की सक्रियता बढ़ी है।

बीते कुछ सालों में .ये भी देखा गया है कि लोग अस्पतलों के इलाज पर भरोसा करने के बजाये चंगाई सभाओं और अंधविश्वास पर ज्यादा आश्रित होने लगे है। पादरी बड़ी बड़ी चंगाई सभायें आयोजित करके लोगो को धोखा देते है.,. उनसे बड़ी बड़ी गंभीर बीमारी को ठीक करने,भूत प्रेत बाधा को दूर करने, नशा छुड़वाने, नौकरी व्यापार बढ़ाने जैसे प्रलोभन देते है.. वहीं वो आर्थिक और शैक्षणिक रूप से मदद का लालच देकर ग्रामीण क्षेत्रों के दलितो और पिछडो को सबसे ज्यादा निशाना बनाते है। आस्था के नाम पर गंभीर बिनारियों को भी शैतान का प्रकोप कह कर अपनी दुकान चलाने का अच्छा तरीका है। जिसमें तेजी से लोग फंस रहे है।

आस्था बदलने के कारण अंधविश्वास

हालांकि पंजाब मे बढ़ते धर्म परिवर्तन के खेल को रोकने के लिए कई सिख संस्थाएं जिसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने आगे बढ़ कर लोगो को जागरूक करने की पहल शुरु की है। जिसके लिए घर घर प्रचार कार्यक्रम शुरु किया गया.. इतने ही नहीं अंधविश्वास की आड़ में किसी की बलि न चढ़े उसके लिए धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की भी मांग तेज हो गई है। पंजाब में धर्म बदलने के बजाय आस्था बदलने के कारण अंधविश्वास और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई है। सही मायने में पंजाब में गहराई से विश्लेषण और मजबूत कानून की जरूरत है। ताकि पंजाब की हवाओ से अँधविश्वास दूर हो सकें, क्योंकि अगर ये ऐसे ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब सिख भी इस वायरस की चपेट में आ जायेंगे।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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