TMC MPs Join NCPI: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के एक अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल में शामिल होने का दावा सामने आया। इस दावे के बाद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अचानक सुर्खियों में आ गई। पार्टी ने खुद को बंगाल की सबसे बड़ी संसदीय ताकत बताना शुरू कर दिया। हालांकि जब मीडिया ने इस पार्टी की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की तो कई दिलचस्प बातें सामने आईं।
NCPI, यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज है। पार्टी मूल रूप से त्रिपुरा में पंजीकृत है और अभी तक उसे चुनाव आयोग की आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। इसके बावजूद 20 सांसदों के समर्थन के दावे ने इसे अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया।
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चुनावी प्रदर्शन रहा बेहद सीमित| TMC MPs Join NCPI
अगर पार्टी के चुनावी रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उसका प्रदर्शन अब तक बेहद सीमित रहा है। वर्ष 2023 के पंचायत चुनावों में NCPI ने पश्चिम बंगाल में दो उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन दोनों को हार का सामना करना पड़ा। दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 822 वोट ही मिले थे। ऐसे में अचानक 20 सांसदों के साथ जुड़ने के दावे ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी का पता खोजने पहुंची मीडिया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई ने NCPI के पश्चिम बंगाल में दर्ज आधिकारिक पते की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि हावड़ा जिले के संकरैल इलाके में स्थित पार्टी का पंजीकृत पता किसी बड़े राजनीतिक कार्यालय का नहीं, बल्कि एक सामान्य आवासीय मकान का है। यह मकान उत्तिय कुंडू और उनकी पत्नी शेवली कुंडू के नाम पर दर्ज है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दंपति लगभग आठ साल पहले नदिया जिले से यहां आकर रहने लगा था।
घर के बाहर लगे बोर्ड ने भी लोगों का ध्यान खींचा। बोर्ड पर उत्तिय कुंडू को एक बांग्ला समाचार पत्र का संपादक, गणित शिक्षक, ऑडिटर, स्वास्थ्य सलाहकार और योग स्वयंसेवक बताया गया था। वहीं उनकी पत्नी शेवली कुंडू को कलकत्ता हाईकोर्ट की वकील और भूमि सर्वेक्षण में डिप्लोमा धारक बताया गया।
घर की दीवारों पर लिखे मिले अलग-अलग संदेश
मकान की बाहरी दीवारों पर भी कुछ संदेश लिखे हुए मिले। एक तरफ “जागो बिस्वा” का नारा दिखाई दिया, जबकि दूसरी ओर “असंगठित महिला कामगार संघ” लिखा हुआ था। पड़ोसियों ने बताया कि इसी परिसर से एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी संचालित किया जाता है, जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम करता है। दिलचस्प बात यह रही कि सोमवार सुबह से ही इस मकान के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की तैनाती भी देखी गई, जिससे इलाके में चर्चा और बढ़ गई।
सोशल मीडिया पर किया बड़ा दावा
20 सांसदों के NCPI में शामिल होने की खबर सामने आने के अगले दिन पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। पोस्ट में दावा किया गया कि 20 लोकसभा सीटों के साथ NCPI अब पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी संसदीय शक्ति बन चुकी है। पार्टी ने एक ग्राफिक भी जारी किया, जिसमें राज्य की 42 लोकसभा सीटों का राजनीतिक बंटवारा दिखाया गया। इस ग्राफिक के अनुसार NCPI के पास 20 सीटें, भाजपा के पास 12 सीटें, TMC के पास 8 सीटें और कांग्रेस के पास 1 सीट बताई गई।
एक अन्य पोस्ट में पार्टी ने कथित तौर पर शामिल हुए सभी सांसदों का स्वागत किया और कहा कि उनका अनुभव, जमीनी पकड़ और जनता के प्रति समर्पण संगठन को और मजबूत बनाएगा।
NDA के साथ काम करने की इच्छा जताई
NCPI के संस्थापक सदस्यों में शामिल और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सचिव बताए जाने वाले संतनु डे ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उत्तर 24 परगना जिले के रहने वाले संतनु डे ने कहा कि यह पार्टी के विस्तार का बड़ा अवसर है।उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करती है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी के रूप में काम करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सांसद काकोली घोष दस्तीदार उन्हें दिल्ली बुलाती हैं तो वह वहां जाकर संयुक्त रूप से मीडिया से बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
फिलहाल NCPI के दावों और उसके अचानक चर्चा में आने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।





























