INDIA Alliance Breakup: विपक्षी गठबंधन INDIA की 8 जून को हुई अहम बैठक में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सहयोगी दलों के सामने अपनी रणनीति और सोच को खुलकर रखा। बैठक के दौरान उन्होंने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला, साथ ही विपक्षी दलों को यह संदेश देने की कोशिश की कि मौजूदा राजनीतिक हालात में केवल चुनावी राजनीति के भरोसे सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देशभर में व्यापक स्तर पर प्रतिरोध की भावना विकसित करने की जरूरत है।
बैठक में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। चर्चा के दौरान कुछ सहयोगी दलों ने कांग्रेस की कार्यशैली और रणनीति को लेकर सवाल भी उठाए। हालांकि राहुल गांधी ने इन आलोचनाओं को सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वह सभी सुझावों और आलोचनाओं को सुनने के लिए तैयार हैं।
और पढ़ें: एक-एक कर छूट रहे साथी! TMC के 19 सांसदों की बगावत ने बढ़ाई दीदी की टेंशन| TMC Political Crisis
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस की भूमिका सभी को साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी संगठन को आलोचनाएं भी सहनी पड़ती हैं, लेकिन गठबंधन की मजबूती के लिए यह जरूरी है।
पुराने राजनीतिक तरीकों पर उठाए सवाल| INDIA Alliance Breakup
राहुल गांधी ने सहयोगी दलों को संबोधित करते हुए कहा कि कई विपक्षी पार्टियां अभी भी पारंपरिक राजनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनके मुताबिक, पहले जिन राजनीतिक रणनीतियों से चुनाव जीते जाते थे, आज की परिस्थितियों में वे उतनी प्रभावी नहीं रह गई हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के कई प्रमुख संस्थानों पर बीजेपी का प्रभाव बढ़ चुका है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र, जांच एजेंसियां, मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे कई क्षेत्र अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे माहौल में विपक्ष को नई रणनीति अपनाने की जरूरत है।
चुनावी प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के कई नेताओं को लगता है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं। राहुल ने दावा किया कि विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भी इस विषय पर अपनी आशंकाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल चुनावी परिणामों पर चर्चा करने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मुद्दे पर भी संघर्ष करना होगा।
सोशल मीडिया को लेकर भी जताई चिंता
राहुल गांधी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को अक्सर बराबरी का मंच माना जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उनका दावा था कि विपक्षी आवाजों की पहुंच कई बार सीमित हो जाती है और डिजिटल माध्यमों में भी असमानता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सूचना और संवाद की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है और इस पर गंभीर चर्चा की जरूरत है।
‘प्रतिरोध’ को बताया सबसे बड़ा हथियार
राहुल गांधी के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “प्रतिरोध” को लेकर था। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ने लगती हैं, तब जनता की आवाज और जनआंदोलन सबसे प्रभावी माध्यम बन जाते हैं। उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाना और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश होता है।
राहुल ने कहा कि हर नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता को यह सोचना चाहिए कि वह अन्याय और गलत नीतियों के खिलाफ किस तरह आवाज उठा सकता है। उनके अनुसार, प्रतिरोध केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सोच और लोकतांत्रिक भावना है।
कांग्रेस और विपक्षी एकता पर जोर
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक आंदोलन के रूप में शुरू हुई थी और देश की आजादी की लड़ाई में उसकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की विचारधारा बीजेपी और RSS से अलग है और पार्टी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी।
साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों से निराशा छोड़कर एकजुट रहने की अपील की। राहुल गांधी का कहना था कि अगर विपक्ष एकजुट होकर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाए और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करे, तो आने वाले समय में राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।


























