India Inflation News: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले संघर्षों का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया। इसका असर भारत में भी देखने को मिला, जहां ईंधन से लेकर रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ गया था।
अब जब हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की चर्चा है, तो माना जा रहा है कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक सप्लाई चेन सामान्य रहती है और कच्चे तेल व गैस की कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो कई जरूरी वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
LPG सिलेंडर की कीमतों में मिल सकती है राहत| India Inflation News
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध और तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के मुख्य घटक प्रोपेन और ब्यूटेन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। अब यदि बाजार में कीमतें नीचे आती हैं, तो घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की लागत में कमी आ सकती है। जानकारों का मानना है कि सिलेंडर की कीमतों में 70 से 100 रुपये तक की राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
खजूर और ड्राई फ्रूट्स हो सकते हैं सस्ते
भारत बड़ी मात्रा में खजूर और कुछ अन्य ड्राई फ्रूट्स ईरान तथा खाड़ी देशों से आयात करता है। समुद्री मार्गों में बाधा आने और सप्लाई प्रभावित होने से इनकी कीमतों में पिछले महीनों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। व्यापारियों का कहना है कि यदि आयात मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाते हैं, तो खजूर समेत कई आयातित ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। इससे खुदरा बाजार में भी ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
CNG और PNG के दाम भी घट सकते हैं
भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा एलएनजी के रूप में विदेशों से खरीदता है। युद्ध की आशंकाओं के दौरान गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ गई थीं। अब वैश्विक बाजार में गैस सस्ती होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो घरेलू स्तर पर CNG और PNG के दामों में 4 से 6 रुपये प्रति किलो या प्रति एससीएम तक की कमी देखने को मिल सकती है। इसका सीधा फायदा वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा।
खाद क्षेत्र को भी मिल सकती है राहत
भारत हर साल बड़ी मात्रा में यूरिया और फॉस्फेट आधारित उर्वरकों का आयात करता है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के दौरान आयात लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। अब सप्लाई चेन सामान्य होने से उर्वरक कंपनियों की लागत कम हो सकती है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटने के साथ-साथ किसानों को खाद की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार इनपुट लागत में 12 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग को फायदा
पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतें कच्चे तेल से सीधे प्रभावित होती हैं। खाड़ी तनाव के दौरान कच्चे तेल में तेजी आने से प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उत्पाद महंगे हो गए थे। यदि तेल की कीमतें सामान्य स्तर पर लौटती हैं तो प्लास्टिक उद्योग की लागत घट सकती है। इससे पैकेजिंग सामग्री सस्ती होने की संभावना है, जिसका फायदा कई उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों को मिलेगा।
हवाई टिकट हो सकते हैं सस्ते
एयरलाइंस कंपनियों के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर खर्च होता है। तेल महंगा होने पर हवाई किराए भी बढ़ जाते हैं। अब यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो ATF सस्ता हो सकता है। इससे एयरलाइंस कंपनियों को राहत मिलेगी और यात्रियों के लिए हवाई टिकट की कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत तक कमी देखने को मिल सकती है।
स्क्रैप मेटल कारोबार पर भी असर
यूएई और अन्य खाड़ी देशों से भारत बड़ी मात्रा में एल्युमिनियम और कॉपर स्क्रैप आयात करता है। युद्धकालीन जोखिम और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ने से इन उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ा था। अब शिपिंग रूट सामान्य होने और माल ढुलाई लागत घटने से स्क्रैप मेटल की कीमतों में कमी आ सकती है। इससे घरेलू रीसाइक्लिंग उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिलेगा और उत्पादन लागत कम होगी।
कुल मिलाकर, खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। यदि हालात स्थिर रहते हैं, तो आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर, ईंधन, ड्राई फ्रूट्स, हवाई यात्रा और कई अन्य जरूरी चीजों में राहत मिल सकती है।





























