Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद में पिछले कुछ दिनों में अपराध, लापरवाही और बड़े बयानों से जुड़ी ऐसी पांच घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया है। खोड़ा इलाके में शादी का रिश्ता टूटने से नाराज सिरफिरे आशिक ने दो सगी बहनों पर गोलियां चला दीं, तो वहीं आरडीसी के नामी तनिष्क शोरूम में प्रेमिका के चक्कर में सेल्समैन ने 4.55 करोड़ की महाचोरी को अंजाम दे डाला।
इसी बीच जिले में पहुंचे शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट पर सीधे सवाल दागकर नई बहस छेड़ दी है। दूसरी तरफ, गाजियाबाद में गिरता भूजल स्तर और सरकारी दावों की नाकामी जनता को डरा रही है, तो वहीं एमएमजी अस्पताल ने एक जीवित मरीज को ही मृत घोषित कर बड़ी लापरवाही का प्रमाण दिया है। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी पांचों बड़ी खबरों की पूरी इनसाइड स्टोरी और हर मामले को एक-एक करके जानते हैं।
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शादी टूटने पर दो सगी बहनों पर बरसाई गोलियां
गाजियाबाद की पहली खबर खोड़ा से है, जहां 2 सगी बहनों पर हुए हमले से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है। घायलों का उपचार नजदीकी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस मौके पर मौजूद है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है कि क्या है पूरा मामला और पुलिस की अब तक की कार्रवाई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के आदर्श नगर (वाल्मीकि चौक) में शादी का रिश्ता टूटने से नाराज एक युवक ने घर में घुसकर दो सगी बहनों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में 20 वर्षीय खुशी और उसकी 18 वर्षीय छोटी बहन निधि गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी जॉनी को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी जॉनी का खुशी के साथ करीब एक साल पहले रिश्ता तय हुआ था, लेकिन युवक की गलत आदतों और आपसी विवाद के चलते लड़की के परिवार ने 3-4 महीने पहले यह रिश्ता तोड़ दिया था। इसी रंजिश और बेइज्जती के अहसास में उसने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी जॉनी ने एक सोशल मीडिया वीडियो भी जारी किया, जिसमें उसने आरोप लगाया कि खुशी के परिवार ने उससे शादी के नाम पर ₹2 लाख रुपए लिए थे। जब उसने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया।
मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे जॉनी हाथ में पिस्टल लेकर उनके घर पहुंचा। हमलावर को देखकर दोनों बहनों ने खुद को ऊपर के कमरे में बंद कर लिया और मुख्य दरवाजे को फ्रिज से ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी ने पड़ोसी के कमरे की खिड़की का शीशा तोड़ा और अंदर घुसकर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। जॉनी ने खुशी को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं, जिससे उसके पेट, जांघ और कंधे में गोलियां लगीं। जब छोटी बहन निधि अपनी बड़ी बहन को बचाने के लिए बीच में आई, तो आरोपी ने उसके चेहरे पर भी गोली मार दी।
घटना की सूचना मिलते ही गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी की तलाश के लिए 5 टीमें गठित की गई थीं, जिन्होंने वारदात के महज 3 घंटे के भीतर आरोपी जॉनी को सिहानी गेट इलाके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों घायल बहनों का इलाज दिल्ली के अस्पताल में जारी है।
करोड़ों की चोरी करने वाले मास्टरमाइंड और गर्लफ्रेंड गिरफ्तार (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से इस समय अपराध जगत की एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और भरोसे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक रईस प्रेमिका को शादी का तोहफा देने और करोड़ों के मालिक बनने के चक्कर में एक सेल्समैन ने अपने ही शोरूम में डाका डाल दिया। नकली सगाई की पार्टी, शराब का नशा और चाबी की चोरी… इस कहानी में वो सब कुछ है जो किसी बॉलीवुड फिल्म में होता है। पुलिस ने मास्टरमाइंड बॉयफ्रेंड और उसकी गर्लफ्रेंड को सलाखों के पीछे भेज दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और कैसे पुलिस ने सुलझाई यह गुत्थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद के आरडीसी (RDC) स्थित प्रतिष्ठित तनिष्क शोरूम में हुई 4.55 करोड़ की हाई-प्रोफाइल चोरी का गाजियाबाद पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस करोड़ों की चोरी का मास्टरमाइंड शोरूम का ही एक शातिर सेल्समैन निकला, जिसने अपनी शादी के खर्च और लग्जरी लाइफ की चाहत में अपनी प्रेमिका और पिता के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को रचा था। पुलिस ने मास्टरमाइंड बॉयफ्रेंड, उसकी प्रेमिका और पिता को गिरफ्तार कर लिया है।
चोरी का मुख्य मास्टरमाइंड नितिन वर्मा है, जिसने करीब डेढ़ महीने पहले ही शोरूम में सेल्समैन की नौकरी शुरू की थी। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि नितिन और उसकी प्रेमिका काजल की शादी होने वाली थी। शादी के भारी खर्चों को उठाने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए दोनों ने मिलकर इस बड़ी वारदात की योजना बनाई। साजिश में नितिन के पिता संजय वर्मा भी शामिल थे।
वारदात को अंजाम देने के लिए नितिन ने 11 जून की रात अपने सहयोगियों के लिए एक पार्टी रखी। इस पार्टी में उसने शोरूम के मुख्य चाबी रखने वाले कैशियर गौतम राज को अत्यधिक शराब पिलाई। इसके बाद उसे घर छोड़ने के बहाने, नितिन ने कैशियर के बैग से शोरूम की चाबियां उड़ा लीं। अगली सुबह 12 जून को करीब 7 बजे नितिन अपने एक स्कूल फ्रेंड चितरंजन उर्फ चिंटू के साथ चोरी की चाबी से शोरूम का शटर खोलकर अंदर घुसा।
उसे शोरूम के लेआउट की पूरी जानकारी थी। उसने ग्राउंड और बाकी फ्लोर को छोड़कर सीधे फर्स्ट फ्लोर को निशाना बनाया, जहां सबसे महंगे सोने और हीरे के जेवर रखे थे। महज 25 मिनट के भीतर वे 4.55 करोड़ के आभूषण समेटकर फरार हो गए।
पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी नितिन वर्मा, उसकी प्रेमिका काजल और पिता संजय वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.16 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण, 6.50 लाख कैश और वारदात में इस्तेमाल अवैध हथियार बरामद कर लिए हैं। चोरी में नितिन का साथ देने वाला उसका दोस्त चितरंजन उर्फ चिंटू और उसकी प्रेमिका सानिया फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई हैं और उन पर 25,000 का इनाम भी घोषित किया गया है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर कही ये बड़ी बात
अयोध्या के श्री राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बड़ा बयान दिया है। गाजियाबाद पहुंचे शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आर्थिक लेनदेन में पूरी पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर करोड़ों सनातनी भक्तों की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां सब कुछ साफ-सुथरा होना चाहिए। तो चलिए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि शंकराचार्य ने ट्रस्ट और गोमाता को लेकर क्या बड़ी बातें कहीं।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मंदिर के आर्थिक लेनदेन में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि श्रीराम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों सनातन धर्मियों की गहरी आस्था का केंद्र है, इसलिए वहां की हर व्यवस्था पूरी तरह ईमानदार और पारदर्शी होनी चाहिए।
अपनी 81 दिवसीय देशव्यापी ‘गो रक्षार्थ धर्म यात्रा’ के तहत गाजियाबाद पहुंचे शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों और भव्य मंदिरों का प्रबंधन प्रशासनिक ट्रस्टों के बजाय मुख्य रूप से योग्य धर्माचार्यों (संत-महात्माओं) के हाथों में होना चाहिए, ताकि सनातन परंपराओं और मूल्यों की रक्षा हो सके।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की राशि को लेकर हाल ही में उपजे विवाद और अनियमितताओं के आरोपों पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या से ऐसी खबरें आना श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचाती हैं।
अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने गोवंश की दुर्दशा पर भी रोष जताया और केंद्र सरकार से मांग की कि गो माता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किया जाए और उनकी हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगे। शंकराचार्य के इस बयान के बाद अयोध्या मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावे के पारदर्शी हिसाब-किताब को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है।
शहर में पानी बचाने की तमाम योजनाएं और सरकारी दावे फैल (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से इस समय एक ऐसी खबर आ रही है जो सीधे आपके और आपके बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। शहर में पानी बचाने की तमाम योजनाएं और सरकारी दावे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं और सड़कों पर धड़ल्ले से साफ पानी बहाया जा रहा है। कागजों में नियम तो कड़े हैं, लेकिन धरातल पर सब कुछ जीरो है। आखिर क्यों फेल हो रही है पानी बचाने की यह पूरी कवायद और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को सुधारने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए बनाए गए सभी नियम और योजनाएं जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल साबित हो रही हैं। प्रशासन और नगर निगम द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में पानी बचाने की यह पूरी कवायद सिर्फ सरकारी कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है।
नियमानुसार हर नई बहुमंजिला इमारत, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater Harvesting) अनिवार्य है। लेकिन शहर की अधिकांश सोसायटियों और इमारतों में यह सिस्टम या तो सिर्फ दिखाने के लिए बना है या पूरी तरह से खराब पड़ा है। प्रशासन द्वारा इसकी कोई नियमित चेकिंग नहीं की जा रही है।
इसके अलावा गाजियाबाद के रिहायशी इलाकों और व्यावसायिक क्षेत्रों में रोजाना सबमर्सिबल पंपों के जरिए पानी की अंधाधुंध बर्बादी हो रही है। गाड़ियों को धोने, सड़कों पर पानी छिड़कने और निर्माण कार्यों में साफ पानी का बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा पानी की बर्बादी पर चालान काटने की कार्रवाई केवल नाममात्र की होती है।
जल शक्ति अभियान और भूजल विभाग द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी (Monitoring) और इच्छाशक्ति की कमी के कारण नियम केवल कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं। नतीजतन, गाजियाबाद के कई इलाके तेजी से ‘डार्क ज़ोन’ (Dark Zone) की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां भविष्य में पानी का गंभीर संकट खड़ा होना तय है।
जिंदा मरीज को अस्पताल प्रशासन ने किया मृत घोषित (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल से लापरवाही का एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के वार्ड से अचानक गायब हुए एक जीवित मरीज को अस्पताल प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया और आनन-फानन में उसकी मौत की सूचना पुलिस को भी भेज दी।
जब पुलिस और घरवाले शव का पंचनामा करने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सबके होश उड़ गए। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि आखिर अस्पताल से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और इसके बाद क्या एक्शन लिया गया। आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल से लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां वार्ड से अचानक गायब हुए एक मरीज को अस्पताल प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया और उसकी ‘मौत’ की सूचना पुलिस को भी भेज दी। अस्पताल की इस बड़ी चूक के बाद जब पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे, तो पता चला कि मरीज मरा नहीं है, बल्कि वह अस्पताल से कहीं चला गया है। इस घोर लापरवाही के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
गाजियाबाद के मुख्य सरकारी एमएमजी (MMG) अस्पताल में एक मरीज को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। बुधवार को वह मरीज अचानक अपने वार्ड के बेड से गायब हो गया। वार्ड स्टाफ और ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज को बेड पर न पाकर उसकी तलाश करने या सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बजाय सीधे तौर पर मान लिया कि उसकी मौत हो गई है।
अस्पताल प्रशासन ने कागजी खानापूर्ति करते हुए पुलिस को ‘मेमो’ भेज दिया कि उक्त मरीज की मौत हो चुकी है। अस्पताल से मिली ‘मृत्यु’ की सूचना पर जब स्थानीय पुलिस शव का पंचनामा भरने और कानूनी कार्रवाई के लिए अस्पताल पहुंची, तो चौंकाने वाला सच सामने आया; मोर्चरी या बेड पर कोई शव था ही नहीं। जांच करने पर पता चला कि मरीज तो जीवित है और वह अस्पताल प्रशासन को बिना बताए कहीं चला गया है।
अस्पताल की इस बेहद गैर-जिम्मेदाराना हरकत की जानकारी जैसे ही मरीज के परिजनों को मिली, उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि जीवित व्यक्ति को मृत बता देना अस्पताल की गंभीर लापरवाही है और यह स्वास्थ्य व्यवस्था के वेंटिलेटर पर होने का साफ सबूत है।
इस हाई-प्रोफाइल लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। शुरुआती जांच के आधार पर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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