V Anantha Nageswaran News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने रोजगार के भविष्य को लेकर अहम टिप्पणी की है। उनका कहना है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसका सीधा असर नौकरी के बाजार पर दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और MBA जैसी डिग्रियों को सफल करियर की गारंटी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। AI कई पारंपरिक और तकनीकी कामों को संभालने लगा है, जिससे रोजगार की प्रकृति भी बदलती जा रही है।
नागेश्वरन का मानना है कि आने वाले समय में युवाओं को सिर्फ डिग्री पर निर्भर रहने के बजाय नए कौशल विकसित करने होंगे। जो लोग बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करेंगे, वही भविष्य में बेहतर अवसर हासिल कर पाएंगे।
ट्रेड स्किल्स को मिलना चाहिए बराबर सम्मान| V Anantha Nageswaran News
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इस बात पर भी चिंता जताई कि भारत में आज भी ट्रेड स्किल्स वाले पेशों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि वेल्डर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई और अन्य तकनीकी कार्य करने वाले लोग किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं।
उन्होंने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां व्यावसायिक कौशल रखने वाले लोगों को समाज में काफी सम्मान दिया जाता है। यही वजह है कि इन देशों ने औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में बड़ी सफलता हासिल की है। नागेश्वरन के अनुसार भारत में भी युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि केवल सफेदपोश नौकरियां ही सफलता का रास्ता नहीं हैं। तकनीकी और व्यावहारिक कौशल वाले क्षेत्रों में भी उज्ज्वल भविष्य मौजूद है।
ऐसे काम जिन्हें AI आसानी से नहीं कर पाएगा
AI के बढ़ते प्रभाव के बावजूद कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां इंसानी भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी। नागेश्वरन ने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल, विशेष जरूरतों वाले बच्चों की काउंसलिंग, अस्पतालों में सहायक सेवाएं, खेल प्रशिक्षण, खानपान और अन्य सेवा क्षेत्रों में मानवीय संवेदनाएं सबसे अहम होती हैं।
उनका कहना है कि मशीनें डेटा का विश्लेषण कर सकती हैं, लेकिन इंसानों जैसी भावनात्मक समझ और व्यक्तिगत जुड़ाव पैदा करना उनके लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।
सिर्फ रोजगार नहीं, रोजगारयोग्यता भी बड़ी चुनौती
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत के सामने केवल बेरोजगारी की समस्या नहीं है, बल्कि रोजगारयोग्यता यानी युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करने की चुनौती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केवल नई नौकरियां पैदा करना काफी नहीं होगा। युवाओं को उन नौकरियों के लिए जरूरी कौशल भी सिखाने होंगे। आज कई उद्योग तेजी से पूंजी-आधारित होते जा रहे हैं, जहां मशीनें और ऑटोमेशन अधिक काम कर रहे हैं और मानव श्रम की जरूरत अपेक्षाकृत कम हो रही है। ऐसे में सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर अधिक ध्यान देना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में हैं बड़े अवसर
नागेश्वरन ने भारत की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक संरक्षित होती जा रही है और कई देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना बेहद जरूरी है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा क्षेत्र और श्रम-प्रधान उद्योगों में भी रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उनका मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण, कौशल विकास और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार युवाओं को तैयार किया जाए, तो लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
भविष्य की सफलता का नया मंत्र
मुख्य आर्थिक सलाहकार का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को व्यावहारिक कौशल, संचार क्षमता, समस्या समाधान की योग्यता और मानवीय समझ जैसे गुणों को भी विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह वैश्वीकरण के दौर में सॉफ्टवेयर और MBA शिक्षा ने भारत को बड़ा फायदा पहुंचाया था, उसी तरह अब AI के युग में नए कौशल सफलता की कुंजी बनेंगे। भविष्य उन्हीं लोगों का होगा जिनके पास ऐसे कौशल होंगे जिन्हें मशीनें आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI के बढ़ते प्रभाव के बीच ट्रेड स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ने वाला है और यही आने वाले समय में रोजगार का नया फॉर्मूला साबित हो सकता है।
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