Bollywood Stars Moving to OTT: आजकल ज़्यादातर बॉलीवुड स्टार्स सिनेमाघरों का बड़ा पर्दा छोड़कर डिजिटल पर्दे का रुख कर रहे हैं, लेकिन अचानक ये बदलाव क्यों आ रहा है? क्यों 100 करोड़ क्लब वाले एक्टर्स भी ओटीटी के दीवाने हो गए हैं? तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की असली वजह!
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बॉक्स ऑफिस का दबाव!
बॉलीवुड सुपरस्टार्स का थिएटर्स छोड़कर ओटीटी की तरफ भागने का सबसे बड़ा कारण कहीं बॉक्स ऑफिस का वो खौफनाक दबाव तो नहीं! थिएटर्स में फिल्म रिलीज होते ही हर शुक्रवार को एक्टर्स की किस्मत दांव पर लग जाती है। अगर फिल्म पहले तीन दिन में 100 करोड़ नहीं कमा पाई, तो मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक, उस सुपरस्टार को फ्लॉप घोषित कर दिया जाता है। स्टारडम बचाने के इसी तनाव ने एक्टर्स को डिजिटल पर्दे की तरफ मोड़ दिया है।
क्योंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स या प्राइम वीडियो पर ‘फ्राइडे कलेक्शन’ या ‘ओपनिंग डे’ का कोई चक्कर ही नहीं होता! यहाँ न तो थिएटर्स की तरह टिकट खिड़की बंद होने का डर है और न ही फ्लॉप का ठप्पा लगने का तनाव। अब शाहिद कपूर की ‘फर्जी’ या वरुण धवन की ‘सिटाडेल: हनी बनी’ को ही देख लीजिए—यहाँ फोकस ओपनिंग डे के कलेक्शन पर नहीं, बल्कि दमदार कहानी पर था।
फिल्मों का घिसा-पिटा फॉर्मूला! (Bollywood Stars Moving to OTT)
दूसरी बड़ी वजह जो निकल कर सामने आ रही है, उसमें कहीं मसाला फिल्मों का घिसा-पिटा फॉर्मूला तो नहीं! थिएटर्स में दर्शकों को खींचने के लिए सुपरस्टार्स को जबरदस्ती 4 गाने, बेवजह का एक्शन और लार्जर-देन-लाइफ हीरो बनना पड़ता है। लेकिन डिजिटल पर्दे पर ये पाबंदी नहीं है। यहाँ सुपरस्टार्स को टिपिकल हीरो बनने के बजाय ‘ग्रे-शेड्स’ यानी विलेन या एक कमजोर और आम इंसान का किरदार निभाने का मौका मिलता है, जो उनकी एक्टिंग को एक नए लेवल पर ले जाता है।
सेंसर बोर्ड की पाबंदियों से आज़ादी!
और वहीं तीसरी सबसे बड़ी वजह की बात करें तो कहीं वो है सेंसर बोर्ड (CBFC) की पाबंदियों से आज़ादी तो नहीं! थिएटर्स में रिलीज होने वाली फिल्मों पर कैंची चलना आम बात है। गाली-गलौज, बोल्ड सीन्स, या फिर राजनीति और समाज से जुड़े डार्क और कड़वे सच दिखाने पर सेंसर बोर्ड तुरंत रोक लगा देता है। लेकिन डिजिटल पर्दे यानी ओटीटी पर ऐसा कोई सख्त पहरा नहीं है!
यहाँ डायरेक्टर्स और सुपरस्टार्स को अपनी कहानी को पूरी सच्चाई और रॉ (Raw) तरीके से पेश करने की खुली छूट मिलती है। यही वजह है कि एक्टर्स अब बिना किसी हिचकिचाहट के ऐसे गहरे और असली किरदार निभा पा रहे हैं, जिनकी थिएटर्स में कल्पना करना भी मुश्किल था।
तो यही वो सबसे बड़ी वजहें हैं जिनकी वजह से बॉक्स ऑफिस के बड़े-बड़े एक्टर्स भी अब डिजिटल पर्दे के दीवाने हो रहे हैं। देखा जाए तो यह बदलाव भारतीय सिनेमा के लिए एक वरदान है, क्योंकि बॉक्स ऑफिस की रेस से हटकर एक्टर्स अब अपनी असली कला यानी ‘एक्टिंग’ पर ध्यान दे पा रहे हैं। आपको क्या लगता है, क्या सुपरस्टार्स का ओटीटी पर आना सही है या उन्हें सिर्फ बड़े पर्दे पर ही होना चाहिए?
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