Nitin Shukla: यूएई के शारजाह में ड्रोन हमले का शिकार हुए तेल टैंकर ‘एमटी जेम नंबर-2’ से कानपुर के चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला समेत सभी 22 भारतीय को सुरक्षित बचा लिया गया है। भारत सरकार और दूतावास भारतीयों को स्वदेश वापसी के प्रयासों में जुटे हैं। हालांकि, इस रेस्क्यू और सुरक्षित वापसी के क्रेडिट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। आइए जानते हैं कि इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का असली सच क्या है।
Nitin Shukla सुरक्षित
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई के शारजाह एंकरेज (Sharjah Anchorage) के पास पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर ‘एमटी जेम नंबर-2’ (MT GEM NO. 2) पर 9 अक्टूबर 2026 को एक ड्रोन हमला हुआ था। इस जहाज पर कानपुर के रहने वाले चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला भी मौजूद थे, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
ड्रोन हमले के बाद जहाज पर हड़कंप मच गया था। नितिन शुक्ला और चालक दल के अन्य सदस्यों ने आपातकालीन नाव (लाइफबोट) की मदद से समय रहते जहाज छोड़ दिया और सूझबूझ से अपनी जान बचाई।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, सर्वानंद सोनोवाल के आधिकारिक बयान के अनुसार, जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं।
क्या है इस रेस्क्यू ऑपरेशन का असली सच?
सच्चाई यह है कि इस पूरे रेस्क्यू में नितिन समेत भारतीयों की अपनी तात्कालिक सूझबूझ और लाइफबोट का इस्तेमाल सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा, जिसके बाद भारत सरकार और दूतावास ने तुरंत कमान संभाली। फिलहाल सरकार जहाज प्रबंधन कंपनी के संपर्क में है और सभी 22 भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए कागजी और राजनयिक औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।
Nitin Shukla के परिवार की गुहार
इस खौफनाक हादसे के बाद नितिन शुक्ला ने रविवार को फोन पर अपनी पत्नी से बात कर अपने सुरक्षित होने की पुष्टि की, जिससे उनके परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली है। नितिन के परिवार ने भारतीय दूतावास (Indian Embassy) से उन्हें जल्द से जल्द और सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की गुहार लगाई है।
भारत सरकार का एक्शन
इस बीच, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय पूरी तरह एक्शन में आ चुके हैं। सरकार जहाज प्रबंधन कंपनी (Ship Management Company) के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है और सभी भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए जरूरी राजनयिक (Diplomatic) औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो शारजाह में हुआ यह ड्रोन हमला एक बड़े समुद्री हादसे में बदल सकता था, लेकिन नितिन और भारतीयों की सतर्कता और आपातकालीन लाइफबोट के सही समय पर इस्तेमाल ने 22 मासूम जिंदगियों को सुरक्षित बचा लिया। वहीं संकट की इस घड़ी में भारत सरकार और राजनयिक मिशन की त्वरित सक्रियता ने संकट में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा को और मजबूत किया है। अब सभी को इन बहादुर भारतीयों की सकुशल वतन वापसी का इंतजार है।












































