Raja rasalu: पंजाब एक ऐसा राज्य है जो अपनी लोक परंपराओं को आज भी बखूबी जिंदा रखे हुए है.. और बड़ी खूबसूरती से उसका पालन भी करते है.. लोक परंपराओं में कही जाने वाली कहानियां और उनके किरदारों की खूश्बू और उनके प्रभाव को पंजाब की ग्रामीण परिवेश में महसूस किया जा सकता है। इन्ही में से एक है पौराणिक राजकुमार, एक योद्धा और पंजाबी लोककथा के नायक माने जाने वाले राजा रसालू। जिनकी जादुई और साहसिक कहानियां आज भी प्रचलित है, औऱ पंजाब के लोग उन्हें एक महान संत के रूप में पूजते है जिन्होंने अपनी करूणा और दयालु स्वाभाव से लोगों में सम्मान हासिल किया था। जानेंगे कौन ते राजा रसालु.. औऱ क्या है उनकी कहानी।
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कौन थे राजा रसालू
राजा रसालू सियालकोट, जो कि अभी पाकिस्तान में पड़ता है, वहां के राजा शालिवाहन जिन्हें सालबान भी कहा जाता है, और रानी लूना के बेटे थे। कहते है कि रानी लूना विवाह के काफी समय कर संतानहीन ही थी, जिसके बाद उन्होंने दर दर जाकर ईश्वर से संतान देने की भीख मांगी थी। लेकिन रानी लूना की ईष्र्या की प्रवृत्ति के कारण उसने एक बड़ा पाप कर दिया था। राजा सालबान की एक और रानी थी अच्छरा… जिनके पुत्र थे पूरन। पूरण बेहद तेजस्वी थे जिसके कारण संतानहीन लूना उनके साथ बुरी व्यवहार करती थी, यहां तक कि राजा को पुत्र के खिलाफ भड़का दिया औऱ राजा ने पूरण के हाथ पैर कटवा कर गहरे कुएं में फिकवा दिया।
मगर ईश्वर की कृपा देखो, पूरण फिर भी जीवित ही रहे, इसी बीच बाबा गोरखनाथ वहां से गुजरे, तो उन्हें पूरण के होने का आभाष हुओ, उन्होंने राजकुमार पूरण को न केवल कुएं से निकाला बल्कि हाथ पैर भी लौट दिये. जिसके बाद पूरण बाबा गोरखनाथ के अनुयायी बन गए। कहते है कि की साल जोगी बन कर रहने के बाद पूरण भगत अपने पिता की नगरी आये, और एक सूखे बगीचे में रहने लगे. जो कभी हरा भरा हुआ करता था। लेकिन पूरण भगत के आते ही बगीचा हरा भरा हो गया, जिसके बारे में सुनने के बाद भगत पूरण मां जो अँधी हो गई थी, राजा और रानी लूना के साथ वहां आई।
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रानी अच्छरा का बेटा बना सन्यासी
रानी अच्छरा अपने बेटे को देखना चाहती थी, लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि सामने बैठा सन्यासी उनका बेटा है, उन्होंने प्रार्थना की कि उनकी आँखे ठीक कर दी जायें, पूरण भगत ने रानी की आंखे ठीक कर दी.. जिससे प्रभावित होकर रानी लूना ने फिर से संतान की इच्छा की.. जिसपर पूरण भगत ने पूछा कि राजा का एक बेटा था.. वो कहां है.. अगर सच में संतान चाहिए तो सत्य बताओ.. रानी लूना केवल संतान चाहती थी इसलिए जो भी पाप उसने किया था सब बता दिया। जिसके बाद पूरण ने अपना सत्य बता दिया.. और रानी लूना को एक चावल का दाना देते हुए कहा कि तुम पुत्र को जन्म तो दोगी लेकिन कभी उसकी मां नहीं बन पाओगी.. जिस तरह मैं अपनी मां से दूर हुआ, तुम भी अपनी मां से दूर हो जाओगी।
द एडवेंचर्स ऑफ द पंजाब हीरो राजा रसालू
सबसे पहले चार्ल्स रेव स्विनर्टन की किताब द एडवेंचर्स ऑफ द पंजाब हीरो राजा रसालू: एंड अदर फोक-टेल्स ऑफ द पंजाब” में राजा रसालू के बारे में बताया गया है, जिसमें उनके परिवेश में इस्लामिक प्रभाव दिखता है तो वही साल 1894 में लेखक फ्लोरा एनी स्टील की लिखी किताब ‘टेल्स ऑफ द पंजाब’ टोल्ड बाय द पीपल” में राजा रसालू का अलग ही संस्करण देखना को मिलता है। रानी लूना गर्भवती हुई, लेकिन बच्चे के जन्म से पहले ही उन्होंने जोगियो को बुला कर बच्चे के बारे में पूछा, जिसके बाद जोगियो ने राजा रानी को चेतावनी दी कि रानी लूना के पाप के कारण वो दोनो की बच्चे के जन्म के बाद उसका चेहरा नहीं देख सकते है।
जोगियों ने कहा कि जैसे ही बच्चा जन्में, उसने ऐसी भूमिगत जगह पर छिपाया जाये जहां से वो 12 सालो तक धूप न देख सकें। राजा के आदेश पर नौकर चाकर खेल खिलौने, शस्त्र और शास्त्र सभी का ज्ञान राजा रसालू को दिया जा रहा था, ताकि वो बड़े होकर एक बेहतर राजा बन सकें, इसी तरह से 11 साल बीत गए, लेकिन जैसे ही 12 साल हुआ, राजा रसालू अब कैद में नहीं रहना चाहते थे, उन्होंने बाहर की दुनिया में जाने का फैसला किया। दाइयो के लाख मना करने के बाद भी अरबी घोड़े भाउनर पर सवाल हो कर वो महल से निकल गए, औऱ नदी किनारे चलने गए।
राजा रसालू ने महिलाओं घड़े फोड़े
वो सबसे पहले अपने पिता से मिलना चाहते थे इसलिए राजा के महल की तरफ चल निकले, लेकिन उन्होंने अपने बचपने में कुंये से पानी भरती महिलाओं के मटके तोड़ दिये। जिससे महिलायें राजा से न्याय मांगने पहुंची। राजा समझ गए कि ये हरकत उनके पुत्र की है, उन्होंने सभी महिलाओं को लोहे और पीतल के घड़े दिये, लेकिन हैरानी की बात है कि जब राजा रसालू ने महिलाओं के सिर पर पीतल औऱ लोहे के घ़ड़े देखे तो उसे भी अपने तीर धनुष से भेद दिया, औऱ पूरे अंहकार के साथ राजा के सामने पहुंचे.. लेकिन राजा ने उन्हें देखने के बजाय मुंह फेर लिया।
जोगियो ने कहा था कि 12 साल से पहले बच्चे का चेहरे देखेंगे तो बच्चे की मौत हो जायेगी। राजा रसालू को पिता का व्यावहार बेहद चुभ गया। उन्होंने कहा कि वो एक पिता से मिलने आये थे, लेकिन शायद वो पिता की छाया के काबिल नहीं है, मगर वो उससे बेहतर के काबिल है, इसलिए वो राज्य छोड़कर जा रहे है। लेकिन तभी मां की रोने की आवाज आई, उन्होंने पूछा कि उनका क्या कसूर था कि माता पिता ने त्याग दिया, जिस पर रानी लूना ने कहा कि वो अपने भाग्य पर रो रही है लेकिन राजा रसालू को अपना हृद्य सदैव पवित्र रखना है। राजा रसालू हमेशा के लिए माता पिता को छोड़ कर चले गए।
कहा जाता है कि बचपन से ही उनके पास अलौकिक शक्तियां थी, जिन्होंने गृह त्याह के बाद पंजाब के कई इलाकों में राक्षसो और बुरी ताकतो से लड़ कर उनका अंत किया था। कहते है कि जीवन के अंतिम समय में उन्होंने सन्यास ले लिया था.. कमजोरो की रक्षा के लिए उन्होंने बिना शस्त्र उठाये ही अत्याचारियों का सामना किया था। उन्हें हराया था। राजा रसलू चक्र में राजा रसालू से जुड़ी कहानियों का विवरण है। जिसमें प्रारंभिक जीवन से लेकर पहली विजय और राक्षक का अंत, राजा सिरिकप से चौपर मे जीत, रानी कोक्लान का राजद्रोह, उनका भाग्य और राजा रसालू की मृत्यु के बारे में विवरण दिया गया है। राजा रसालू का जीवन पंजाब की लोककला का अहम हिस्सा है।































