बीआर गवई बनेंगे अगले चीफ जस्टिस, धारा 370 और इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे कई फैसलों में आ चुका है नाम!

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 16 अप्रैल 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 16 अप्रैल 2025, 12:00 AM
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Chief Justice Br Gavai: हाल ही में देश के मुख्य न्यायाधीश को लेकर एक अहम खबर आई है। जस्टिस बीआर गवई (Chief Justice Br Gavai) को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाएगा। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश की है। तो आइए इस लेख में जस्टिस बीआर गवई के बारे में कुछ जानकारी के बारे में बताते हैं।

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जानें कौन है? बीआर गवई

बीआर गवई (Chief Justice Br Gavai) भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक प्रतिष्ठित न्यायाधीश हैं। उनका पूरा नाम भूषण रामकृष्ण गवई है। न्यायमूर्ति बीआर गवई (Chief Justice Br Gavai) भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना (Justice Sanjiv Khanna) ने केंद्रीय कानून मंत्रालय से न्यायमूर्ति गवई को अपना उत्तराधिकारी नामित करने की सिफारिश की है। वे 14 मई, 2025 को देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ लेंगे। वे अनुसूचित जाति समुदाय (Scheduled Caste Communities) से आने वाले दूसरे मुख्य न्यायाधीश होंगे।

इससे पहले यह प्रतिष्ठित सम्मान न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन (Justice KG Balakrishnan) को दिया गया था, जिन्होंने 2007 से 2010 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था। वहीं, न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल अपेक्षाकृत संक्षिप्त होगा। उनकी सेवानिवृत्ति नवंबर 2025 में निर्धारित है, जिसका अर्थ है कि वे लगभग 6 महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहेंगे। इसके अलावा, वे 2003 से 2019 के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में न्यायाधीश के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

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दुसरे दलित जस्टिस होंगे बीआर गवई

आपको बता दें, जस्टिस गवई (Chief Justice Br Gavai) करीब छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहेंगे। जस्टिस गवई नवंबर में रिटायर होने जा रहे हैं। जस्टिस केजी बालाकृष्णन के बाद चीफ जस्टिस का पद संभालने वाले वे दूसरे दलित होंगे, जिन्हें 2007 में देश के शीर्ष न्यायिक पद पर पदोन्नत किया गया था। जस्टिस गवई ने राज्य में पूर्व हाईकोर्ट एडवोकेट जनरल और जस्टिस बैरिस्टर राजा भोसले के साथ काम किया था।

इसके बाद उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के समक्ष मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में प्रैक्टिस की।

जानें जस्टिस गवई कब बने थे जज

जस्टिस गवई ने अगस्त 1992 में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर बेंच में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया था। वर्ष 2000 में उन्हें नागपुर बेंच का सरकारी वकील नियुक्त किया गया। बाद में, जस्टिस गवई ने 2003 में हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला और 2005 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। आखिरकार, उन्हें वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।

इसके अलवा जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। 2016 में उन्होंने नोटबंदी को संवैधानिक घोषित करने वाले फैसले में बहुमत की राय दी थी। इसके अलावा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले बहुचर्चित फैसले में भी उनकी अहम भूमिका रही।

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