India Nepal Military Relations:भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रविवार को चार दिनों के आधिकारिक दौरे पर नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे। काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। जनरल सेठ की यह यात्रा ऐसे अहम मोड़ पर हो रही है, जब भारतीय सेना की ‘अग्निवीर योजना’ के तहत गोरखा युवाओं की भर्ती को लेकर नेपाल में विरोध चल रहा है और नेपाल सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा रखी है।
मानद उपाधि से नवाजे जाएंगे सेना प्रमुख| India Nepal Military Relations
दौरे के मुख्य कार्यक्रम के तहत जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। यह विशेष सम्मान समारोह 17 अगस्त को नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा आयोजित किया जाएगा। भारत और नेपाल के बीच यह दशकों पुरानी अनूठी परंपरा रही है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के मौजूदा सेना प्रमुखों को अपने यहां मानद जनरल की रैंक प्रदान करते हैं। यह ऐतिहासिक प्रथा दोनों पड़ोसी देशों और उनकी फौजों के बीच गहरे विश्वास, सांस्कृतिक जुड़ाव और अटूट दोस्ती का प्रतीक मानी जाती है।
हवाई अड्डे पर हुआ औपचारिक स्वागत
जनरल धीरज सेठ अपने पांच सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यह यात्रा कर रहे हैं। वे नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल के औपचारिक निमंत्रण पर वहां पहुंचे हैं। इस दौरे पर उनके साथ आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष कोमल सेठ भी मौजूद हैं। काठमांडू पहुंचने पर नेपाली सेना के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रदीप जंग के.सी. और उनकी पत्नी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का औपचारिक स्वागत किया। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 अगस्त, सोमवार को जनरल सेठ राष्ट्रपति भवन में यह मानद उपाधि ग्रहण करेंगे।
आपसी समझ और रणनीतिक संबंधों को मजबूती
नेपाल के रक्षा मंत्रालय और नेपाली सेना का मानना है कि इस तरह के उच्चस्तरीय सैन्य संवाद दोनों देशों के पुराने और घनिष्ठ रिश्तों को नई ऊर्जा देते हैं। ऐसे दौरों से दोनों सेनाओं के शीर्ष नेतृत्व को साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं, रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श करने का मौका मिलता है, जिससे आपसी समझ और गहरी होती है।
दशकों पुराना रक्षा सहयोग
जनरल धीरज सेठ के इस दौरे को दोनों देशों के बीच पारंपरिक सैन्य साझेदारी को आगे बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच केवल औपचारिक संबंध नहीं हैं, बल्कि पेशेवर प्रशिक्षण, संयुक्त युद्धाभ्यास, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और नियमित प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ताओं का एक लंबा व मजबूत इतिहास रहा है। विवादों के साए के बीच हो रही यह उच्चस्तरीय यात्रा दोनों देशों के रक्षा तंत्र के बीच लगातार संवाद बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।













































