Jaipur Amayra Case: राजधानी जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा 4 की छात्रा अमायरा की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे इंतजार के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन इससे अमायरा के परिवार की नाराजगी और बढ़ गई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले की जांच अधूरी की है और कई गंभीर पहलुओं को नजरअंदाज करते हुए मुख्य जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि उनकी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन चार्जशीट में आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल नहीं की गईं।
चार्जशीट पर परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल| Jaipur Amayra Case
अमायरा के पिता विजय मीणा का कहना है कि पुलिस ने चार्जशीट में स्कूल मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी रामू को आरोपी बनाया है। हालांकि उनका आरोप है कि जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 75 केवल शिक्षिका पर लगाई गई, जबकि स्कूल मालिक और प्रिंसिपल को सिर्फ लापरवाही और साक्ष्य छिपाने के आरोपों तक सीमित रखा गया।
आखिरकार खुल गया अमायरा की मौत का राज!
अमायरा के माता-पिता ने जारी किया चौंकाने वाला वीडियो
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— The Litmus (@thelitmusnews) July 8, 2026
विजय मीणा का कहना है कि किसी भी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और उनकी देखरेख की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रिंसिपल की होती है। ऐसे में यदि स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा तो उसके खिलाफ भी गंभीर धाराएं लगनी चाहिए थीं। उनका आरोप है कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्हें चार्जशीट में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
मां बोलीं- हमें ही कटघरे में खड़ा किया गया
अमायरा की मां शिवानी ने भी पुलिस जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान परिवार को ही मानसिक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे बार-बार ऐसे सवाल पूछे गए, जिनसे यह साबित करने की कोशिश की गई कि उनकी बेटी मानसिक रूप से अस्थिर थी। शिवानी ने कहा कि वह रोज अपनी बेटी से स्कूल की गतिविधियों के बारे में बात करती थीं और उसकी पढ़ाई तथा व्यवहार पर नजर रखती थीं। उनके मुताबिक, उनकी बेटी पूरी तरह सामान्य थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर स्कूल में ऐसा क्या हुआ कि महज डेढ़ घंटे के भीतर चौथी कक्षा की एक बच्ची ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। उनका मानना है कि समय रहते स्कूल स्टाफ ने बच्ची की मानसिक स्थिति को समझा होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
1 नवंबर 2025 को हुई थी दर्दनाक घटना
गौरतलब है कि 1 नवंबर 2025 को अमायरा ने कथित तौर पर स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी। इस घटना ने पूरे जयपुर को झकझोर दिया था। मामले के सामने आने के बाद से ही परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता रहा है। करीब आठ महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। हालांकि चार्जशीट पेश होने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनकी वजह से इतनी छोटी बच्ची ने यह कदम उठाया।
स्कूल की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
अमायरा के पिता ने दावा किया कि जांच के दौरान स्कूल की कार्यप्रणाली से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए, जो चिंता बढ़ाने वाले हैं। उनका आरोप है कि स्कूल में कुछ शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के बिना पढ़ा रहे थे और कुछ के पास बीएड की डिग्री भी नहीं थी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। परिवार का कहना है कि केवल घटना की जांच ही नहीं, बल्कि स्कूल के पूरे प्रशासनिक सिस्टम की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
न्यायपालिका से लगाई निष्पक्ष सुनवाई की गुहार
परिजनों ने कहा कि पुलिस की चार्जशीट वास्तविक घटनाक्रम को पूरी तरह सामने नहीं लाती। उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण धाराएं नहीं लगाई गईं और कुछ लोगों की जिम्मेदारी तय करने से बचा गया है। परिवार ने अदालत से निष्पक्ष सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि उनकी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अभिभावक संघ ने भी दिया परिवार का साथ
इस मामले में संयुक्त अभिभावक संघ भी अमायरा के परिवार के समर्थन में उतर आया है। संगठन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि यह घटना पूरे शहर के लिए बेहद दर्दनाक थी और आज भी लोग न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आगामी 10 जुलाई और 13 जुलाई की सुनवाई के बाद भी परिवार को न्याय नहीं मिला तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
अब अदालत की सुनवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश कर चुकी है और अब मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी। दूसरी ओर अमायरा का परिवार अब भी इस उम्मीद में है कि अदालत सभी तथ्यों की गहराई से समीक्षा करेगी और मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी।





























