Kishanganj Murder Case: बिहार के किशनगंज जिले में एक ऐसा हत्याकांड सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। एक घर में पति की मौत का मातम था। पत्नी हर आने-जाने वाले के सामने आंसू बहा रही थी और दावा कर रही थी कि घर में घुसे चोरों ने उसके पति की हत्या कर दी। लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस दुखी पत्नी की कहानी पर सवाल उठने लगे। आखिरकार महज 36 घंटे के अंदर पुलिस ने इस मामले से पर्दा उठा दिया और जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी को हैरान कर दिया।
घर में मिला था पति का शव, चोरी की कहानी पर हुआ शक|Kishanganj Murder Case
यह मामला 4 जुलाई 2026 का है। किशनगंज जिले के बिशनपुर थाना क्षेत्र में 42 वर्षीय रिजवान आलम अपने घर में मृत पाए गए थे। उनके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किए जाने के कई गंभीर निशान थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतक के पिता नजीर आलम ने बिशनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देश पर एसडीपीओ खुसरू सिराज के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया गया। जांच में एफएसएल टीम और जिला आसूचना इकाई को भी शामिल किया गया।
शुरुआत में घटनास्थल को इस तरह पेश किया गया था, जैसे चोरी के दौरान रिजवान की हत्या हुई हो। कमरे में सामान बिखरा हुआ था और मोबाइल फोन गायब थे। लेकिन पुलिस को जांच के दौरान कई ऐसी बातें मिलीं, जो इस कहानी से मेल नहीं खा रही थीं।
पत्नी के बदलते बयानों ने बढ़ाया शक
पुलिस की पूछताछ में मृतक की पत्नी डेजी परवीन के बयान बार-बार बदल रहे थे। कभी वह कुछ और जानकारी देती तो कभी उसकी बातों में अंतर दिखाई देता। यही वजह रही कि पुलिस का शक धीरे-धीरे डेजी पर गहराने लगा। इसके बाद पुलिस ने डेजी के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि घटना से पहले और बाद तक डेजी गांव के ही रहने वाले 24 वर्षीय अनवर हुसैन के लगातार संपर्क में थी।
मोबाइल लोकेशन और वैज्ञानिक जांच से पुलिस को संकेत मिले कि हत्या के पीछे किसी बड़ी साजिश की संभावना है। इसके बाद पुलिस ने डेजी और अनवर को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की।
9 साल पुराने रिश्ते ने लिया खतरनाक मोड़
पूछताछ में पुलिस के अनुसार, डेजी परवीन और अनवर हुसैन के बीच करीब 9 साल से प्रेम संबंध थे। बताया गया कि अनवर पहले रिजवान के घर में बने लॉज में रहा करता था। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता करीबियों में बदल गया। बाद में अनवर काम के सिलसिले में बाहर चला गया, लेकिन दोनों मोबाइल के जरिए लगातार संपर्क में रहे। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि रिजवान को दोनों के रिश्ते की जानकारी हो गई थी और वह इसका विरोध करने लगा था।
जांच में यह भी सामने आया कि शादी के महज 13 दिन बाद ही रिजवान रोजी-रोटी कमाने के लिए कुवैत चला गया था। करीब 13 साल बाद वह वापस लौटा। इस दौरान पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ती गई और डेजी का अनवर के साथ रिश्ता मजबूत होता चला गया।
रॉड से हमला कर हत्या, फिर रची चोरी की कहानी
पुलिस के मुताबिक, डेजी और अनवर ने मिलकर रिजवान को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। वारदात वाली रात डेजी ने कथित तौर पर घर का दरवाजा खुला छोड़ दिया और अलग मोबाइल से अनवर को बुलाया। जब रिजवान गहरी नींद में था, तभी अनवर घर पहुंचा और लोहे की रॉड से उसके सिर पर कई वार कर दिए। हमले में रिजवान की मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद दोनों ने मामले को चोरी का रूप देने की कोशिश की। कमरे का सामान बिखेर दिया गया ताकि पुलिस को लगे कि चोरों ने वारदात को अंजाम दिया है। इसके बाद मृतक का मोबाइल और डेजी का मोबाइल लेकर दोनों वहां से निकल गए। पुलिस के अनुसार, दोनों मोबाइल फोन को गांव की बांसबाड़ी में जमीन के अंदर छिपा दिया गया, जबकि हत्या में इस्तेमाल लोहे की रॉड को नदी में फेंक दिया गया था।
तकनीकी जांच से खुला पूरा मामला
हालांकि आरोपियों की यह योजना ज्यादा समय तक छिप नहीं सकी। पुलिस ने कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य जांच के आधार पर पूरी कड़ी जोड़ ली। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सबूतों के सामने उनकी कहानी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। आखिरकार दोनों ने हत्या की साजिश और वारदात को स्वीकार कर लिया।
प्रभारी पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल लोहे की रॉड नदी से बरामद कर ली गई है। इसके अलावा बांसबाड़ी में जमीन के अंदर छिपाए गए मृतक और डेजी के मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए
पुलिस ने डेजी परवीन (33) और अनवर हुसैन (24), दोनों निवासी बिशनपुर थाना क्षेत्र, किशनगंज को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों को केस डायरी में शामिल किया जाएगा। इस पूरे मामले के खुलासे में एसडीपीओ खुसरू सिराज के नेतृत्व वाली टीम की अहम भूमिका रही। जांच टीम में डीआईयू प्रभारी मुश्ताक, कोचाधामन थानाध्यक्ष इंजहार आलम, बिशनपुर थानाध्यक्ष अनिल तिवारी सहित कई पुलिसकर्मी शामिल रहे।
किशनगंज में पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
किशनगंज में यह पहला मामला नहीं है जिसने लोगों को झकझोर दिया हो। इससे पहले 3 मार्च को पुनास गांव के एहसान रजा की हत्या का मामला भी चर्चा में आया था। वह विदेश से कमाई कर लौटे थे और पत्नी से मिलने ससुराल जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में उस मामले में भी पत्नी और उसके कथित प्रेमी की साजिश सामने आई थी।
































