Indirapuram: क्या गाजियाबाद का प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? या फिर मामला कुछ और है? ये नज़ारा है इंदिरापुरम के ज्ञान खंड 4 गुरुद्वारा के ठीक सामने का। जहाँ पिछले 3 सालों से इन नीले टिन के डब्बों से आधी जमीन और मुख्य सड़क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। आमतौर पर ऐसे नीले टिन के शेड तब लगाए जाते हैं जब वहाँ कोई निर्माण कार्य चल रहा हो, लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं हो रहा। यह सिर्फ सड़क हड़पने की एक साज़िश है।
क्या सो रहा है GDA और नगर निगम?
जैसा कि आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि यह शख्स अभी बाल-बाल बचा है! क्योंकि इस अवैध अतिक्रमण के कारण आगे से आने वाली गाड़ियां बिल्कुल नजर नहीं आतीं।
इंदिरापुरम में रसूखदारों का अतिक्रमण बना जानलेवा! प्रशासन मौन क्यों?
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हैरानी की बात यह है कि आस-पास कई घर बने हुए हैं, लेकिन सभी नियमों के दायरे में हैं। वहीं दूसरी तरफ, इस अवैध कब्जे और दुर्घटना की आशंका को लेकर जब इन कब्जाधारियों को समझाने की कोशिश की जाती है, तो ये हमेशा लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। जंग लगे हुए ये जर्जर टिन इतने खतरनाक हो चुके हैं कि ये कभी भी गिर सकते हैं, और कई बार गिर भी चुके हैं! इस अतिक्रमण की वजह से यहाँ आए दिन हादसे हो रहे हैं, लोग चोटिल हो रहे हैं, लेकिन GDA और नगर निगम चैन की नींद सो रहे हैं।
आखिर किस बात का इंतजार?
सवाल यह उठता है कि क्या सियासत और रसूख की धौंस दिखाकर कोई कुछ भी कर सकता है? क्या कानून के हाथ इन रसूखदारों के कॉलर तक नहीं पहुँचते? GDA के प्रवर्तन दल को हर छोटी दुकान का अवैध छज्जा तो तुरंत दिख जाता है, लेकिन सालों से सड़क घेरे बैठा यह विशालकाय अवैध कब्जा क्यों नहीं दिखाई देता?
क्या यह प्रशासनिक अंधापन है या जानबूझकर मूंदी गई आँखें? जब इस जर्जर टिन की वजह से यहाँ लगातार हादसे हो रहे हैं, तो नगर निगम और GDA किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं? क्या जब तक यहाँ किसी मासूम की जान नहीं जाएगी, तब तक सरकारी फाइलों में हलचल नहीं होगी?
पॉश इलाकों का यह हाल!
जनता हर साल ईमानदारी से टैक्स भरती है ताकि उन्हें साफ़ और सुरक्षित सड़कें मिलें। तो क्या जनता के टैक्स के पैसों का इनाम प्रशासन हमें हादसों और इस जानलेवा अतिक्रमण के रूप में दे रहा है? इंदिरापुरम (Indirapuram) को गाजियाबाद का एक पॉश इलाका कहा जाता है, तो क्या यहाँ रसूखदारों को सड़क हड़पने की खुली छूट मिली हुई है? क्या GDA का कानून सिर्फ गरीबों के ठेले-खोंचे हटाने के लिए ही बना है?
अधिकारियों की यह खामोशी साफ़ इशारा कर रही है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है! अगर प्रशासन में थोड़ी भी जिम्मेदारी बची है, तो इस अवैध टिन शेड से सड़क को कब्जामुक्त करे और यहाँ होने वाले हादसों को रोके!












































