Trump Government: दिल्ली से वाशिंगटन तक कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज है! हाल ही में सामने आई अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि मई-जून के बीच भारत सरकार और अमेरिकी प्रशासन के बीच 8 बड़ी फोन कॉल्स हुईं। ट्रंप के बेहद करीबी जेसन मिलर की फर्म के जरिए कराई गई इन बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री, ट्रेजरी सेक्रेटरी और व्हाइट हाउस के दिग्गजों को शामिल किया गया था। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं क्या था इस ‘करोड़ों के डील’ के पीछे का पूरा मामला
इस खुलासे से जुड़ी मुख्य बातें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) के करीबी जेसन मिलर की लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC ने अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल अपनी ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा किया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, मई और जून 2026 के दौरान वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास (भारत सरकार) और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच 8 बार फोन कॉल्स का आयोजन किया गया था। इन कॉल्स का मुख्य उद्देश्य “भारत-अमेरिका संबंधों” और नीतिगत मामलों पर चर्चा करना था।
किन अधिकारियों से हुई बातचीत?
• मई में अमेरिकी विदेश मंत्री (Secretary of State) मार्को रुबियो के भारत दौरे से ठीक पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, डिप्टी एनएसए माइकल नीधम और अंडर सेक्रेटरी (टेररिज्म एंड फाइनेंशियल इंटेलिजेंस) जीन लैंग के साथ कॉल्स अरेंज की गईं।
• जून में मार्को रुबियो के दौरे के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमिसन ग्रीर, नीति सलाहकार वॉकर बैरेट और व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन चेउंग के साथ बातचीत कराई गई।
लाखों डॉलर का था यह Contract
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस लॉबिंग फर्म को $150,000 (लगभग 1.25 करोड़ रुपये) प्रति माह के भुगतान पर रणनीतिक सलाह, नीतिगत मामलों और अमेरिकी सरकार, कांग्रेस व थिंक टैंक के साथ संबंध मजबूत करने के लिए नियुक्त किया था।
बता दें कि यह अनुबंध पहली बार अप्रैल 2025 में हुआ था और इसे अप्रैल 2026 में एक साल के लिए रिन्यू (नवीनीकृत) किया गया था।
क्यों खत्म हुई डील
जेसन मिलर के ट्रंप प्रशासन में “विशेष सरकारी कर्मचारी” (Special Government Employee) के रूप में शामिल होने के कारण 23 जून 2026 को यह अनुबंध समय से पहले समाप्त कर दिया गया था।
लॉबिंग क्यों की जाती है?
अमेरिका में लॉबिंग पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया है। इसके तहत विभिन्न देशों की सरकारें या संगठन वाशिंगटन में अपने हितों—जैसे व्यापारिक समझौतों, टैरिफ (Taxes) और रणनीतिक साझेदारी—को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी प्रशासन के करीबियों या विशिष्ट फर्मों की सेवाएं लेते हैं।
भारत के अलावा पाकिस्तान और दुनिया के कई अन्य देश भी अमेरिकी नीतियों को अपने पक्ष में करने के लिए ऐसी लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लेते रहे हैं।












































