गोधरा हत्याकांड में दोषियों की रिहाई पर गुजरात सरकार का विरोध : Godhra Train Burning

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 03 दिसम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 03 दिसम्बर 2022, 05:30 AM
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गोधरा कांड में दोषियों की रिहाई पर भड़की गुजरात सरकार 

Godhra Train Burning:  2002 के गोधरा ट्रेन आगजनी (Godhra Train Burning) मामले में गुजरात (Gujarat) सरकार ने कुछ दोषियों की जमानत याचिकाओं का उच्चतम न्यायालय  (Supreme Court)में विरोध किया है। सरकार का कहना है कि वे केवल पथराव करने में शामिल नहीं थे बल्कि उनकी हरकतों ने लोगों को जलती हुई बोगी में ही रोक डियाक था। 27 फरवरी, 2002 को गोधरा (Godhra) में साबरमती एक्सप्रेस (Sabarmati Express) के एस-6 कोच में आग लगने से 59 लोगों की जान चली गई थी, जिसके कारण राज्य में दंगे भड़क गए थे।

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17-18 साल से जेल में बंद

सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में 15 दोषियों को रिहा किया था जिसका राज्य सरकार विरोध कर रही है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि, “आरोपी 17-18 साल से जेल में बंद हैं।” गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि, “इन दोषियों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके जिससे लोग जलते डिब्बे से बच नहीं पाए। उन्होंने पीठ से कहा कि यह केवल पथराव का ही मामला नहीं है।”

  • आग लगाने के बाद कोच पर पत्थर बरसाए

तुषार मेहता ने आगे कहा, “बदमाशों द्वारा S6 कोच में आग लगाए जाने के बाद, आरोपियों ने कोच पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया था जिस कारण यात्री अपनी जान बचाने के लिए जलते हुए कोच से बाहर ना निकल सके और न ही कोई बाहर से उन्हें बचाने के लिए जा सका,” उन्होंने अदालत से अनुरोध किया की हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सभी अपीलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, जिससे उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा जा सके। 

प्रत्येक दोषियों की भूमिका की जांच करेगी  सरकार

तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि हर दोषियों की भूमिका की जांच की जाएगी और अदालत को इसकी सूचना दी जाएगी। अगर इनमे से किसी का अपराध छोटा हो तो जमानत पर रिहा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 15 दिसंबर को अपने विचार प्रस्तुत करने की अनुमति दी। 

अदालत ने मौत की सजा को बदला था उम्रकैद में 

इससे पहले 2017 के अक्टूबर में उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गोधरा ट्रेन जलाने के मामले में 11 दोषियों के मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। उस समय इस मामले में 20 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी जिसे अदालत ने बरकरार रखा था। वहीं दूसरी तरफ 11 नवंबर को शीर्ष अदालत ने एक दोषी को दी गई अंतरिम जमानत की अवधि 31 मार्च, 2023 तक बढ़ा दी थी।

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