छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज में चार नवजात की मौत, अस्पताल का वेंटिलेटर हो गया था बंद

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 दिसम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 05 दिसम्बर 2022, 05:30 AM
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छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज में चार नवजात की मौत

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के अस्पताल से लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज (Ambikapur Medical College) में रविवार रात को वेटिंलेटर बंद हो जाने के कारण 4 नवजात बच्चों की अस्पताल में ही मौत हो गई।  हादसे के बाद बच्चों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

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बिजली जाने के बाद भी नहीं स्टार्ट हुआ जनरेटर

बताया जा रहा है कि घटना रविवार देर रात को हुई। रात में अचानक से अस्पताल की बिजली चली गई, जिस कारण अस्पताल का वेंटिलेटर बंद हो गया और चार बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद से अस्पताल में अफरा तफरी मच गई। इस घटना के बाद जिला कलेक्टर अस्पताल पहुंचे और रूम के अंदर अस्पताल प्रबंधन के साथ निरीक्षण किया। वहाँ उपस्थित लोगों ने आरोप लगते हुए कहा कि राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज के मातृ शिशु अस्पताल में बीती रात करीब 4 घंटे तक लाइट नहीं थी और इस दौरान अस्पताल में  जनरेटर भी नहीं चालू किया गया।

46 नवजात बच्चे थे वार्ड में भर्ती

मीडिया ख़बरों के मुताबिक, अंबिकापुर के राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कालेज के एमसीएच में एसएनसीयू वार्ड भी है। वार्ड में घटना के समय 46 नवजात बच्चे भर्ती थे। इन बच्चों में से अधिकतर बच्चे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इस दौरान रविवार देर रात करीब दो से चार घंटे के लिए बिजली काट गई। जिस वजह से वहां लगे वेंटिलेटर और अन्य मशीनें बंद हो गईं, और यहां तक की अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई भी प्रभावित हुई।

मामले की जांच शुरू

कुंदन कुमार जो की अंबिकापुर जिला कलेक्टर हैं, उन्होंने कहा कि, “डॉक्टरों के अनुसार 4-5 घंटों के दौरान 4 बच्चों की मौत हुई है। वहाँ काम कर रहे डॉक्टरों ने बताया है कि अस्पताल में बिजली जाने से ये घटना नहीं हुई है और ना ही इसके कारण वेंटिलेटर बंद हुआ।” डॉक्टरों ने यह भी बताया कि बच्चों पहले से ही गंभीर स्थिति में थे। कुंदन कुमार ने आगे कहा, हम जांच करा रहे हैं, अगर वेंटिलेटर बंद हुए हैं, तो वह भी सामने आ जाएगा और अस्पताल को इसका जवाब भी देना पड़ेगा।

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