Edible Oil Rules: अगर आप घर के लिए सरसों, सोयाबीन, रिफाइंड या अन्य खाद्य तेल खरीदते हैं, तो अगली बार बाजार जाने पर आपको एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने खाने के तेल की पैकेजिंग को लेकर नया नियम लागू करने का फैसला किया है। इस नियम के तहत अब देश में बिकने वाले अधिकांश खाद्य तेल केवल सरकार द्वारा तय किए गए 9 मानक पैक साइज में ही बेचे जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अलग-अलग ब्रांडों के उत्पादों की कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी।
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क्या है सरकार का नया नियम? Edible Oil Rules
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कानूनी माप विज्ञान (लीगल मेट्रोलॉजी) नियमों में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब खाद्य तेल बनाने वाली कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी आकार के पैक बाजार में नहीं बेच पाएंगी। उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित मानक पैकेजिंग साइज का पालन करना होगा। यह नियम सिर्फ देश में निर्मित खाद्य तेलों पर ही नहीं, बल्कि विदेशों से आयात किए जाने वाले खाद्य तेलों पर भी लागू होगा। सरकार का मानना है कि एक समान पैकेजिंग व्यवस्था से ग्राहकों को खरीदारी के दौरान बेहतर जानकारी मिलेगी।
अब इन 9 साइज में मिलेगा खाद्य तेल
नए नियम के तहत खाने का तेल मुख्य रूप से निम्नलिखित पैक साइज में उपलब्ध होगा—
- 200 मिलीलीटर
- 500 मिलीलीटर
- 1 लीटर
- 2 लीटर
- 3 लीटर
- 4 लीटर
- 5 लीटर
- 15 लीटर
- 20 लीटर
सरकार का कहना है कि मानक पैक साइज तय होने से ग्राहकों के लिए विभिन्न कंपनियों के उत्पादों की कीमतों और मात्रा की तुलना करना आसान हो जाएगा।
किन-किन तेलों पर लागू होगा नियम?
यह नया नियम देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- पाम ऑयल
- सोयाबीन ऑयल
- सनफ्लावर ऑयल
- सरसों का तेल
- मूंगफली का तेल
- तिल का तेल
- राइस ब्रान ऑयल
- कॉटनसीड ऑयल
- मक्का ऑयल
यानी आम रसोई में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश खाद्य तेल अब इसी नई व्यवस्था के तहत बाजार में उपलब्ध होंगे।
पैकेट पर वजन लिखना भी होगा अनिवार्य
सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कंपनियों को पैक पर तेल की मात्रा के साथ उसका वजन भी बताना होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी पैक पर 1 लीटर तेल लिखा है, तो उसके बराबर का वजन भी किलोग्राम में दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को उत्पाद की सही और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे खरीदारी के समय बेहतर निर्णय ले सकें।
छोटे पैक को मिली राहत
हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस नियम से छूट भी दी है। 200 मिलीलीटर से छोटे पैक और कुछ विशेष श्रेणी के खाद्य तेल उत्पादों को नए नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे कम कीमत वाले छोटे पैक बाजार में उपलब्ध रहेंगे और कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कंपनियों को मिला 3 महीने का समय
नए नियमों को लागू करने के लिए निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को तीन महीने की संक्रमण अवधि दी गई है। इस दौरान कंपनियां अपनी पैकेजिंग, लेबलिंग और वितरण व्यवस्था में आवश्यक बदलाव कर सकेंगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी चाहती है तो वह निर्धारित समय सीमा से पहले भी इन नियमों को लागू कर सकती है।
ग्राहकों को क्या होगा फायदा?
सरकार के अनुसार, एक समान पैक साइज होने से उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न ब्रांडों के तेल की कीमतों की तुलना करना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा। इससे खरीदारी के दौरान होने वाला भ्रम कम होगा और ग्राहक अपने बजट तथा जरूरत के अनुसार सही उत्पाद का चयन कर सकेंगे।



























