जंतर-मंतर पर एक दिन के प्रदर्शन से कॉकरोच जनता पार्टी कितनी मजबूत हुई? Cockroach Janta Party Protest

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 07 Jun 2026, 11:25 AM | Updated: 07 Jun 2026, 11:25 AM

Cockroach Janta Party Protest: सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक व्यंग्यात्मक अभियान अब सड़कों तक पहुंच चुका है। शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में असंतोष गहराता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने के साथ ही दिनभर चला प्रदर्शन देर शाम समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।

अमेरिका से दिल्ली पहुंचते ही अभिजीत दीपके ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उनका आरोप था कि इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा घोटालों और उससे जुड़े तनाव के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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ऑनलाइन अभियान से शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’| Cockroach Janta Party Protest

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कुछ सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। यह अभियान उस टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर कुछ ‘फेक डिग्री वाले युवाओं’ की तुलना कॉकरोच से की गई थी। इस टिप्पणी के विरोध में युवाओं ने ‘कॉकरोच’ शब्द को ही प्रतिरोध के प्रतीक में बदल दिया।

देखते ही देखते इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर इस अभियान को व्यापक समर्थन मिलने लगा। कुछ ही दिनों में इसके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच गई और यह एक डिजिटल आंदोलन से आगे बढ़कर वास्तविक जनसमर्थन जुटाने में सफल दिखाई दिया।

जंतर-मंतर पर जुटी हजारों की भीड़

शनिवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे अभिजीत दीपके एयरपोर्ट से प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े, समर्थकों की संख्या भी बढ़ती गई। उनके पहुंचने तक करीब दो से तीन हजार लोग वहां मौजूद बताए गए। मंच से संबोधित करते हुए दीपके ने कहा कि पिछले कई दिनों से लोग सवाल उठा रहे थे कि सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से क्या बदलाव आएगा। उन्होंने भीड़ की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह जवाब उन सभी लोगों के लिए है जो इस आंदोलन को हल्के में ले रहे थे।

उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में लाखों छात्र इस मुहिम से जुड़ेंगे। उनके मुताबिक यह कोई योजनाबद्ध राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि उन युवाओं की आवाज है जो मौजूदा व्यवस्था से निराश और नाराज हैं।

शिक्षा और रोजगार को बनाया मुख्य मुद्दा

अपने भाषण में अभिजीत दीपके ने शिक्षा और रोजगार के सवालों को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि वर्षों से युवाओं को धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दों में उलझाया गया, लेकिन इससे न तो नौकरियां बढ़ीं और न ही युवाओं की समस्याएं कम हुईं। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उनका सवाल था कि जब सरकार परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से नहीं करा पा रही है, तो युवाओं का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

दीपके ने भावुक अंदाज में कहा कि उनकी मां को डर था कि सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछना किसी भी नागरिक का अधिकार है।

युवाओं में दिखा भारी आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं में खासा गुस्सा देखने को मिला। बड़ी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राएं शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे थे। कई युवाओं का कहना था कि देश में रोजगार का संकट पहले से मौजूद है, ऊपर से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताएं उनकी उम्मीदों को और कमजोर कर रही हैं। प्रदर्शन में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। उनके शामिल होने को आंदोलन के लिए नैतिक समर्थन के रूप में देखा गया।

विपक्षी दलों ने दिया समर्थन

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को विपक्षी राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला। समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए युवाओं की आवाज को बदलाव का संकेत बताया। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बयान जारी कर कहा कि नीट पेपर लीक ने लाखों छात्रों के सपनों को तोड़ा है और अब वही युवा अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस संदेश को गंभीरता से लेने की अपील की।

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने का स्वागत किया। वहीं राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन कर रहे युवाओं के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

सरकार ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों दी?

इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह सवाल भी चर्चा में रहा कि आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्त रुख अपनाने वाली सरकार ने इस बार इतनी आसानी से अनुमति क्यों दी। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक स्मिता गुप्ता का मानना है कि सरकार इस आंदोलन की वास्तविक ताकत और जनसमर्थन को परखना चाहती थी। उनके अनुसार, पेपर लीक ऐसा मुद्दा है जो लगभग हर परिवार को प्रभावित करता है, इसलिए सरकार ने टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय आंदोलन को सीमित दायरे में अभिव्यक्ति का अवसर दिया।

उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच बेरोजगारी और भविष्य को लेकर बेचैनी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा कोई भी मुद्दा व्यापक जनसमर्थन हासिल कर सकता है।

क्या राजनीतिक ताकत बन पाएगी सीजेपी?

कॉकरोच जनता पार्टी के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोग इसे युवाओं के गुस्से का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शरद गुप्ता का कहना है कि जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन व्यवस्था के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत है। हालांकि उनका मानना है कि सीजेपी से जुड़े लोग अभी राजनीतिक रूप से अनुभवहीन हैं और फिलहाल इसे एक संगठित राजनीतिक दल के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत में कई बड़े आंदोलन समय के साथ राजनीतिक रूप ले चुके हैं। इसलिए भविष्य में इस मंच की दिशा क्या होगी, यह आने वाले समय में उसके नेतृत्व, संगठन और जनसमर्थन पर निर्भर करेगा।

फिलहाल इतना जरूर है कि जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों और युवाओं की नाराजगी को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन कितना बड़ा आकार लेता है, इस पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों वर्गों की नजर बनी रहेगी।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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