LPG LNG Crude Supply: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मई महीने में देश के कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और एलपीजी (LPG) आयात में सुधार के संकेत मिले हैं। मार्च और अप्रैल के दौरान सप्लाई बाधित होने से जो दबाव बना था, उससे अब धीरे-धीरे उबरने की तस्वीर दिखाई दे रही है।
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत का कच्चे तेल का आयात मई में बढ़कर करीब 49 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इससे पहले मार्च और अप्रैल में यह आंकड़ा लगभग 45 लाख बैरल प्रतिदिन था। हालांकि यह अभी भी फरवरी में दर्ज 52 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से नीचे है, जिससे साफ है कि सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
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रूस ने निभाई सबसे बड़ी भूमिका| LPG LNG Crude Supply
भारत के लिए सबसे बड़ी राहत रूस से लगातार बनी हुई सप्लाई रही। रूस मई में भी भारत को कच्चा तेल भेजने वाला सबसे बड़ा देश बना रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते बाजार हालात के बावजूद रूस ने भारत को स्थिर सप्लाई उपलब्ध कराई। विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए कई कारणों से आकर्षक बना हुआ है। इसकी कीमत अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी है, उपलब्धता स्थिर रहती है और लॉजिस्टिक व्यवस्था भी लचीली मानी जाती है।
मई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर रहा। इसके बाद सऊदी अरब, ब्राजील और वेनेजुएला का स्थान रहा। दूसरी ओर इराक और कुवैत से सप्लाई में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
होर्मुज संकट के बीच भारत की रणनीति काम आई
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से लगातार खरीदारी ने भारत को होर्मुज स्ट्रेट के आसपास उत्पन्न सप्लाई बाधाओं के असर से काफी हद तक बचाया। साथ ही भारत को अटलांटिक क्षेत्र के उत्पादकों से महंगे दामों पर तेल खरीदने की जरूरत भी कम पड़ी। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह रणनीति भारत के लिए फायदेमंद साबित हुई है।
LPG सप्लाई में भी दिखा सुधार
एलपीजी के मोर्चे पर भी मई में स्थिति पहले की तुलना में बेहतर रही। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली सप्लाई पर दबाव बना रहा क्योंकि होर्मुज मार्ग पर शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। इसका असर यह हुआ कि जनवरी और फरवरी में जहां भारत हर महीने 20 लाख टन से अधिक एलपीजी आयात कर रहा था, वहीं मार्च से मई के बीच यह घटकर करीब 10 से 12 लाख टन प्रति माह रह गया।
हालांकि भारत ने समय रहते वैकल्पिक इंतजाम कर लिए। अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ाया गया, घरेलू उत्पादन को मजबूत किया गया और मांग प्रबंधन के जरिए सप्लाई की कमी को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया। इसका फायदा यह हुआ कि देशभर में रसोई गैस की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
LNG आयात में भी मजबूती
लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के क्षेत्र में भी भारत की स्थिति मजबूत बनी रही। आयात और घरेलू उत्पादन के संयुक्त प्रयासों से गैस भंडार पर्याप्त स्तर पर बनाए रखने में सफलता मिली। दिलचस्प बात यह है कि हाल के महीनों में भारत के LNG आयात में कतर की हिस्सेदारी कुछ कम हुई है। इसके विपरीत अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से सप्लाई बढ़ी है। इससे भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का फायदा मिला है।
आगे क्या है चुनौती?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत ने विभिन्न स्रोतों से खरीद, बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट और वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क के जरिए स्थिति को संभाल लिया है। लेकिन अगर पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधाएं लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो भारत की निर्भरता रूस, अमेरिका, अफ्रीकी देशों और लैटिन अमेरिकी बाजारों पर और बढ़ सकती है।
फिलहाल मई के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में सफलता हासिल की है और सप्लाई संकट के बीच भी ईंधन उपलब्धता को बनाए रखा है।































