Save Cauvery: पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘सेव सॉयल- कावेरी कॉलिंग’ अभियान लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है। इस पहल के तहत अब तक 13.4 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं, जबकि 2.6 लाख से अधिक किसानों को पेड़-आधारित खेती अपनाने में सहयोग दिया गया है। अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2026-27 में 1.2 करोड़ नए पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि कावेरी नदी के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयासों को और गति दी जा सके।
सद्गुरु की परिकल्पना पर आधारित ‘कावेरी कॉलिंग’ एक किसान-नेतृत्व वाला पर्यावरणीय अभियान है, जिसका उद्देश्य कावेरी नदी को पुनर्जीवित करना और किसानों की आमदनी में स्थायी सुधार लाना है। विशेषज्ञों के अनुसार कावेरी नदी पिछले कई दशकों से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बीते 70 वर्षों में इसके जल प्रवाह में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि नदी क्षेत्र का मूल वृक्ष आवरण करीब 87 प्रतिशत तक खत्म हो चुका है।
242 करोड़ पेड़ लगाने का बड़ा लक्ष्य| Save Cauvery
इस चुनौती से निपटने के लिए अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य निजी कृषि भूमि पर 242 करोड़ पेड़ लगवाना है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, भूजल स्तर बेहतर होगा और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिलेगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘सेव सॉयल- कावेरी कॉलिंग’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद एथिराजालु ने कहा कि 13 करोड़ से अधिक पेड़ सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह उन 2.6 लाख किसानों की सोच और मेहनत का प्रतीक है, जिन्होंने पारंपरिक मोनोकल्चर खेती से निकलकर पेड़-आधारित खेती को अपनाया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कावेरी नदी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान और नीति निर्माता मिलकर किस तरह प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में काम करते हैं।
खेती का बदला तरीका, बढ़ी आमदनी
आनंद एथिराजालु ने बताया कि ‘कावेरी कॉलिंग’ व्यापक ‘सेव सॉयल’ अभियान की तीन प्रमुख पहलों में से एक है। दूसरी पहल ‘सेव सॉयल रीजनरेटिव रेवोल्यूशन’ है, जो किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तौर-तरीके सिखाती है। वहीं तीसरी पहल ‘सेव सॉयल फार्मर्स मूवमेंट’ है, जिसके जरिए किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) से जोड़ा जाता है ताकि उनकी बाजार तक पहुंच और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कम जुताई, मल्चिंग और कवर क्रॉपिंग जैसी तकनीकों को अपनाने से खेत की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर बढ़ा है। साथ ही नारियल आधारित एकल खेती को बहु-स्तरीय ‘फूड फॉरेस्ट’ में बदलने से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
उनके अनुसार, लकड़ी, फल और मसाला फसलों को एक साथ उगाने से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई है। इतना ही नहीं, खेत अब सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का भी बेहतर तरीके से सामना कर पा रहे हैं। इन बदलावों के कारण पिछले कुछ वर्षों में उनकी आय छह गुना तक बढ़ी है।
एशिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट नर्सरी
इस अभियान की सफलता के पीछे पौधों की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण कारण है। तमिलनाडु के कुड्डालोर में स्थित एशिया की सबसे बड़ी ‘सिंगल-साइट नर्सरी’ इस अभियान का प्रमुख केंद्र है। पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित इस नर्सरी की क्षमता 85 लाख पौधे तैयार करने की है।
इसके अलावा तिरुवन्नामलाई में मौजूद दूसरी नर्सरी हर साल 15 लाख पौधे तैयार करती है। ये दोनों नर्सरियां तमिलनाडु और कर्नाटक के कुल 53 वितरण केंद्रों तक पौधे पहुंचाती हैं। अभियान के तहत किसानों को 54 प्रकार के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें सागौन, लाल चंदन, रोजवुड और महोगनी जैसी 29 मूल्यवान लकड़ी प्रजातियां शामिल हैं। लकड़ी के पौधे किसानों को सिर्फ 5 रुपये प्रति पौधा और फल-फूल वाले पौधे 10 रुपये प्रति पौधा की रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
तकनीकी सहायता से किसानों को मिल रहा फायदा
अभियान ने जमीनी स्तर पर किसानों की मदद के लिए 200 से अधिक फील्ड एग्जीक्यूटिव तैनात किए हैं। सिर्फ 2025 के दौरान इन अधिकारियों ने 26,500 से अधिक खेतों का दौरा किया और किसानों को पौधारोपण से पहले और बाद तक मुफ्त तकनीकी सलाह दी। इसके अलावा 225 सक्रिय व्हाट्सऐप समूहों के जरिए 60 हजार से ज्यादा किसानों को लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। किसानों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है, जो सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक उपलब्ध रहती है और 24 से 48 घंटे के भीतर विशेषज्ञों की सलाह पहुंचाती है।
अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती को साथ लेकर चलने वाला यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
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