रियल लाइफ हीरो से ज्यादा सरकार से प्रभावित है बॉलीवुड, साउथ की 'कांतारा' और 'जय भीम' जैसी फिल्मे दिखाती है समाज और सरकार की गंदी सच्चाई

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 अक्टूबर 2022, 05:30 AM Updated: 29 अक्टूबर 2022, 05:30 AM
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रियल लाइफ हीरो से ज्यादा सरकार से प्रभावित है बॉलीवुड

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर हमेसा से ही दलितों के लिए एक रियल लाइफ हीरो रहे हैं। वहीं बॉलीवुड सिनेमा बाबा साहब से उतना प्रभावित नहीं दिखती। आज कल बॉलीवुड समाजिक मुद्दों से ज्यादा एंटरटेनमेंट की तरफ भागती दिखती है। वही दूसरी तरफ आप अगर साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की बात करे तो कम बजट में ही समाजिक मुद्दों पर सिनेमा बनाकर जनता के दिलो में अपनी तस्वीर गहरी करते जा रही है। साउथ इंडियन मूवी देखे तो आपको जय भीम और कांतारा (Kantara)जैसी फिल्मे मिलेंगी जो राष्ट्रवाद, रोमांस और आइटम नंबर से आगे, आम जनता कैसे राजनीति, अदालत और पुलिस के चक्कर में पीस रही है ये भी दिखाती है। साउथ की फिल्मे रियल लाइफ हीरो बाबा साहब से प्रभावित दिखती है, और समाज के जमीनी मुद्दों को … जैसे की हिन्दू जाति व्यवस्था में दलितों के साथ हो रहे अन्याय या फिर आज के दिन भी जो कानून और संविधान की समझ नहीं रखते वो कैसे सरकार और अदालत के बीच पिस्ते रहते है …. दिखाने में दिलचस्पी रखती है।

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कांतारा और जय भीम जैसी फिल्मे दिखाती हैं समाज की गहरी और भयानक सच्चाई

आज हम बात करेंगे कांतारा और जय भीम जैसी फिल्मों के बारे में जो हमारे समाज के गहरी और भयानक सच्चाई को दिखाती है। डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी (Rishabh Shetty) की फिल्म कांतारा सरकार, राजा के वंसज और आदिवासियों के बिच चल रहे एक लड़ाई का किस्सा है। पहले ऐसे फिल्म बॉलीवुड में भी दिखाई देती थी जो समाज के उन मुद्दों को भी उठाती थी जो सरकार को भी आइना दिखाने का काम करती थी। पहले ‘जाने भी दो यारो और रंग दे बसंती’ जैसी मूवी बॉलीवुड में दिखाई पड़ती थी पर अब बॉलीवुड एक तरीके से इन सब मामलों में मतलब की सरकार के खिलाफ कम ही बोलते दिखती है।

ऋषभ शेट्टी की कांतारा समाज के लिए है आइना

आप साउथ इंडियन फिल्म देखे तो वो ‘जय भीम’ और ‘कांतारा’ जैसी कम बजट की फिल्मे भी भी समय-समय पर बनती रहती है। ये फिल्मे सरकार, अदालत, और जनता के बीच के मुद्दे को गहराई से उठा रही है। हम आपको यहाँ कांतारा फिल्म के बारे में बता कर आपको spoiler नहीं देना चाहते पर अगर इस फिल्म का सार आपको बताये तो फिल्म में शिवा के किरदार में लीड रोल में आपको ऋषभ शेट्टी नजर आएंगे जो आदिवासियों और जंगल की परम्पाराओं के लिए लड़ते दिखेंगे। इस फिल्म में एंटरटेनमेंट के साथ समाज और आदिवासियों के जमीनी मुद्दों को जोड़ कर रखना आसान नहीं था, पर ऋषभ शेट्टी ने अपने निर्देशन और अदाकारी से इन दोनों चीजों को पूरे फिल्म में बहुत ही खूबसूरती से जोड़ कर रखा है।

इस फिल्म में जमीनी स्तर पर चल रहे जाति वर्ण की कुप्रथाओं को भी दिखाया गया है। जमींदार और सरकार, आदिवासी को किस तरह देखते है, इस फिल्म में साफ़ तौर पर दर्शाया गया है। कैसे पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ आदिवासियों का फायदा उठाते हैं ये भी इस फिल्म के जरिए काफी साफ़ करने की कोशिश की गई है।

अंबेडकर के नीतियों पर आधारित है जय भीम

वही अगर ‘जय भीम की बात करे तो कहानी है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की। ना सिर्फ आवाज उठाना बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचाने की भी। फिल्म की ये कहानी पूरी तरह से एक सच्ची घटना पर आधारित है। अगर आपने फिल्म देखि होगी तो आपको पता होगा की आखिर क्या है वो घटना, और अगर नहीं तो आपको जरूर एक बार ये फिल्म देखनी चाहिए। साउथ के सुपरस्टार सूर्या की इस फिल्म को ऑस्कर के आधिकारिक यूट्यूब चैनल परभी दिखाया गया है। इसी के साथ यह भारत की पहली ऐसी फिल्म बन गई है, जिसे ऑस्कर के यूट्यूब पर दिखाया गया है। आपको फिल्म के नाम से ही लग गया होगा की अंबेडकर के नीतियों पर आधारित होगी। जिसमे एक दलित, जो अगर किसी स्वर्ण के घर या मंदिर में घुस जाये तो हमारा समाज उस जगह का शुद्धिकरण पहले करता है। उस दलित या आदिवासी को इतनी बड़ी और पेचीदा न्यायपालिका में न्याय कैसे मिले ये ‘जय भीम’ जैसी फिल्मों ने बहुत गहराई से दिखाया है।

इस तरह की फिल्मे खोलती है समाज और बॉलीवुड की पोल

इस तरह की फिल्मे आजादी के 75 साल बाद सरकार, राजनितिक पार्टियां और न्याय पालिका के लिए आइना काम करती हैं। उन्हें और जनता को एक तस्वीर दिखाती है की हमारे स्वतंत्रा सेनानी, खास कर महात्मा गाँधी और बाबा साहब के भारत में आज भी दलितों और आदिवासियों की क्या स्थिति है। इस तरह की फिल्मे ये भी बताते है की आज भी अंबेडकर और दलितों को शायद पूरी तरह समाजिक न्याय नहीं मिल पा रहा है।

ये फ़िल्में बहुत ही कम बजट में बनाई गई मूवी है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर अभी तक कांतारा और जय भीम ने अपने बजट से 10 गुना ज्यादा की कमाई कर के ये साबित कर दिया है की जनता अब बड़े बजट की मूवी पर नहीं अटकेगी अब उसको भी दमदार स्टोरीलाइन चाहिए। इसका प्रमाण आपको इससे पता चल जायेगा की आमिर खान की बड़े बजट की फिल्म लाल सिंह चड्डा जैसी फिल्मों की IMDB रेटिंग्स क्या है और जय भीम या कांतारा जैसी छोटी बजट की समाजिक मुद्दों वाली फिल्म, की IMDB रेटिंग्स क्या है। इस फिल्म से बॉलीवुड भी बहुत कुछ सिख सकता है और अपने अंदर सुधार भी ला सकता है।

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