अगर पवार BJP के साथ आ गए तो विपक्ष ‘अनाथ’ हो जाएगा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 अप्रैल 2023, 05:30 AM Updated: 13 अप्रैल 2023, 05:30 AM
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BJP NCP Alliance – महाराष्ट्र की राजनीति से लेकर देश की राजनीति तक…शरद पवार (Sharad Pawar) एक ऐसे नेता हैं, जिनके वर्चस्व को कोई नकार नहीं सकता है. केंद्र सरकार में कई बार मंत्री रह चुके शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP बनाई थी और एक समय ऐसा भी आया कि राज्य में वो कांग्रेस पर भारी भी पड़े. मौजूदा समय में भी महाराष्ट्र में NCP के सामने कांग्रेस कहीं नहीं टिकती. राज्य में उद्धव नीत शिवसेना, कांग्रेस और NCP का गठबंधन है, जिसे आप महा विकास अघाड़ी के नाम से बेहतर जानते हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में ऐसी तमाम चीजें हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि शरद पवार राजनीतिक आंधी भांप गए हैं.

शायद यही कारण है कि कांग्रेस के तमाम मुद्दों की उन्होंने पिछले दिनों हवा निकाल दी. वहीं, उनके भतीजे अजित पवार, मोदी सरकार की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. लेकिन अगर ये चीजें आगे बढ़ती हैं और NCP, BJP के साथ आ जाती है तो लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) को लेकर तैयारियों में लगा विपक्ष चुनाव से पहले ही अनाथ हो जाएगा. कई नेताओं की महत्वाकांक्षाओं पर मिट्टी का तेल पड़ जाएगा, कई लोग अंदर ही अंदर धधक उठेंगे.

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यहां समझिए पूरी कहानी

दरअसल, महाराष्ट्र में 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में BJP और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था. वहीं, एनसीपी कांग्रेस के साथ मिलकर मैदान में उतरी थी. BJP-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था. लेकिन सीएम के पद को लेकर दोनों पार्टियों में विवाद हो गया था. इसके बाद BJP और शिवसेना की राह अलग अलग हो गई थीं. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी. एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद उद्धव सरकार गिर गई, लेकिन महाविकास अघाड़ी गठबंधन बरकरार रहा था, लेकिन अब इसमें फूट पड़ती दिख रही है.

चाचा-भतीजा दे रहे हैं विपक्ष को टेंशन

BJP NCP Alliance – हाल ही में शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन में पड़ रही रार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को इस रार की वजह बताया था. अजित पवार (Ajit Pawar) ने कहा था नाना पटोले द्वारा मीडिया में दिए जा रहे बयान अनावश्यक हैं. वे अघाड़ी में दरार पैदा करने वाले हैं. वे मीडिया में बयान क्यों देते हैं? अगर उनके पास सवाल हैं, तो वे मुझसे या उद्धव जी से बात कर सकते हैं.

वहीं, अगर हम शरद पवार की बात करें तो उन्होंने हाल ही में कांग्रेस और अन्य विपक्ष पार्टियों द्वारा मोदी सरकार पर उठाए जा रहे सवालों को ही ‘फर्जी’ बता दिया था. अजित पवार ने पीएम मोदी की तारीफ की थी और EVM को सही बताया था. उन्होंने कहा था, मुझे ईवीएम पर पूरा भरोसा है. कोई एक व्यक्ति ईवीएम में हेरफेर नहीं कर सकता है, यह एक बड़ी प्रणाली है. हारने वाली पार्टी ईवीएम को दोष देती है लेकिन यह लोगों का जनादेश है. उन्होंने कहा था, जिस पार्टी के केवल दो सांसद थे, उसने पीएम मोदी के नेतृत्व में साल 2014 में जनादेश से सरकार बनाई और देश के दूर-दराज वाले इलाकों में पहुंच गई तो क्या ये मोदी का करिश्मा नहीं है?

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सुप्रिया सुले ने की तारीफ

इनके अलावा शरद पवार की बेटी ने पिछले दिनों BJP और केंद्रीय मंत्रियों की तारीफ की थी. सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने BJP नेताओं की तारीफ करते हुए कहा, ”गडकरी अच्छा काम कर रहे हैं, जयशंकर जी का काम अच्छा है, रेलवे मंत्रालय के द्वारा भी अच्छे काम किए जा रहे हैं. लेकिन मेरा सामाजिक न्याय मंत्रालय से झगड़ा है. मंत्रालय द्वारा मेरे क्षेत्र के लिए आवश्यक सहायता प्रदान नहीं की जा रही है. हालांकि, यह व्यक्तिगत नहीं है. मैं अच्छे काम के लिए हमेशा आभार व्यक्त करती हूं.”

BJP ने दिया न्योता – BJP NCP Alliance

इन सारे अपडेट्स के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने एनसीपी के साथ गठबंधन से जुड़े सवाल पर कहा कि अगर राष्ट्रवादी, राष्ट्रवाद के साथ आना चाहें, तो क्या परेशानी है. हम खुद राष्ट्रवाद के साथ हैं. अच्छी बात है, अगर वो राष्ट्रवाद के तरफ आना चाहते हैं. उनका स्वागत करना चाहिए. देश के हित में अगर वो बात करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत करना चाहिए. अगर उद्धव के साथ नहीं जाकर वे (एनसीपी) जनतंत्र के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो उसमें हमें क्या दिक्कत होगी. रास्ता बड़ा है, एक कदम उन्हें बढ़ाने दीजिए, फिर देखते हैं, आगे क्या होगा?

विपक्षी एकता शुरु होने से पहले ही खत्म

ये हाल की खबरें हैं, जिसके बाद तमाम कयास लगाए जा रहे हैं. पूरी विपक्षी पार्टियां एकजुट होने का प्रयास कर रही है. राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने के बाद, कांग्रेस फिर से महागठबंधन में जान फूंकने की कोशिश कर रही है लेकिन इसकी संभावना कम ही नजर आती है. क्योंकि विपक्षी पार्टियां पहले से ही एकजुट नहीं है और दूसरी ओर विपक्ष में कई धड़े बन चुके हैं, जो लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) में BJP औऱ मोदी को टक्कर देने की बातें कर रहे हैं. कई पार्टियां कांग्रेस को अलग छोड़कर थर्ड फ्रंड की ओर बढ़ती दिख रही है.

वहीं, नीतीश कुमार जैसे कई नेता पीएम बनने की महत्वाकांक्षा पाले बैठे हुए हैं. नॉर्थ से लेकर साउथ तक के कई नेताओं की ऐसी महत्वाकांक्षाएं देखने को मिल चुकी है. इसकी कड़ी शरद पवार से भी जुड़ती है क्योंकि पवार विपक्ष के सबसे अनुभवी और मंझे हुए नेताओं में से एक हैं. लेकिन पवार की BJP के साथ बढ़ रही करीबी, कहीं न कहीं विपक्षी एकजुटता की हवा निकालते दिख रही है. इसके अलावा एनसीपी नेताओं का सीधे तौर पर कांग्रेस पर हमला, विपक्षी एकता का ढोल फोड़ते नजर आ रहा है.

ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले वर्ष 2019 में भी BJP और NCP (BJP NCP Alliance) एक साथ आए थे. अजित पवार (Ajit Pawar) को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था लेकिन उसके बाद एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना ने गठबंधन कर उद्धव ठाकरे को सीएम बनाया. हालांकि, सरकार गिर गई और BJP के समर्थन से एकनाथ शिंदे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. ऐसे में मौजूदा अपडेट्स इस ओर इशारा करते दिख रहे हैं कि जल्द ही महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ बड़ा देखने को मिल सकता है.

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