Baisakhi 2023 : जानिए क्यों मनाते हैं बैसाखी और क्या है इस त्योहार का महत्व

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 अप्रैल 2023, 05:30 AM Updated: 14 अप्रैल 2023, 05:30 AM
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History of Baisakhi: भारत को त्योहारों का देश माना जाता हैं क्योंकि हर धर्मों के कई सारे त्योहार इस देश में मनाए जाते हैं और इस वजह से भारत को त्योहारों की भूमि भी कहा जाता है. भारत देश में हर धर्म के अपने-अपने कुछ खास त्योहार हैं और हर त्यौहार को लेकर अपनी ही मान्यता है. पूरे साल भर भारत में इसी तरह त्योहारों का उत्सव चलता रहता है। वहीं शुक्रवार को देश में बैसाखी का त्योहार मनाया जा रहा है लेकिन कई लोगों को इस बात कि जानकारी नहीं होती है कि इस त्यौहार का क्या महत्व है और क्यों ये पर्व मनाया जाता है.

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जानिए क्यों मनाते हैं बैसाखी

बैसाखी सिखों का प्रमुख त्योहार है और इस त्योहार को बैसाख माह में पहले दिन मनाया जाता है. ये वो मौका होता है जब खेतों में फसल पक कर लहलहाती है और किसान अपनी मेहनत से आई फसलों को देखकर खुश होते हैं। मान्यता है कि इस खुशी का इजहार बैसाखी त्योहार को मनाकर करते हैं. वहीं बैसाखी को मनाए जाने का एक कारण यह भी है कि इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। बैसाखी का पर्व किसानों का खास त्योहार होता है और किसान भाई इसी दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान का शुक्रिया करते हैं। इतिहास के अनुसार , 1699 मे इसी दिन सिक्खों के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सिक्खों को खालसा के रूप मे संगठित किया था, यह भी इस दिन को खास बनाने का एक कारण है।

बैसाखी का क्या है महत्व

जहाँ सिख धर्म में इस दिन को खूब रौनक होती है तो वहीं हिंदू धर्म के लोग इस त्यौहार को बैसाखी के नववर्ष के रुप में भी मनाते हैं. इस दिन स्नान, भोग आदि लगाकर पूजा की जाती है. हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता यह भी है कि हजारों साल पहले मुनि भागीरथ कठोर तपस्या के बाद देवी गंगा को धरती पर उतारने में इसी दिन कामयाब हुए थे. इसलिये इस दिन हिंदू संप्रदाय के लोग पारंपरिक रूप से गंगा स्नान करने को भी पवित्र मानते हैं व देवी गंगा की स्तुति करते हैं. इस दिन पवित्र नदियोंं में स्नान का अपना अलग महत्व है.

कैसे मनाते हैं बैसाखी (History of Baisakhi)

इस त्योहार की तैयारी की दिनों पहले शुरू हो जाती है. वहीं इस दिन सुबह स्नान आदि के बाद सिक्ख लोग गुरुद्वारे जाते हैं। गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ होता है, कीर्तन आदि करवाए जाते हैं। नदी के किनारे मेले लगाए जाते हैं जिसमें भारी संख्या में लोग आते हैं। पंजाबी लोग इस दिन विशेष नृत्य भांगड़ा करते हुए खुशी मनाते हैं।.

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