Kerala Congress CJI post: चुनावी प्रक्रिया और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष और केंद्र के बीच जारी टकराव अब न्यायपालिका के दरवाजे तक पहुंच गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत द्वारा विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के नेताओं से मिलने से मना किए जाने के बाद केरल कांग्रेस के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया। केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीजेआई के इस्तीफे की मांग करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी कर दी। हालांकि चौतरफा घिरने और सहयोगी दलों तक की नाराजगी के बाद पार्टी को यह पोस्ट डिलीट करना पड़ा, लेकिन तब तक इस पर तीखा राजनीतिक संग्राम छिड़ चुका था।
‘अगर कानून-व्यवस्था नहीं संभलती तो इस्तीफा दें…’ क्या था विवादित पोस्ट? Kerala Congress CJI post
दरअसल, 11 अक्टूबर को सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं से मुलाकात का आवेदन ठुकरा दिया था। इसके बाद केरल कांग्रेस के हैंडल से पोस्ट किया गया, “डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपकी जिम्मेदारी नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपकी जगह ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करेंगे, जो इसे संभाल सके।”
इस पोस्ट के सामने आते ही सियासी हलकों में खलबली मच गई। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इसे न्यायपालिका की गरिमा को गिराने वाला करार देते हुए कड़ी निंदा की। बढ़ते दबाव के बीच केरल कांग्रेस ने पोस्ट हटा लिया, वहीं कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने तुरंत इससे किनारा कर लिया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दो टूक कहा कि पार्टी इस बयान से पूरी तरह असहमत है और न्यायपालिका पर उसका अटूट विश्वास है। खेड़ा ने कहा कि न्यायपालिका के सम्मान के चलते ही विपक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
बीजेपी का जोरदार पलटवार: ‘कांग्रेस का अगला निशाना न्यायपालिका’
केरल कांग्रेस के इस पोस्ट पर बीजेपी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वह पहले से कहते आ रहे हैं कि कांग्रेस का अगला निशाना देश की न्यायपालिका है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश कर रही है। वहीं बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे अराजक बताते हुए कहा कि कांग्रेस सीजेआई को धमका रही है और खुद को संविधान से ऊपर समझती है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीतिक गिरावट के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने सवाल किया कि कोई राज्य इकाई कैसे यह तय कर सकती है कि देश का नया चीफ जस्टिस कौन होगा।
सहयोगी दलों ने भी साधी दूरी
केरल कांग्रेस के इस रुख का INDIA ब्लॉक के भीतर भी विरोध दिखा। जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा कि जब कहीं सुनवाई नहीं होती, तो लोग न्यायपालिका का ही दरवाजा खटखटाते हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। वहीं सपा सांसद राजीव राय ने न्यायपालिका पर टिप्पणी से बचते हुए बस इतना कहा कि देश को गहरी निराशा हुई है। उधर, सीपीआई(एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि उनका संघर्ष चुनाव आयोग के अलोकतांत्रिक रवैये के खिलाफ जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और केरल विधानसभा में प्रस्ताव
इस बीच, राहुल गांधी की लीगल टीम ने चुनाव आयोग की कथित गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में अहम याचिका दाखिल कर दी है। दूसरी तरफ, केरल विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा पेश इस प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि बड़े पैमाने पर वैध वोटरों के नाम हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है।











































