प्रॉपर्टी खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: म्यूटेशन न होने से बेकार नहीं होगी सेल डीड, मालिकाना हक रहेगा बरकरार| Supreme Court mutation verdict

Nandani | Nedrick News Bihar Published: 10 अक्टूबर 2026, 04:56 AM Updated: 10 अक्टूबर 2026, 04:56 AM
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Supreme Court mutation verdict: मकान, दुकान या जमीन खरीदने वालों के बीच अक्सर यह डर और भ्रम बना रहता है कि अगर प्रॉपर्टी का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) नहीं कराया गया, तो सिर्फ रजिस्ट्री कराने से पूरा मालिकाना हक नहीं मिलेगा। आम बोलचाल में कई बार यह मान लिया जाता है कि जब तक सरकारी रिकॉर्ड में नाम न चढ़े, तब तक रजिस्ट्री अधूरी है। लेकिन अब देश की शीर्ष अदालत ने इस पर बहुत बड़ा और राहत देने वाला फैसला सुनाते हुए आम लोगों के इस भ्रम को हमेशा के लिए दूर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी प्रॉपर्टी का म्यूटेशन नहीं हुआ है, तब भी उसकी सेल डीड (रजिस्ट्री) रद्दी नहीं होगी और खरीदार का मालिकाना हक पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

शीर्ष अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला ‘समीउल्लाह बनाम स्टेट ऑफ बिहार, 2025’ (Samiullah vs State of Bihar, 2025) के मामले की सुनवाई करते हुए दिया।

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जमीन बेचने के लिए दाखिल-खारिज का सबूत जरूरी नहीं| Supreme Court mutation verdict

कोर्ट ने अपने फैसले में एक और अहम बात रेखांकित की है। बेंच ने स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति अपनी मालिकाना हक वाली जमीन या प्रॉपर्टी को बेचना चाहता है, तो उसके लिए म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) का कागज दिखाना अनिवार्य नहीं है। बिना इस दस्तावेज के भी वह व्यक्ति अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से बेचने का पूरा हक रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज दो बिल्कुल अलग प्रक्रियाएं हैं और इन्हें एक साथ मिलाकर नहीं देखा जा सकता।

रजिस्ट्री (सेल डीड) ही तय करती है असली मालिकाना हक

अदालत ने समझाया कि किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री यानी ‘सेल डीड’ असल में उसके टाइटल (स्वामित्व) का ट्रांसफर होती है। इसके जरिए पुराना मालिक कानूनी रूप से संपत्ति का मालिकाना हक खरीदार के नाम ट्रांसफर करता है। सेल डीड ही मुख्य टाइटल डॉक्यूमेंट है और कानून की नजर में यही सबसे अहम सबूत है। अगर आपके पास वैध रजिस्ट्री है, तो आप उस प्रॉपर्टी के असली मालिक माने जाएंगे, भले ही सरकारी बही-खाते में म्यूटेशन हुआ हो या पेंडिंग पड़ा हो।

क्या है म्यूटेशन और कोर्ट ने इसे कैसे समझाया?

अक्सर लोग म्यूटेशन को ही अंतिम मालिकाना हक समझ लेते हैं, जिस पर कोर्ट ने स्थिति साफ की। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, म्यूटेशन सिर्फ रेवेन्यू (राजस्व) या म्यूनिसिपल रिकॉर्ड के लिए होता है, जिससे सरकार को यह पता चलता है कि प्रॉपर्टी टैक्स किससे वसूलना है। यह दस्तावेज किसी भी तरह से मालिकाना हक तय नहीं करता। इसलिए म्यूटेशन का कागज न होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपका हक छिन गया; आपका असली और कानूनी आधार आपकी सेल डीड ही रहेगी।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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