Rewa Corex city row: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का ऐतिहासिक और प्रमुख शहर रीवा इन दिनों एक अजीब और बेहद असहज करने वाले मामले को लेकर इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि जब गूगल पर ‘Corex City of India’ लिखकर सर्च किया जाता है, तो नतीजों में रीवा का नाम सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है। इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस दावे ने जिले में कफ सिरप के अवैध कारोबार और युवाओं में नशे की गहरी पैठ को लेकर एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हालांकि, तकनीकी रूप से यह समझना जरूरी है कि गूगल सर्च रिजल्ट में किसी शहर का नाम आना कंपनी का कोई आधिकारिक सर्टिफिकेट या रैंकिंग नहीं होता। गूगल के नतीजे यूजर सर्च, इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट और एल्गोरिदम के हिसाब से बदलते रहते हैं। फिर भी, सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ऐतिहासिक शहर का नाम इस तरह के नकारात्मक सर्च कीवर्ड से जुड़ने की नौबत क्यों आई?
युवाओं में नशे की गिरफ्त और पुलिस की कार्रवाई| Rewa Corex city row
रीवा में प्रतिबंधित कोरेक्स और नशीली सिरप की तस्करी का मुद्दा कोई नया नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक इस बात को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है कि स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवा इसकी गिरफ्त में तेजी से फंस रहे हैं। हालांकि, रीवा पुलिस ने बीते कुछ समय में नशीली सिरप के नेटवर्क को तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर छापेमारी और सख्त अभियान चलाए हैं, जिनके कई सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं। लेकिन जब इंटरनेट पर शहर को ‘कोरेक्स सिटी’ जैसा टैग मिलने लगता है, तो पुलिस और प्रशासन की उन तमाम कोशिशों के सामने एक नया सवाल खड़ा हो जाता है।
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के सियासी और प्रशासनिक मायने इसलिए भी ज्यादा अहम हो जाते हैं क्योंकि रीवा मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला है। स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान जिस जिले के नुमाइंदे के हाथ में हो, उसी शहर की पहचान इंटरनेट पर नशीली सिरप के हवाले से होने लगे, तो यह विपक्ष और आम जनता दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बन जाता है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि भले ही यह सिर्फ एक ऑनलाइन सर्च ट्रेंड हो, लेकिन यह शहर की साख पर एक बड़ा बट्टा है। इंटरनेट पर इस तरह की पहचान बनने से रोकने के लिए सिर्फ तस्करों की धरपकड़ काफी नहीं होगी, बल्कि नशामुक्ति और युवाओं में जागरूकता को लेकर भी जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे।













































