Bhawana Kanth FCL course: बिहार की जांबाज बेटी और भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। देश की पहली महिला फाइटर पायलटों में शुमार भावना ने भारतीय वायुसेना का सबसे कठिन माना जाने वाला ‘फाइटर कॉम्बैट लीडर’ (FCL) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) से इस प्रतिष्ठित कोर्स को पास करने के साथ ही भावना कंठ बिहार की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं, जिनके नाम यह असाधारण उपलब्धि दर्ज हुई है।
उनकी इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे बिहार सहित दरभंगा, मिथिला और उनके पैतृक गांव बाउर में जश्न का माहौल बन गया। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं।
क्या है फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स और क्यों कहा जाता है ‘टॉप गन’? Bhawana Kanth FCL course
भारतीय वायुसेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर यानी एफसीएल कोर्स को सबसे चुनौतीपूर्ण और एलीट युद्धक प्रशिक्षण माना जाता है। लगभग 20 सप्ताह तक चलने वाले इस बेहद कड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम में पायलटों को जटिल हवाई युद्ध अभियानों, आधुनिक सामरिक रणनीतियों और आसमान में मुश्किल वक्त पर सटीक फैसले लेने की लीडरशिप सिखाई जाती है।
इस कोर्स को पूरा करने के बाद भावना कंठ अब युद्ध के दौरान अग्रिम मोर्चे पर हवाई अभियानों का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हो गई हैं। लड़ाकू विमानों की दुनिया में इस मुकाम तक पहुंचने वाले जांबाज पायलटों को वायुसेना की भाषा में गर्व से ‘टॉप गन’ कहा जाता है।
पहले बैच से लेकर गणतंत्र दिवस परेड तक, हर कदम पर रचा इतिहास
भारतीय वायुसेना ने साल 2015 में महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इसके बाद साल 2016 में जब देश का पहला महिला फाइटर पायलट बैच तैयार हुआ, तो भावना कंठ उसका प्रमुख हिस्सा थीं।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा:
- साल 2019: लड़ाकू विमान से कॉम्बैट मिशन (युद्धक अभियान) को अंजाम देने के लिए पूरी तरह योग्य होने वाली वह पहली भारतीय महिला फाइटर पायलट बनीं।
- साल 2021: राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान फाइटर पायलट के रूप में शामिल होकर उन्होंने एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया था।
चिड़ियों की तरह उड़ने का सपना और इंजीनियर से पायलट बनने का सफर
भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बेगूसराय के बरौनी में हुआ था। मूल रूप से वे दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता तेज नारायण कंठ एक इंजीनियर हैं और मां राधा कंठ गृहिणी हैं। भावना के छोटे भाई नीलांबर और छोटी बहन तनुजा भी इंजीनियर हैं।
भावना के पिता तेज नारायण कंठ बताते हैं कि भावना को बचपन से ही आसमान में चिड़ियों की तरह स्वतंत्र उड़ने का गहरा शौक था। वे शुरुआत में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के जरिए सेना में जाना चाहती थीं, लेकिन उस समय महिलाओं के लिए नियम अलग थे जिससे वह ख्वाहिश तुरंत पूरी नहीं हो पाई।
भावना ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से हासिल की। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के मशहूर बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली। लेकिन उनका असली मुकाम आसमान ही था, जिसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन से हासिल करके दिखाया।











































