Trump Iran economy collapse: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मौजूदा हालात को लेकर बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि ईरान अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो चुकी है और वहां महंगाई की दर करीब 300 फीसदी तक पहुंच गई है। ट्रंप के मुताबिक, मौजूदा वक्त में ईरान के पास न तो कोई अर्थव्यवस्था बची है और न ही तेल का दम।
ईरान के तेल संकट का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि वहां के तेल मंत्री को भी अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। गौरतलब है कि ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने हाल ही में 4 अक्टूबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी के सीईओ हामिद बोवार्ड को कार्यवाहक (अस्थायी) तेल मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और तेल सप्लाई पर बयान| Trump Iran economy collapse
तेल आपूर्ति के बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर ट्रंप ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों के भीतर इस रूट से लाखों बैरल कच्चा तेल निकाला गया है। उन्होंने कहा कि इस रास्ते से तेल की आवाजाही अब युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच रही है और कई बार उससे भी ज्यादा देखने को मिल रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट की रिपोर्टें ट्रंप के इस दावे से थोड़ा अलग तस्वीर पेश करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज समेत प्रमुख समुद्री रास्तों में जारी तनाव और रुकावटों की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव लगातार बना हुआ है।
‘मजबूत डॉलर महंगाई को रोकता है’
अपनी अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का प्रदर्शन शानदार है और इसी वजह से अमेरिकी डॉलर बेहद मजबूत स्थिति में है। डॉलर की मजबूती को देश के लिए वरदान बताते हुए उन्होंने कहा, “हमारा डॉलर बहुत ताकतवर है क्योंकि हम बेहतरीन काम कर रहे हैं। मजबूत डॉलर आपको जीवन देता है। क्या आप जानते हैं कि मजबूत डॉलर क्या करता है? यह महंगाई को रोककर रखता है और आपको महंगाई की मार से बचाता है।”
ट्रंप ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए यह भी कहा कि वे किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान से जुड़ा तनाव जल्द खत्म होगा और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।











































