Reliance Jio 6G patents: देश भर में 5G का दायरा मजबूत करने के बाद रिलायंस जियो ने अब अगली पीढ़ी की टेलीकॉम तकनीक यानी 6G और सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए कमर कस ली है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने साफ किया है कि कंपनी अब केवल पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं रहेगी। जियो अपनी पूरी तरह स्वदेशी ‘सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक’ तैयार कर रही है और 6G के कॉमर्शियल लॉन्च से पहले ही प्री-6G तकनीकों के लिए कई अहम पेटेंट भी फाइल कर चुकी है।
राजधानी नई दिल्ली में 7 से 10 अक्टूबर तक चल रहे 10वें ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026′ के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में आकाश अंबानी ने जियो के इस भविष्यगामी तकनीकी विजन को सामने रखा।
न नए टावर, न नया ढांचा: सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट से बदलेगी स्पीड| Reliance Jio 6G patents
आकाश अंबानी ने सबसे बड़ा और दिलचस्प खुलासा 6G के बुनियादी ढांचे को लेकर किया। उन्होंने बताया कि भारत में 6G कनेक्टिविटी लाने के लिए कंपनी को देश भर में नए मोबाइल टावर खड़े करने या जमीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय, मौजूदा नेटवर्क और टावरों के उपकरणों में एक सॉफ्टवेयर अपग्रेड करके ही उपभोक्ताओं तक 6G की सेवाएं पहुंचा दी जाएंगी।
सीधे शब्दों में समझें तो जिस तरह स्मार्टफोन में नया सॉफ्टवेयर अपडेट आते ही उसका इंटरफेस और परफॉर्मेंस बदल जाती है, ठीक उसी तर्ज पर जियो के मौजूदा टावरों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए 6G नेटवर्क में तब्दील कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जियो का कोर नेटवर्क इतना एडवांस है कि वह भविष्य के किसी भी तकनीकी बदलाव को आसानी से संभालने में सक्षम है।
ग्लोबल 6G पेटेंट में भारत की 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 6G विजन का उल्लेख करते हुए आकाश अंबानी ने कहा कि भारत का लक्ष्य इस तकनीक में दुनिया के पीछे चलने का नहीं, बल्कि दुनिया की अगुवाई करने का है। इसी कड़ी में भारत से कुल वैश्विक 6G पेटेंट में कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है, और जियो इसमें सबसे आगे रहकर भूमिका निभा रहा है।
जियो ने प्री-6G फेज में ही पेटेंट फाइल करने शुरू कर दिए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि कंपनी अब सिर्फ नेटवर्क बिछाने वाली सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) और अगली पीढ़ी की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) तैयार करने वाली टेक कंपनी बन रही है।
भारत से दुनिया के लिए तैयार हो रहा सैटेलाइट स्टैक
सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भी जियो तेजी से कदम बढ़ा रहा है। कंपनी एक ऐसा स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित कर रही है, जो सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर दूसरे देशों में भी किया जा सकेगा। इससे साफ है कि आने वाले समय में जियो स्पेस और सैटेलाइट कनेक्टिविटी के अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुनिया की बड़ी स्पेस टेक कंपनियों को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है।
कॉलिंग और डेटा में डीप AI इंटीग्रेशन
भविष्य के नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर बात करते हुए आकाश अंबानी ने कहा कि एआई टेलीकॉम सेवाओं का पूरा ढांचा बदलने जा रहा है। जियो अपनी वॉयस कॉलिंग और डेटा सेवाओं में डीप एआई इंटीग्रेशन कर रहा है, जिससे नेटवर्क खुद अपनी गुणवत्ता सुधारेगा और यूजर्स को पूरी तरह पर्सनलाइज्ड और स्मार्ट डिजिटल अनुभव मिलेगा। IMC 2026 में जियो ने अपने ‘डिजिटल सोसाइटी’ विजन के तहत 5G, प्री-6G रिसर्च, ऑटोमेटेड नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन का एक पूरा इकोसिस्टम प्रदर्शित किया।
गीगा मीमो रेडियो तैयार, BSNL भी अपना रहा यही फॉर्मूला
भविष्य की तकनीक अपनाने की दौड़ में जियो अपने प्रतिद्वंद्वियों एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) से काफी आगे दिखाई दे रहा है। IMC 2026 में जियो ने ‘प्री-6G स्टैक’ और अत्याधुनिक ‘गीगा मीमो रेडियो’ के साथ एक कॉमन बेस-बैंड यूनिट पेश की, जो एक साथ 5G और 6G दोनों फ्रीक्वेंसी पर काम कर सकती है। कंपनी का दावा है कि 6G नेटवर्क मौजूदा 5G की तुलना में 5 गुना तक ज्यादा कैपेसिटी और स्पीड देगा।
दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कंपनी BSNL भी अपनी 5G सर्विस के लिए इसी फॉर्मूले पर काम कर रही है। बीएसएनएल ने अपने 4G रोलआउट के समय ही नेटवर्क को ‘5G-रेडी’ बनाया था, ताकि केवल सॉफ्टवेयर अपग्रेड के जरिए उसे 5G में बदला जा सके। दुनिया भर में 2030 तक 6G के ग्लोबल स्टैंडर्ड तय होने की उम्मीद है, और जियो की तैयारियों से साफ है कि भारत इस बार दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है।












































