Bihar SIR Form 6: बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर देश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ा पलटवार किया है। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उनके दावों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। आयोग ने साफ किया कि चुनावी नियमों और फॉर्म में किसी भी तरह का बदलाव किसी एक शख्स की मर्जी से नहीं, बल्कि पूरे आयोग की सर्वसम्मत सहमति से हुआ है और इसे देश की शीर्ष अदालत भी सही ठहरा चुकी है।
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राहुल गांधी के तीखे आरोप: ‘लोकतंत्र पर आपराधिक हमला’| Bihar SIR Form 6
पूरे विवाद की शुरुआत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट से हुई। उन्होंने 26 सितंबर के चुनाव आयोग के प्रेस नोट का हवाला देते हुए सीधा आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किए हैं।
It is now established beyond doubt that Gyanesh Kumar changed Form 6 illegally and unilaterally.
This is just one more proof of him abusing his position to help the BJP.
He and everyone else involved in this criminal assault on our democracy will be held accountable. https://t.co/a33eJdPetu
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 5, 2026
राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब सत्ताधारी बीजेपी को सियासी फायदा पहुंचाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के संवैधानिक पद का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र पर ‘आपराधिक हमला’ करार दिया और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस पूरी साजिश में शामिल ज्ञानेश कुमार और बाकी सभी जिम्मेदारों को वक्त आने पर जनता और कानून के सामने जवाबदेह ठहराया जाएगा।
चुनाव आयोग का फैक्ट चेक: ‘दावे बेबुनियाद, फैसला सर्वसम्मत’
राहुल गांधी के इन संगीन आरोपों के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक हैंडल से फैक्ट चेक जारी कर जवाब दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू करने का मूल आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था। यह फैसला किसी एक अधिकारी या सीईसी की मनमर्जी नहीं था, बल्कि चुनाव आयोग के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस पर अपनी मुहर लगाई थी।
Fact Check
❌The statement made in this post is misleading
✅1) The order for SIR in Bihar issued on 24 June 2025 was issued with the unanimous approval of the Commission. This order has been upheld by the Hon’ble Supreme Court of India in its judgment dated 27 May 2026
✅2) In its Press Note No. 120 dated 26 September 2026, in Point 1(iii), ECI has stated that, “The declaration attached to Form 6 for SIR has been upheld by the Hon’ble Supreme Court.”
#ECIFactCheck
— Election Commission of India (@ECISVEEP) October 5, 2026
आयोग ने आगे यह भी बताया कि इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को दिए अपने फैसले में इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह वैध मानते हुए बरकरार रखा था। इसके अलावा 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट नंबर 120 के बिंदु 1(iii) का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ जुड़े घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) को भी सर्वोच्च न्यायालय की मान्यता प्राप्त है। ऐसे में बिना तथ्य जाने जनता के बीच भ्रम फैलाना पूरी तरह गलत है।
इस बीच CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान
जहां एक तरफ चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बयान ने मामले को और दिलचस्प बना दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोग चलाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित या बदले हुए रूप को अपनी मंजूरी नहीं दी है।
चीफ जस्टिस की इस टिप्पणी के बाद सियासी गलियारों में बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपनी बात पर मुहर मान रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के दायरे में रहकर ही पूरी की जा रही है।













































