India Pakistan terrorism challenge: भारत और पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों के दौर में एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। भारत ने हाल ही में इस्लामाबाद में आयोजित क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी बैठक में हिस्सा लिया, जिसकी पुष्टि खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने की है। पाकिस्तान ने न सिर्फ भारत की मौजूदगी की तस्दीक की, बल्कि इसका स्वागत करते हुए आतंकवाद को दोनों मुल्कों के लिए एक साझा चुनौती भी करार दिया। इसके साथ ही, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने फैसलाबाद एयरपोर्ट पर सिख तीर्थयात्रियों को रोके जाने की खबरों पर भी अपनी स्थिति साफ की है।
इस्लामाबाद में SCO की 46वीं बैठक में भारत की मौजूदगी| India Pakistan terrorism challenge
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे (RATS) की परिषद की 46वीं बैठक 14 सितंबर को इस्लामाबाद में आयोजित की गई थी। इस बैठक में भारत के शामिल होने को लेकर जब साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवाल पूछा गया, तो पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने बताया कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रभारी (चार्ज डी अफेयर्स) ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
प्रवक्ता सज्जाद हैदर ने भारतीय भागीदारी का स्वागत करते हुए कहा कि भारत ने इस मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और उम्मीद है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बैठक का बुनियादी मकसद शांति, स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ ठोस लड़ाई लड़ना है। उन्होंने माना कि आतंकवाद दोनों देशों के सामने एक बड़ी और साझी चुनौती है, जिससे मिलकर ही निपटा जा सकता है।
सिख तीर्थयात्रियों को एयरपोर्ट पर रोकने के विवाद पर सफाई
प्रेस वार्ता के दौरान प्रवक्ता से उन मीडिया रिपोर्टों के बारे में भी सवाल किया गया, जिनमें दावा किया गया था कि हेमकुंड साहिब की यात्रा पर भारत जा रहे पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। रिपोर्टों में कहा गया था कि यह जत्था दुबई के रास्ते भारत जाने वाला था, लेकिन यात्रियों को विमान में चढ़ने की अनुमति नहीं मिली।
इस मामले पर प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए इन खबरों को दुर्भावनापूर्ण मीडिया अभियान करार दिया। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों को जानबूझकर विमान में न चढ़ने देने की बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी पक्ष को इस बात की पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी कि भारतीय उच्चायोग ने इन नागरिकों को वीजा जारी किए थे।
1974 के द्विपक्षीय समझौते का दिया हवाला
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया कि दिए गए ये वीजा भारत और पाकिस्तान के बीच 1974 में हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा से जुड़े द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के दायरे में नहीं आते थे। वहीं, एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, इन सिख श्रद्धालुओं ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जरिए अपने भारतीय वीजा का प्रबंध किया था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नियमों के मुताबिक, श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के लिए पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के साथ समन्वय बनाना चाहिए था। इसके अलावा, तय प्रक्रिया के तहत हवाई मार्ग के बजाय अटारी-वाघा जमीनी सीमा के रास्ते भारत जाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की कानूनी या प्रक्रियात्मक अड़चन न आए।












































