US student visa rule: अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले और वहां पहले से पढ़ाई कर रहे लाखों विदेशी छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों को अदालतों में एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। बोस्टन की एक फेडरल अदालत ने उस विवादित नियम के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स के अमेरिका में ठहरने की मियाद को सीमित करने की तैयारी की जा रही थी। अगर यह फैसला न आता, तो छात्रों को अपनी डिग्री पूरी होने के दौरान ही बार-बार वीजा विस्तार के जटिल कानूनी फेर में फंसना पड़ता।
लागू होने से ठीक 24 घंटे पहले जज का कड़ा फैसला| US student visa rule
बोस्टन में तैनात यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एफ. डेनिस सेलॉर (F. Dennis Saylor) ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के इस नए नियम पर रोक लगाने का आदेश बिल्कुल ऐन वक्त पर जारी किया। यह नियम अगले ही दिन से पूरे देश में लागू होना था। इस नीति के खिलाफ अमेरिकी श्रमिक यूनियनों और उच्च शिक्षा की पैरवी करने वाले कई प्रमुख संगठनों ने एक गठबंधन बनाकर अदालत में याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए जज सेलॉर ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की दलीलों पर कड़े सवाल उठाए। सरकार ने इस बदलाव के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था और कहा था कि वीजा नियमों में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को बेहद कमजोर और सतही माना। जज ने दो टूक कहा कि विभाग यह साबित करने में विफल रहा कि छात्रों पर इतना बड़ा प्रशासनिक बोझ डाले बिना क्या कोई दूसरा सरल रास्ता नहीं निकाला जा सकता था। फिलहाल गृह सुरक्षा विभाग ने कोर्ट के इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्या है ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ और ट्रंप प्रशासन क्या बदलना चाहता था?
अमेरिका में पिछले पांच दशकों यानी करीब पचास सालों से ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।
- मौजूदा नियम: इसके तहत F-1 वीजा (विदेशी छात्र) और J-1 वीजा (एक्सचेंज विजिटर्स व रिसर्चर्स) धारकों को कोई तय अंतिम तारीख नहीं दी जाती। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक छात्र का अकादमिक कोर्स या रिसर्च चल रही है, तब तक वह बिना किसी नए आवेदन के वैध तरीके से अमेरिका में रह सकता है।
- प्रस्तावित बदलाव: ट्रंप सरकार जुलाई में जो नया नियम लाई थी, उसके तहत छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि को अधिकतम 4 साल तक सीमित करने का प्रस्ताव था। इसके बाद छात्रों को अमेरिका में बने रहने के लिए नए सिरे से एक्सटेंशन मांगना पड़ता या फिर देश छोड़ना पड़ता।
21 लाख से अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं को सीधा फायदा
वर्तमान में अमेरिका में लगभग 16 लाख छात्र F-1 वीजा पर और करीब 5.5 लाख विजिटर्स J-1 वीजा पर मौजूद हैं। ऐसे में इस फैसले का सीधा फायदा 21 लाख से ज्यादा छात्रों, शोधकर्ताओं और स्कॉलर्स को मिला है। खासकर पीएचडी और मेडिकल जैसे लंबे शोध कार्यक्रमों में 4 साल से ज्यादा का वक्त लगता है, इसलिए यह वर्ग सबसे ज्यादा चिंता में था।
जज सेलॉर ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि इसी पुरानी व्यवस्था के बूते दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं अमेरिका आईं। इसी का नतीजा है कि आज अमेरिका विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व खोजें कर सका है, जिसका फायदा देश की अर्थव्यवस्था को मिला। जज ने हार्वर्ड और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) जैसे दुनिया के शीर्ष संस्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां ग्रेजुएट और रिसर्च स्तर पर बड़ी तादाद में विदेशी छात्र हैं, जो इस व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कोर्ट के इस दखल के बाद फिलहाल विदेशी छात्रों ने सुकून की सांस ली है।












































