जानें 26 तारीख का वो खौफनाक इतिहास, जब-जब आया ये नंबर दुनिया ने देखी तबाही! | History of 26 Date Disasters

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 01 सितम्बर 2026, 10:05 PM Updated: 01 सितम्बर 2026, 10:05 PM
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History of 26 Date Disasters: क्या कैलेंडर की तारीख ’26’ को कोई शाप मिला है? इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि महाविनाश की एक ऐसी कहानी है जो बार-बार खुद को दोहराती है। कुदरत का कहर हो या इंसानी गलतियों से हुए बड़े हादसे, इतिहास में ’26’ तारीख के दिन कुछ ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जिन्होंने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया।

26 जनवरी का भुज भूकंप हो, 26 जुलाई की मुंबई बाढ़, 26 नवंबर का मुंबई आतंकी हमला या फिर 26 दिसंबर की वो खौफनाक सुनामी जिसने आधी दुनिया को हिला दिया था। आखिर क्यों जब-जब कैलेंडर पर ’26’ तारीख आती है, दुनिया पर कोई न कोई बड़ी आफत टूट पड़ती है? तो चलिए इस लेख के जरिए हम उन बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को जानते हैं जो 26 तारीख को ही घटीं।

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नेपाल जलप्रलय 26 अगस्त 2026

सबसे पहले बात करते हैं हाल ही में हुई नेपाल जलप्रलय की। 26 अगस्त 2026 को प्रकृति ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया। नेपाल की भोटे कोशी नदी प्रणाली में मलबे और पानी के अचानक उफान से ऐसी भीषण बाढ़ आई, जिसने देखते ही देखते सब कुछ तबाह कर दिया। इस प्रलय में अब तक 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,500 से ज्यादा लोग लापता हैं। इस ताज़ा त्रासदी ने दुनिया को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई ’26’ तारीख का कोई खौफनाक कनेक्शन है।

मुंबई आतंकी हमला 26 नवंबर 2008 (History of 26 Date Disasters)

नेपाल की प्राकृतिक आपदा के बाद, अब बात करते हैं इंसानी क्रूरता की उस खौफनाक दास्तान की, जिसने पूरी दुनिया को रुला दिया था। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ आतंकी हमला (26/11) भारत के इतिहास का सबसे भीषण हमला माना जाता है। पाकिस्तान से आए 10 लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने मायानगरी मुंबई को खून से नहला दिया था।

ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, लियोपोल्ड कैफे और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसे व्यस्त ठिकानों पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और बम धमाके किए। लगभग तीन दिनों तक चले इस खौफनाक मंजर में 166 बेकसूर लोगों की जान चली गई और 300 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने साबित किया कि 26 तारीख को सिर्फ कुदरत ही नहीं, बल्कि इंसानी हैवानियत भी कहर बनकर टूटती है।

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 26 जुलाई 2008 (History of 26 Date Disasters)

डराने वाली बात यह है कि साल 2008 में ’26’ तारीख का कहर सिर्फ नवंबर में ही नहीं, बल्कि जुलाई में भी टूटा था। मुंबई हमले से ठीक चार महीने पहले, 26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद में सीरियल बम धमाके हुए थे। आतंकियों ने महज 70 मिनट के भीतर पूरे शहर में एक के बाद एक 21 बम धमाके किए। इस कायरतापूर्ण हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। एक ही साल में दो बड़े आतंकी हमलों का 26 तारीख को ही होना, इस तारीख के खौफ को और बढ़ा देता है।

गुवाहाटी धमाके, असम 26 मई 2007 (History of 26 Date Disasters)

साल 2008 के आतंकी हमलों से ठीक एक साल पहले, यानी 2007 में भी ’26’ तारीख ने अपना खौफनाक रूप दिखाया था। 26 मई 2007 को असम के गुवाहाटी में उल्फा (ULFA) उग्रवादियों द्वारा सिलसिलेवार बम धमाके किए गए थे। यह हमला गुवाहाटी के सबसे व्यस्त कमर्शियल इलाके ‘फैंसी बाजार’ और अतगाँव में किया गया था, जहाँ आम लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी।

इन भीषण धमाकों में 7 बेकसूर लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हालांकि मौतों का आंकड़ा अन्य घटनाओं जितना बड़ा नहीं था, लेकिन व्यस्त बाजार में सरेआम हुए इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था और साबित किया था कि 26 तारीख का यह खौफनाक सिलसिला लगातार जारी है।

मुंबई महाजलप्रलय 26 जुलाई 2005

साल 2007 और 2008 के जख्मों से थोड़ा और पीछे मुड़कर देखें, तो साल 2005 की ’26’ तारीख को कुदरत ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर ऐसा कहर बरपाया कि पूरी मायानगरी थम गई। 26 जुलाई 2005 को मुंबई में महज 24 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 944 मिलीमीटर (37.17 इंच) बारिश हुई थी।

इतनी भारी बारिश के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया और मुंबई एक समंदर में तब्दील हो गई।इस भीषण जलप्रलय और उसके बाद फैली बीमारियों के कारण 1,094 लोगों की जान चली गई थी। लाखों लोग सड़कों पर, दफ्तरों में और लोकल ट्रेनों में कई दिनों तक फंसे रहे, घरों में पानी भर गया और अरबों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। मुंबई के इतिहास में इस दिन को आज भी ‘ब्लैक ट्यूसडे’ (काला मंगलवार) कहा जाता है, जो ’26 तारीख’ के खौफनाक इतिहास का एक और बड़ा सबूत है।

हिंद महासागर सुनामी 26 दिसंबर 2004

जब-जब ’26’ तारीख के खौफनाक संयोग की बात होती है, तब साल 2004 का ज़िक्र सबसे पहले आता है। 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भीषण भूकंप आया। इस भूकंप ने समुद्र में ऐसी विनाशकारी सुनामी लहरें पैदा कीं, जिन्होंने भारत समेत दुनिया के 14 देशों के तटीय इलाकों में मौत का तांडव मचाया।

क्रिसमस के ठीक अगले दिन आई इस महातबाही में लगभग 2,28,000 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिनमें से हजारों लोग कभी मिले ही नहीं। भारत में तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बर्बादी हुई थी। समुद्र की 100 फीट ऊंची खौफनाक लहरों ने हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में बदल दिया। यह मानव इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में दर्ज है, जो इत्तेफाक से ’26’ तारीख को ही घटी थी।

बाम भूकंप, ईरान 26 दिसंबर 2003

साल 2004 की सुनामी से ठीक एक साल पहले, यानी 26 दिसंबर 2003 को ईरान के ऐतिहासिक शहर बाम (Bam) में 6.6 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। सबसे डरावनी बात यह है कि यह भूकंप सुबह के वक्त 5:26 बजे आया था, जब अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे।

क्योंकि इस प्राचीन शहर के ज़्यादातर घर मिट्टी और गारे की ईंटों से बने थे, इसलिए वे ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस तबाही में 31,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और शहर की लगभग 80% इमारतें ज़मींदोज़ हो गई थीं। यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस प्राचीन शहर की बर्बादी ने दुनिया को स्तब्ध कर दिया था, और यह सब ठीक उसी तारीख को हुआ जब इसके ठीक एक साल बाद दुनिया ने सुनामी का दंश झेला।

गुजरात (भुज) भूकंप 26 जनवरी 2001

साल 2003 के ईरान भूकंप से दो साल पहले, भारत की धरती पर ’26’ तारीख ने एक ऐसा गहरा जख्म दिया था जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। 26 जनवरी 2001 की सुबह 8:46 बजे, जब पूरा देश 52वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, गुजरात के कच्छ और भुज क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया।

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि महज 2 मिनट के भीतर हजारों इमारतें, स्कूल और घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस भयानक आपदा में लगभग 20,000 लोगों की जान चली गई थी, 1 लाख 67 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे और लाखों लोग बेघर हो गए थे। गणतंत्र दिवस की सुबह खुशियों से गूंजने वाले घरों में देखते ही देखते सिर्फ चीखें और मातम पसर गया। यह भारत के इतिहास के सबसे भीषण भूकंपों में से एक है, जो ’26 तारीख’ के खौफनाक इतिहास को और पुख्ता करता है।

लाउडा एयर फ्लाइट 004 क्रैश 26 मई 1991

प्राकृतिक आपदाओं और आतंकी हमलों के बीच, साल 1991 की ’26’ तारीख को आसमान में एक ऐसी तकनीकी खराबी आई जिसने सैकड़ों मासूमों की जिंदगी पल भर में खत्म कर दी। 26 मई 1991 को लाउडा एयर की फ्लाइट 004 (बोइंग 767 विमान) बैंकॉक से वियना के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद थाईलैंड के जंगलों में क्रैश हो गई।

उड़ान के दौरान विमान के एक इंजन का ‘थ्रस्ट रिवर्सर’ (Thrust Reverser) अचानक और बिना किसी मानवीय निर्देश के हवा में ही खुल गया, जिससे पायलटों ने विमान पर से नियंत्रण खो दिया। विमान इतनी तेज गति से नीचे गिरा कि जमीन पर टकराने से पहले ही हवा में उसके टुकड़े-टुकड़े हो गए। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 223 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी। बोइंग 767 विमान से जुड़ा यह उस समय का सबसे घातक और बड़ा हादसा था, जो इसी रहस्यमयी ’26 तारीख’ को हुआ था।

चेरनोबिल परमाणु आपदा 26 अप्रैल 1986

विमान हादसों और भूकंपों से पीछे मुड़कर देखें, तो साल 1986 की ’26’ तारीख मानव इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी बुरे सपने के रूप में दर्ज है। 26 अप्रैल 1986 की रात को तत्कालीन सोवियत संघ (अब यूक्रेन) के चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र के रिएक्टर नंबर 4 में एक सुरक्षा परीक्षण के दौरान भीषण विस्फोट हुआ।

इस धमाके के कारण रिएक्टर की छत उड़ गई और वातावरण में भारी मात्रा में खतरनाक रेडियोधर्मी (Radioactive) पदार्थ फैल गया। यह रिसाव हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से भी कई गुना ज्यादा घातक था। हादसे के तुरंत बाद और रेडियोधर्मी बीमारियों के कारण हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और लाखों लोगों को हमेशा के लिए अपना घर छोड़ना पड़ा। आज भी चेरनोबिल के आसपास का 30 किलोमीटर का इलाका ‘घोस्ट टाउन’ (Ghost Town) बना हुआ है, जहाँ इंसानों का जाना मना है। यह भयावह मानवीय भूल भी ठीक ’26’ तारीख को ही सामने आई थी।

बेंक्सीहू कोयला खदान हादसा, चीन 26 अप्रैल 1942

अगर हम इतिहास के पन्नों को और पीछे पलटें, तो साल 1942 की ’26’ तारीख को जमीन की गहराइयों में एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। 26 अप्रैल 1942 को चीन के लियाओनिंग प्रांत में स्थित बेंक्सीहू (Benxihu) कोयला खदान में गैस और कोयले की धूल के कारण एक भीषण विस्फोट हुआ।

उस समय इस खदान पर जापानी सेना का नियंत्रण था और चीनी खनिकों से जबरन बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया जा रहा था। धमाके के बाद खदान के भीतर जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस फैल गई। जापानी अधिकारियों ने आग को बाहर आने से रोकने के लिए खदान के वेंटिलेशन (हवा आने-जाने के रास्ते) को बंद कर दिया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर अंदर ही फंस गए। इस दर्दनाक और अमानवीय फैसले के कारण 1,549 खनिकों की दम घुटने से मौत हो गई थी। यह इतिहास का सबसे बड़ा खदान हादसा है, जो ठीक 26 तारीख को ही घटा था।

एर्ज़िनकन भूकंप, तुर्किये 26 दिसंबर 1939

अगर हम इतिहास के पन्नों को थोड़ा और पीछे पलटें, तो साल 1939 की ’26’ तारीख को कुदरत ने तुर्किये पर ऐसा कहर ढाया, जिसे आज भी वहाँ का सबसे भयानक राष्ट्रीय संकट माना जाता है। 26 दिसंबर 1939 की आधी रात को तुर्किये के पूर्वी प्रांत एर्ज़िनकन (Erzincan) में 7.8 तीव्रता का एक महाभूकंप आया। यह भूकंप नॉर्थ एनाटोलियन फॉल्ट लाइन पर आया था और इसके झटके इतने भीषण थे कि महज 52 सेकंड के भीतर पूरा शहर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।

इस भीषण आपदा में लगभग 32,700 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 1 लाख से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके बाद कड़ाके की ठंड और -30 डिग्री तापमान ने जीवित बचे लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। इस भूकंप की विनाशलीला इतनी बड़ी थी कि पुराने शहर को पूरी तरह छोड़ना पड़ा और नए सिरे से शहर बसाया गया। इत्तेफाक देखिए, यह महातबाही भी दिसंबर की उसी ’26 तारीख’ को आई, जिस तारीख को ठीक 65 साल बाद 2004 में दुनिया ने हिंद महासागर की विनाशकारी सुनामी झेली थी।

अंकशास्त्र का नज़रिया (History of 26 Date Disasters)

अंकशास्त्र के जानकारों के अनुसार, 26 तारीख के अंकों को जोड़ने पर 8 नंबर (2+6 = 8) बनता है। ज्योतिष शास्त्र में 8 का अंक शनि देव का माना जाता है, जिन्हें न्याय, कर्म और विनाश का कारक माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग इसे एक भारी या मनहूस तारीख के रूप में देखते हैं।

विज्ञान और इतिहासकार इन दावों को किया खरिज

विज्ञान और इतिहासकार इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह केवल ‘सिलेक्टिव मेमोरी’ (Selective Memory) या ‘कंफर्मेशन बायस’ का मामला है। इंसानी दिमाग उन घटनाओं को जल्दी याद रखता है जो एक ही तारीख को होती हैं। सच यह है कि दुनिया की कई अन्य भीषण आपदाएं (जैसे 2011 की जापान सुनामी) महीने के दूसरे दिनों में भी आई हैं।

चाहे यह महज़ एक गणितीय इत्तेफाक हो या ग्रहों का कोई खेल, लेकिन इतिहास के पन्नों पर दर्ज ये 12 घटनाएं इस बात का गवाह हैं कि जब-जब कैलेंडर पर ’26’ तारीख आई है, मानवता ने गहरे ज़ख्म झेले हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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