KAPL scam: कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (KAPL) के प्रबंध निदेशक (MD) अनुराग दनायक को 15 जुलाई 2026 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नोएडा में ₹5 लाख की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए जाने के बाद कंपनी में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की परतें खुलने लगी हैं।
जहाँ एक ओर अनुराग दनायक न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, वहीं फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) को भेजी गई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक और बिचौलिया अनिल कुमार (डीजीएम, एक्सपोर्ट मार्केटिंग) था।
जबरन वसूली का कथित तंत्र: बैठकें, रिश्वत और दबाव| KAPL scam
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों के अनुसार, अनिल कुमार कथित तौर पर प्रबंध निदेशक अनुराग दनायक के प्रमुख मध्यस्थ के रूप में कार्य करता था:
रिश्वत की कथित वसूली– आरोप है कि अनिल कुमार बड़े शहरों के आलीशान होटलों में KAPL के बिजनेस एसोसिएट्स, C&F एजेंटों और सर्विस वेंडरों के साथ MD की बैठकें आयोजित करवाता था। शिकायतों के अनुसार, अनुबंध रद्द करने या ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर एजेंटों की कमाई अथवा कमीशन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कथित रिश्वत के रूप में वसूला जाता था।

कर्मचारियों और वेंडरों पर कथित दबाव– शिकायतों में कहा गया है कि वेंडरों, वितरकों, फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट (FTC) कर्मचारियों तथा कैंटीन ठेकेदारों तक पर दबाव बनाया जाता था। आरोप है कि जो लोग कथित तौर पर मांगी गई रकम देने से इनकार करते थे, उन्हें नौकरी या व्यापार समाप्त करने की धमकी दी जाती थी।
प्रमोशन और ट्रांसफर में कथित अनियमितताएँ– शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अनुराग दनायक और अनिल कुमार ने मानव संसाधन (HR) विभाग का भी दुरुपयोग किया। ईमानदार कर्मचारियों के बिना कारण तबादले किए गए, जबकि कथित रिश्वत देने वालों को नियमों के विपरीत पदोन्नति दी गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथित फर्जी इनवॉइसिंग का मामला (Forged Invoicing Case)
आंतरिक आरोपों के अलावा, अनिल कुमार पर एक अन्य गंभीर आरोप भी लगाया गया है।
फर्जी इनवॉइसिंग का आरोप– शिकायतों के अनुसार, एक्सपोर्ट मार्केटिंग विभाग में अपने पद का लाभ उठाकर अनिल कुमार विदेशी ग्राहकों के लिए कथित तौर पर बढ़ी हुई राशि वाले (Inflated) इनवॉइस तैयार करता था और बदले में व्यक्तिगत वित्तीय लाभ प्राप्त करता था।

यमन और सूडान से जुड़े आरोप– शिकायतों में यमन और सूडान के ग्राहकों के लिए कथित फर्जी बिलिंग का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से विदेशी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।
जालसाजी के आरोप और कार्यशैली पर सवाल
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अनिल कुमार के विरुद्ध लगाए गए आरोप नए नहीं हैं।
फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप– आरोप है कि एक आंतरिक ऑडिट में यह सामने आया था कि अनिल कुमार वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी करता था। शिकायतों के अनुसार, पूर्व प्रबंध निदेशक स्वर्गीय सुनील कुमार कायमल के ICU में भर्ती रहने के दौरान ₹450 करोड़ की 7-ACA परियोजना से जुड़े कई वित्तीय प्रस्तावों और पदोन्नति पत्रों पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए गए।
निलंबन और विवादों से कथित अवैध वसूली
दनायक और अनिल कुमार की जोड़ी ने कंपनी के प्रशासनिक विवादों को भी कमाई का जरिया बना लिया था:
निलंबित अधिकारियों से कथित मांग
शिकायतों के अनुसार, 7-ACA परियोजना से जुड़े निलंबित अधिकारियों से जांच में राहत और पुनः नियुक्ति के नाम पर प्रति अधिकारी ₹10 लाख की मांग की गई।
आयुर्पार्क मामले में आरोप
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि M/s Ayurpark से जुड़े ₹94 लाख के कथित नकली दवा मामले में शामिल अधिकारियों से मामला सुलझाने के लिए प्रति व्यक्ति ₹5 लाख देने को कहा गया।
पूर्व MD के बकाया भुगतान से जुड़ा आरोप
शिकायतों के अनुसार, पूर्व प्रबंध निदेशक के लगभग ₹1 करोड़ के लंबित भुगतान को जारी कराने के बदले उनके परिवार से ₹15 लाख की कथित रिश्वत ली गई।
राजस्व में गिरावट और जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पिछले 40 वर्षों से लाभ में चल रही इस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (PSU) का राजस्व अनुराग दनायक और अनिल कुमार के कथित गठजोड़ के दौरान ₹430 करोड़ से घटकर ₹375 करोड़ रह गया।
15 जुलाई को दनायक की गिरफ्तारी और उसके परिसरों से लाखों की नकदी, सोना और विदेशी मुद्रा बरामद होने के बाद, अब जांच एजेंसियों (CBI) और मंत्रालय से यह मांग की जा रही है कि अनिल कुमार को भी इस आपराधिक जांच के दायरे में लिया जाए, ताकि KAPL को बर्बाद करने वाले इस पूरे सिंडिकेट का पूरी तरह से सफाया हो सके।
































