Best books on sikh history: बड़े बुजुर्ग कह गए है कि अगर सच्चे दोस्त की तलाश करनी है तो आपको किताबें पढ़नी चाहिए..क्योंकि किताबे कभी भी आपको धोखा नहीं देती.. साथ ही उनसे बेहतर मार्गदर्शक आपके लिए कोई नहीं होता है। खासकर जब किताबें आपके चरित्र और आचरण का आइना बनने लगे तब वहीं किताबें आपके लिए ग्रंथ बन जाती है। गीता हो, कुरान हो, बाइबल हो या फिर श्री गुरु ग्रंथ साहिब.. वैसे तो ये सभी किताबों के फोर्म में ही है, लेकिन सभी अपने अपने धर्मो के लिए बेहद खास है। इन सभी में जहां किसी एक ईश्वर की बातें है तो वहीं श्री गुरु ग्रंथ साहिब एक ऐसी पवित्र ग्रंथ है जहां सिख गुरुओं के साथ साथ हिंदू और मुसलमान दोनो धर्मो के संतो की बोलियां शामिल की गई.. जो सबूत है कि सिख धर्म के लिए सभी एक समान ही है। जो पवित्र है.. वहीं सिख है.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि सिख धर्म से जुड़ी और भी किताबें है, जो हर पंजाबी और सिख को पड़नी चाहिए.. जो आपको सिक्खी के और करीब ले जाती है।
सिखों का इतिहास – History of the Sikhs
पंजाब में सिख धर्म की स्थापना से लेकर उनके साहसपूर्ण कारनामों को शब्दों में पिरोया है मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने। पंजाब में सिखों को लेकर लिखी गई किताब को असल में सबसे पॉपुलर और प्रमाणिक किताब के रूप में भी देखा जाता है। ये किताब दो हिस्सों में आई थी, जिसमे पहले हिस्से में साल 1469 में पहले गुरु नानक देव जी के जन्म से लेकर शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के शासन काल तक सिखों की स्थिति का विवरण है तो वहीं जबकि दूसरे पार्ट में 1839 से लेकर आधुनिक पंजाब की स्थिति और सिखों की सोच में आई बदलाव को लेकर बताया गया है। ये किताब सिख धर्म और पंजाब, दोनो के आगे बढ़ने की कहानी को एक साथ लेकर चलती है।
पंजाब का सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास
सिखो धर्म के पहले पंजाब कैसा रहा होगा.. इसकी जरा कल्पना करके देखिये.. एक ऐसी ही कल्पना की है लेखक जेएस ग्रेवाल ने.. जिन्होंने 3000 ईसा पूर्व से लेकर 1000 ईसापूर्व तक पंजाब की भौगोलिक स्थिति में आने वाले बदलाव और समय के साथ यहां कैसे सांस्कृतिक बदलाव आये.. धर्म बदला तो संस्कृति भी बदली..और कैसे इससे पंजाब की पूरी भौगोलिक स्थिति बदलती गई.. उसके बारे में विस्तार से बताया गया है।
भाई गुरदास जी की वारान
सिख धर्म क्या है, कैसा है, और क्यों ये सभी धर्मो से सबसे अलग है, इससकी व्याख्या पन्नो पर उतारने का सबसे पहला श्रैय जाता है भाई गुरदास जी को.. वे सिख धर्म के पहले व्याख्याकार कहे जाते है। उन्होने सिख परंपरा की शुरुआत कैसे हुआ,, वो किन नैतिकताओं के आधार पर एक महान धर्म बनने लगा.. जैसी कई बिंदुओ को प्रमाणित रूप से बताते है। भाई गुरदास की रचनाओ को गुरु ग्रंथ साहिब की कुंजी भी कहा जाता है। जिन्हें सिख धर्म को वाकई में करीब से समझना है, जानना है, उन्हें बाई गुरदास की वारान जरूर पढ़नी चाहिए।
द सिखों – The sikhs
अंग्रेजी में द सिख्स के नाम से छपी ये किताब मशहूर लेखर पटवंत सिंह द्वारा रचित है। लेखक ने इस किताब में न केवल सिखों के इतिहास को सरल तरीकों से बताया है बल्कि उन्होंने ये भी बहुत ही आसान तरीके से समझाया है कि आखिर क्यों एक ऐसा धर्म जो शांति, अहिंसा, औऱ न्यायप्रिय धर्म था.. जो खून खराबे के रास्ते पर चलने के बजाये अध्यात्मिकता पर चलता था, लेकिन जब उनपर अत्याचार बढ़ा तो उन्होंने भी हथियार उठा लिए और उसके बाद तो उनके आगे कोई टिक ही नहीं सका..उन्होंने अपनी अध्यात्मिकता और शस्त्रविद्या के दम पर एक शक्तिशाली सिख सम्राज्य खड़ा कर दिया था।













































