G-7 Summit News: कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अहम वैश्विक मुद्दे को मजबूती से उठाया। उन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और उसके बीच भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों और युद्धों का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और वैश्विक सहयोग के जरिए ही संभव है।
जी7 सम्मेलन के आउटरीच सत्र में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी तभी सार्थक बन सकती है जब देश मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान खोजें। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी याद दिलाया कि हालिया संघर्षों ने कई देशों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
भारतीय नाविकों की मौत पर जताई चिंता| G-7 Summit News
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय नागरिकों की जान जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अस्थिरता का असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार में बाधा आने से दुनिया भर के देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापार को एक-दूसरे से जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
‘बिना भय के काम कर सकें सीफेयरर्स’
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि दुनिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित बने रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से होता है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के महीनों में होर्मुज क्षेत्र में कई जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत पहले भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है।
वैश्विक संकट में भारत की भूमिका पर भी बोले पीएम
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संकटों के समय भारत की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा “मानवता पहले” की नीति पर काम किया है और संकट की घड़ी में दुनिया के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका निभाई है। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। इसके अलावा श्रीलंका में आए तूफान, अफगानिस्तान के भूकंप, मोज़ाम्बिक की बाढ़ और क्यूबा-जमैका में आए तूफानों के दौरान भी भारत ने जरूरतमंद देशों की मदद की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास साझेदारियां भी इसी सोच को दर्शाती हैं, जहां क्षमता निर्माण, कौशल विकास और मानव संसाधन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
G7 सम्मेलन में कई नेताओं से हुई मुलाकात
जी7 शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कई प्रमुख वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात भी की। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संक्षिप्त बातचीत की और दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा पीएम मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। सम्मेलन में आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक सुरक्षा और नई तकनीकों से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई।



























