Old Pension Scheme: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने संसद में अपना रुख साफ कर दिया है। लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने OPS को इसलिए बंद किया था, क्योंकि लंबे समय में इसका बोझ सरकारी खजाने पर लगातार बढ़ता जाता और यह वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं था। सरकार ने फिलहाल OPS की वापसी के बजाय कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को विकल्प के तौर पर पेश किया है।
राज्यों को OPS बहाल करने की आजादी, लेकिन वित्तीय बोझ की चिंता| Old Pension Scheme
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो राज्य अपने स्तर पर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू कर रहे हैं, वे अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट्स में इस तरह के फैसलों से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले संभावित दबाव को लेकर चिंता जताई गई है। यानी OPS बहाली का फैसला राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन इसके लंबे समय के आर्थिक असर को लेकर सवाल बने हुए हैं।
OPS और NPS में क्या है बड़ा अंतर?
OPS और NPS के बीच सबसे बड़ा अंतर पेंशन तय होने के तरीके का है। पुरानी पेंशन योजना एक डिफाइंड बेनिफिट सिस्टम थी। इसमें कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद तय नियमों के मुताबिक पेंशन मिलती थी और इसके लिए कर्मचारी को अपने वेतन से नियमित अंशदान नहीं करना पड़ता था। पेंशन का खर्च सरकार के बजट से उठाया जाता था।
वहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन सिस्टम है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों पेंशन खाते में योगदान करते हैं। इस रकम को बाजार में निवेश किया जाता है और रिटायरमेंट के समय मिलने वाला लाभ निवेश के रिटर्न पर भी निर्भर करता है। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से सशस्त्र बलों को छोड़कर नए भर्ती होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS की जगह NPS लागू किया था।
NPS से कर्मचारी क्यों नाराज हैं?
कर्मचारी संगठनों की मुख्य आपत्ति NPS में मिलने वाली पेंशन की अनिश्चितता को लेकर रही है। NPS में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन पहले से तय नहीं होती। यह जमा फंड, बाजार के रिटर्न और उस समय लागू एन्युटी दरों पर निर्भर करती है। ऐसे में समान पद और समान अवधि तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों की पेंशन भी अलग हो सकती है। कर्मचारी संगठन बाजार के जोखिम और एन्युटी दरों में कमी का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं।
UPS में 25 साल की सेवा पर 50% सुनिश्चित पेंशन
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की इस चिंता को देखते हुए UPS में निश्चित पेंशन का प्रावधान किया है। इसमें 25 साल या उससे ज्यादा की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन के तौर पर दिया जाएगा। मसलन, अगर किसी कर्मचारी का अंतिम 12 महीनों का औसत मूल वेतन 80,000 रुपये है, तो उसे 40,000 रुपये मासिक सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। 10 से 25 साल के बीच सेवा वाले कर्मचारियों को सेवा अवधि के अनुपात में पेंशन मिलेगी।
न्यूनतम 10 हजार रुपये पेंशन और महंगाई राहत
UPS में कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए 10,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है। इसके अलावा महंगाई से राहत देने के लिए सुनिश्चित पेंशन, न्यूनतम पेंशन और पारिवारिक पेंशन पर महंगाई राहत (DR) भी मिलेगी। इससे समय के साथ बढ़ती महंगाई का असर कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
पति या पत्नी को मिलेगी 60% पारिवारिक पेंशन
पेंशनभोगी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके वैध रूप से विवाहित जीवनसाथी को अंतिम तयशुदा पेंशन का 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा। इस पर भी नियमानुसार महंगाई राहत का लाभ मिलता रहेगा। इसका मकसद कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है।
ग्रेच्युटी के अलावा अतिरिक्त एकमुश्त रकम
UPS में रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को ग्रेच्युटी के अलावा एक अतिरिक्त एकमुश्त भुगतान भी मिलेगा। इसकी गणना सेवा के हर छह महीने के बदले एक महीने के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के 10वें हिस्से के आधार पर की जाएगी। खास बात यह है कि इस अतिरिक्त रकम का कर्मचारी की 50 प्रतिशत सुनिश्चित मासिक पेंशन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।






































