Gen Z Survey India: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जेन-जी युवाओं की गाली-गलौज को लेकर काफी चर्चा हुई थी। प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें युवाओं को आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर चिंता जताते हुए एक वीडियो में कहा था कि ये भटके हुए युवा हैं और अब उन्हें सही रास्ता दिखाने का वक्त है। हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने युवाओं की भाषा का बचाव करते हुए तर्क दिया कि आज की Gen-Z रोजमर्रा की बातचीत में भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करती है और उनके लिए यह सामान्य बात है।
इसी बहस के बीच सी-वोटर ने Gen-Z युवाओं के बीच सर्वे कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर गाली-गलौज और नेताओं के प्रति ऐसी भाषा को लेकर उनकी वास्तविक राय क्या है।
गाली-गलौज को लेकर क्या सोचती है Gen-Z? Gen Z Survey India
सी-वोटर के सर्वे में 1270 Gen-Z युवाओं को शामिल किया गया। सर्वे के मुताबिक करीब 29 फीसदी युवाओं ने नेताओं को गाली देने का समर्थन नहीं किया। वहीं 21.4 फीसदी युवाओं ने कहा कि उन्हें गाली-गलौज की भाषा स्वीकार्य नहीं है।
दूसरी तरफ, 21.4 फीसदी युवाओं ने गाली-गलौज की भाषा को स्वीकार्य बताया, जबकि 15.1 फीसदी ने कहा कि कुछ हद तक नेताओं को गाली देने वाली भाषा उन्हें स्वीकार्य है। करीब 13 फीसदी युवाओं ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
आंकड़ों को देखें तो गाली-गलौज के विरोध में रहने वाले युवाओं की संख्या ज्यादा है। हालांकि, किसी न किसी रूप में नेताओं को गाली देने वाली भाषा का समर्थन करने वालों की हिस्सेदारी भी करीब 36 फीसदी के आसपास है।
वोटिंग में राष्ट्रवाद कितना बड़ा मुद्दा?
सर्वे में Gen-Z से यह भी पूछा गया कि क्या वोटिंग का फैसला लेते समय राष्ट्रवाद उनके लिए जरूरी फैक्टर है। इस सवाल पर 49.5 फीसदी युवाओं ने सहमति जताई। यानी करीब आधे युवाओं के लिए चुनाव में वोट देते समय राष्ट्रवाद एक अहम मुद्दा बना रहता है।
इसके उलट 26.5 फीसदी ने इससे असहमति जताई, जबकि 24 फीसदी युवा इस सवाल पर स्पष्ट राय नहीं दे सके।
उम्मीदवार की पढ़ाई भी देखती है Gen-Z
उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी युवाओं की राय सामने आई। सर्वे में शामिल 59.5 फीसदी लोगों ने माना कि वोट देते समय उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता को देखना बहुत जरूरी है। वहीं 19.2 फीसदी ने इसे कुछ हद तक जरूरी बताया। इसके अलावा 13.9 फीसदी युवाओं का मानना था कि उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं है, जबकि 7.4 फीसदी ने कहा कि उन्हें इस बारे में पता नहीं है।
युवा उम्मीदवारों को टिकट मिले तो वोट देंगे?
Gen-Z के बीच युवा नेताओं को लेकर भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। सर्वे में 74.6 फीसदी युवाओं ने कहा कि अगर बड़ी राजनीतिक पार्टियां युवा उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती हैं, तो वे उन्हें वोट देना चाहेंगे। इसके मुकाबले सिर्फ 11.9 फीसदी ने युवा उम्मीदवारों को वोट देने से इनकार किया, जबकि 13.5 फीसदी इस सवाल का जवाब नहीं दे सके।
माता-पिता पर सबसे ज्यादा भरोसा
जब Gen-Z से पूछा गया कि वे सबसे ज्यादा भरोसा किस पर करते हैं, तो माता-पिता सबसे आगे रहे। सर्वे में 75.1 फीसदी युवाओं ने अपने पेरेंट्स पर भरोसा जताया। इसके बाद दोस्तों पर 6.9 फीसदी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर 6.8 फीसदी युवाओं ने भरोसा जताया। वहीं 11.2 फीसदी ने कोई जवाब नहीं दिया।
कैसे हुआ सर्वे?
CVoter Snap Poll के ये आंकड़े CATI यानी Computer Assisted Telephone Interview के जरिए जुटाए गए। इसमें देशभर के 18 साल या उससे अधिक और 35 साल से कम उम्र के लोगों को शामिल किया गया। सर्वे के मुताबिक मैक्रो लेवल पर अनुमानित त्रुटि सीमा +/-3 फीसदी और माइक्रो लेवल ट्रेंड पर +/-5 फीसदी है, जबकि कॉन्फिडेंस इंटरवल 95 फीसदी है।
कुल मिलाकर, सर्वे की तस्वीर बताती है कि Gen-Z को केवल सोशल मीडिया पर दिखने वाली आक्रामक भाषा से आंकना आसान नहीं है। बड़ी संख्या में युवा गाली-गलौज का विरोध करते हैं, वहीं राष्ट्रवाद, उम्मीदवार की शिक्षा और युवा चेहरों को लेकर भी उनकी अपनी स्पष्ट राय है।
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